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फैटी लीवर क्या है ? जाने होम्योपैथिक उपचार से कैसे किया जा सकता है फैटी लीवर का इलाज

डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल मे पोस्ट एक यूट्यूब शोर्टस के माध्यम से यह बताया कि हर व्यक्ति के शरीर में मौजूद लीवर शरीर का सबसे बड़ा अंग होता है, जो भोजन को पचाने, शरीर के ऊर्जा को जमा करने और शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है | यदि बात करें तो फैटी लीवर की यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमे अनियमित रूप से वसा लीवर में जमा होने लग जाते है | दरअसल लीवर में मौजूद वसा की मात्रा यदि बहुत कम है तो यह सामन्य-सी बात होती है ओर इससे किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होता, लेकिन अगर लीवर में मौजूद वसा इसके वजन से 5 प्रतिशत अधिक है तो इस समस्या को फैटी लीवर या फिर वसायुक्त कहा जाता है | 

डॉक्टर सोनल जैन ने यह भी बताया की फैटी लीवर दो प्रकार के होते है, पहला है नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर और दूसरा है अल्कोहलिक फैटी लीवर | आइये जानते है दोनों में क्या अंतर है :- 

 

  • नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर :- यह समस्या भी दो प्रकार के होते है पहला जो साधारण फैटी लीवर की समस्या होती है, उसमे बिना लीवर की कोशिकाओं में सूजन के वसा एकत्रित होने लग जाते है, साथ ही इसकी जटिलताओं का जोखिम खतरा भी बहुत कम होता है और जो दूसरा नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर होता है उसे स्टीटोहेपेटाइटिस के नाम से से भी जाना जाता है, जो लीवर की कोशिकाएं में सूजन और लीवर को अन्य नुकसान भी पहुंचाने लग जाता है |

 

  • अल्कोहलिक फैटी लीवर :- जो व्यक्ति शराब और धूम्रपान जैसे नशीली पदार्थों का सेवन सबसे अधिक करता है वह  अल्कोहलिक फैटी लीवर का शिकार हो जाता है | 

 

यदि आप भी फैटी लिवर जैसी समस्या से गुज़र रहे है और इलाज करवाना चाहते है तो इसके लिए आप डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक उपचार में स्पेशलिट है,  जो होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग कर इस समस्या को कम करने में आपकी पूरी तरह से मदद कर सकते है | इसलिए डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी की वेबसाइट पर जाएं  और आज ही अपनी अप्पोइन्मनेट को बुक करें या फिर वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है | 

 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते  है | इस चैनल पर इस विषय संबंधी पूरी जानकारी पर वीडियो बनाकर पोस्ट की हुई है |

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साइनोसाइटिस क्या होता है और जाने कैसे किया जाता है होम्योपैथिक उपचार से इस समस्या का इलाज ?

डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक यूट्यूब वीडियो में यह बताया की साइनोसाइटिस एक ऐसी समस्या होती है जिसमें आपके साइनस के ऊतकों में सूजन की समस्या उत्पन्न हो जाती है और साइनस के स्थान पर म्यूकस और कीटाणु भर जाते है | जिस वजह से साइनस टिशू सर्दी, एलर्जी से संक्रमित होकर सूज जाती है, जो साइनस के प्रवेश को बंद कर उस मार्ग पर म्यूकस को फंसा देती है | उस मार्ग में म्यूकस का जमा होने के कारण सिरदर्द और दबाव जैसे लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते है | 

 

आसान भाषा में बात करें तो साइनोसाइटिस एक ऐसी समस्या है, जिससे पीड़त व्यक्ति के गले और नाक में सूजन और इन्फेक्शन हो जाता है | हलाकि इलाज करने के बाद भी गले और नाक का इन्फेक्शन तब तक ठीक नहीं होता, जब तक यह साफ़ नहीं हो जाता | आइये जानते है साइनोसाइटिस के मुख्य लक्षण कौन-कौन से होते है :- 

 

  • नाक का बंद होना 
  • गले और नाक में जलन होना
  • चेहरे पर दबाव पड़ना और दर्द होना 
  • गंध के प्रति कम अनुभूति होना 

 

यदि बात करें कि साइनस क्या होता है तो यह आपके सिर में मौजूद चार युग्मित गुहाएँ होती है, जो संकीर्ण मार्ग को आपस में जोड़ती है | आमतौर पर साइनस का कार्य बलगम बनाना होता है, जो नाक के मार्ग से बाहर की तरफ निकलता है | इसके साथ ही जल निकासी नाक को साफ़ और कीटाणु जैसे रोगजनकों से मुक्त रखने में मदद भी करती है | 

 

डॉक्टर सोनल जैन ने यह भी बताया की साइनोसाइटिस से पीड़ित व्यक्ति कई बार इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एलॉपथी दवाओं का सहारा ले लेते है, जो समस्या को कम करने के बजाये, इसे बढ़ावा देने का काम करती है | लेकिन घबराएं नहीं साइनोसाइटिस का होम्योपैथिक उपचार की मदद से आसानी से इलाज किया जा सकता है, क्योंकि होम्योपैथी दवाओं से शरीर पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव पड़ता और साथ ही यह समस्या को जड़ से ख़तम करने में मदद भी करते है | 

 

यदि आप ही साइनोसाइटिस की समस्या से पीड़ित हो तो इलाज के लिए आज ही डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | आप चाहे तो वेबसाइट में मौजूद नंबरों से भी संपर्क कर सकते है |

 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप दिए गए लिंक पर क्लिक कर इस वीडियो को पूरा देखें | इसके आलावा आप डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है |    

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एक्जिमा क्या होता है और इसके मुख्य लक्षण कौन से है ? जाने होम्योपैथी से कैसे करें इसका इलाज

डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी के सीनियर डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक यूट्यूब शॉर्ट्स में यह बताया कि आज के समय में सबसे आम होने वाली समस्या में से एक है एक्जिमा, एक्जिमा एक किस्म की ऐसी समस्या है जिससे सामान्य-सी  दिखने वाली स्थिति भी त्वचा में लाल और सूजन जैसे विकार उतपन्न हो जाते है | त्वचा में कभी यह सुखी पपड़ी की तरह भी दिख सकता है या फिर कभी यह धब्बों के तरह भी दिख सकता है और कई बार गंभीर स्थिति होने पर यह छालों में परिवर्तित भी हो सकता है |   

 

अगर बात करें की एक्जिमा क्या होती है तो यह त्वचा से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिससे पीड़ित व्यक्ति को अपनी त्वचा  पर खुजली, लालिमा, सूजन और सूखापन जैसी समस्या होने लग जाती है | यह समस्या अक्सर शरीर की त्वचा पर पैच के रूप में दिखाई देने लग जाते है, जो पपड़ीदार और रिसने वाले तरल पदार्थ में परिवर्तित हो जाते है | हालाँकि इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति काफी असुविधाजनक हो जाता है, लेकिन एक्जिमा किसी भी तरह का संक्रामक नहीं होता है | यह एक तरह की चलनसार स्थिति होती है, जिसे होम्योपैथी की दवाओं से इसे प्रंबंधित और इसके लक्षण को कम किया जा सकता है | 

आइये जानते है एक्जिमा के मुख्य लक्षण कौन से :-    

 

एक्जिमा के प्रमुख लक्षण 

 

  • त्वचा में काफी खुजली होना  
  • सुखी त्वचा या फिर लालिमा होना 
  • खारिश के बाद त्वचा का सूज जाना
  • पपड़ीदार या फिर रिसने वाले पैच का उत्पन्न होना 
  • त्वचा पर गोल सा दाग पड़ना या फिर छाले पड़ना 
  • किसी भी तरह की चीज़ से आपकी त्वचा का संवेदनशील होना 

 

लेकिन इस बात का खासकर ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में एक्जिमा के लक्षण अलग-अलग तरह से भी दिखाई देते है | यदि आप भी एक्जिमा की समस्या से गुज़र रहे है और होम्योपैथी इलाज करवाना चाहते है तो इसमें डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी आपकी संपूर्ण रूप से मदद कर सकता है | बाकियों दवाओं की तुलना में होम्योपैथी एकलौती ऐसी दवा है, जिससे शरीर पर किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं पड़ते | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथी दवाओं में स्पेशलिस्ट है जो इस समस्या को कम करने में आपकी मदद कर सकते है |

 

इसलिए आज ही  सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर हैं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है या फिर डॉक्टर सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी क्लिनिक नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है| इस चैनल पर आपको इस विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जाएगी |     

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क्या होम्योपैथी दवाएं कर सकती है अस्थमा का इलाज, जानें एक्सपर्ट्स से क्या है इस पर उनकी राय

अस्थमा व्यक्ति के शरीर के श्वसन प्रणाली से जुड़ी एक गंभीर बीमारी होती है | वैसे तो यह बीमारी जीन के द्वारा बच्चों में आ जाती है, लेकिन आजकल के बदलती लाइफस्टाइल के कारण कई लोग इस बीमारी का शिकार भी हो रहे है | अस्थमा को भयंकर बीमारियों में एक माना जाता है, क्योंकि यह फेफड़ों में सांस जाने वाली नली को इतनी पतली कर देती है, जिस कारण पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ जाता है |  

 

डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक की निदेशक और सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन ने अपनी यूट्यूब चैंनले में पोस्ट  एक वीडियो के माध्यम से यह बताया कि अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसका पूर्ण रूप से इलाज नहीं किया जा सकता, लेकिन आप इस बीमारी को नियंत्रित ज़रूर कर सकते है | अस्थमा के सामान्य लक्षणों में शामिल है साँस लेने में तकलीफ होना, खांसी होना, बलगम आना और सांस लेते दौरान घरघर जैसे आवाज़ का आना | जो एलॉपथी विशेषज्ञ होते है वह मरीज़ को इन्हेलर लेने की सलाह देते है, ताकि अस्थमा के अटैक से मरीज़ बचे रहे | लेकिन क्या आपको इस बात का पता है की होम्योपैथी उपचार से अस्थमा का प्राकृतिक रूप से इलाज किया जा सकता है | 

 

डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक एकलौती एक ऐसी संस्था है जहाँ अस्थमा का इलाज होम्योपैथिक दवाओं के उपयोग से किया जाता है | यह न केवल समस्या से शरीर पर पड़ रहे प्रभाव को कम करता है, बल्कि समस्या को जड़ से ख़तम करने की भी कोशिश करता है | यह तो सभी जानते है की होम्योपैथिक दवाओं से शरीर पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता , इन दवाओं का असर भले ही धीरे-धीरे होता है, लेकिन यह समस्या को जड़ से ख़तम करने में सक्षम होती है |  

 

यदि आप भी अस्थमा की समस्या से जूझ रहे है और एलॉपथी दवाओं का सहारा लेने के बाद भी स्थिति पर किसी भी तरह का सुधार नहीं आ रहा है तो आप डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक से परामर्श कर सकते है | इस संस्था की निदेशक और सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक में स्पेशलिस्ट है और इन्हे 18 से अधिक वर्षों का तज़र्बा है, जो अस्थमा जैसी गंभीर समस्या को कम करने में आपकी मदद कर सकते है | इसलिए आज ही डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करें या फिर आप दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है |

 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक नामक यूट्यूब चैनल पर विजिट करें, यहाँ आपको इस समस्या से संबंधित संपूर्ण जानकारी पर वीडियो मिल जाएगी |        

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विटिलिगो या फिर सफ़ेद दाग के लिए होम्योपैथिक उपचार कौन से है ?

विटिलिगो त्वचा से जुड़ी एक ऐसी चिकित्सा बीमारी है, जिसमे व्यक्ति के शरीर के किसी भी हिस्से के त्वचा में सफ़ेद दाग और धब्बे नज़र आने लग जाते है | चिकित्स्कीय भाषा में इस समस्या को ल्यूकोडर्मा कहा जाता है | यह व्यक्ति के शरीर में किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है | यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब मानव शरीर में मौजूद कोशिकाएं मेलानोसाइट्स, जो मेलेनिन के उत्पादन करने का कार्य करती है, किसी कारणों से मर जाती है या फिर काम करना बंद कर देती है | विटिलिगो मानव के जीवन पर किसी भी प्रकार का संक्रमक या फिर खतरा नहीं होता है, लेकिन इससे दिखने वाली सफ़ेद धब्बे व्यक्ति के लिए तनावपूर्ण और खुद पर बुरा महसूस करवाती है | 

 

डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक के निदेशक और सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक वीडियो के माध्यम से यह बताया कि अक्सर लोग विलिटिगो की तुलना गंभीर बीमारियों से करते है | लेकिन यह समस्या इतनी भी गंभीर नहीं होती,  जीतन अलग दावा करते है | विलिटिगो समस्या तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति के शरीर में मौजूद प्रतीक्षा प्रणाली मेलानोसाइट्स कोशिकाएं पर हमला कर देते है है जिसकी वजह से यह कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाते है | इसके अधिकतर लक्षण में यह शरीर के किसी भी हिस्से में सफ़ेद धब्बे के रूप में नज़र आने लग जाता है | इसके अलावा त्वचा के वर्णक का कम होना भी विटिलिगो के लक्षणों में शामिल है |  

 

डॉक्टर सोनल जैन ने यह बताया की विटिलिगो का कोई वास्तविक इलाज नहीं है, लेकिन होम्योपैथी एकमात्र ऐसी दवाई है, जिसके उपयोग से त्वचा के रंग में हो रहे नुकसान की प्रक्रिया को रोकने और धीमी करने में मदद मिल सकती है और साथ ही यह त्वचा के पिग्मेंट को बढ़ाने का भी कार्य करती है | यदि आप भी विटिलिगो की समस्या से गुजर रहे है और इलाज करवाना चाहते है तो आप इसके लिए डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक से परामर्श कर करते है | 

 

डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक किसी भी समस्या के कारणों पर नहीं, बल्कि जड़ से ख़तम करने के लिए उपचार करती  है | यह बात तो सभी जानते है की होम्योपैथी दवाओं से शरीर पर किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है | इस संस्था में  बहुत ही सहज तरीके से हर बिमारियों का उपचार किया जाता है | 

 

इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक नामक यूट्यूब चैनल पर विजिट कर सकते है | इस चैनल पर इस विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो मिल जाएगी | इसके अलावा आप डॉ सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक से भी संपर्क कर सकते है, इस संस्था के डॉ सोनल जैन होम्योपैथी दवाओं में स्पेशलिस्ट है, जो इस समस्या को कम करने में आपकी मदद कर सकते है |

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बवासीर जैसी समस्या से निजात पाने के लिए होम्योपैथी है उत्तम, जानिए कैसे ?

भारत इकलौता ऐसा देश है, जहाँ मिर्च-मसालों का सेवन सबसे ज्यादा होता है, जिस वजह से यहाँ पाइल्स जैसी बीमारी का होना बहुत आम है | जिससे बवासीर, अर्श और हेमोर्रोइड्स की समस्या भी कहा जाता है | पाइल्स यानी बवासीर एक किस्म की गंभीर और तकलीफदेह रोग है, जिसके सबसे ज़्यादा मामले भारत में पाए जाते है | इस रोग से अधिकतर लोग पीड़ित है, खासकर महिलाएं जो शर्म और झिझक के कारण किसी को भी इस समस्या के बारे में नहीं बताती है और तकलीफ से जूझती रहती है | 

 

पाइल्स क्या है ?  

पाइल्स की वजह से गूदे की शिराओं में सूजन आ जाती है, जिसके चलते उस स्थान पर मस्से जैसे बन जाते है | आम भाषा में इस समस्या को बवासीर के मस्से भी कहते है | इस सूजन के कारण मल त्यागते दौरान काफी तकलीफ होती है साथ ही उसके बाद मस्से बने क्षेत्र में दर्द, जलन और खुजली होने लगती है | 

 

पाइल्स कितने प्रकार के होते है ?  

पाइल्स दो तरह के होते है इंटरनल और एक्सटर्नल | कई लोग इस समस्या को बादी या फिर खुनी बवासीर भी कहते है | बादी बवासीर में मस्से बने क्षेत्र में दर्द और बहुत जलन होता है, लेकिन खून नहीं निकलता | वही खुनी बवासीर में दर्द और जलन जैसी समस्या नहीं होती, लेकिन ब्लीडिंग होने लगती है | 

 

पाइल्स होने के मुख्य कारण क्या है ?  

  • कब्ज़ की समस्या का होना 
  • अनियमित दैनिक कार्य 
  • बार-बार दस्त या पेचिस की समस्या होना  
  • गर्भावस्था के दौरान 
  • विरासत अनुवांशिक
  • बहुत समय तक एक जगह में बैठे रहना 
  • मोटापे की वजह से 
  • बुढ़ापे के आने से 
  • ख़राब खानपान 
  • किसी बीमारी की वजह से 

 

पाइल्स होने के मुख्य लक्षण क्या है ?    

  • अनुस में मस्से का उत्पन्न होना 
  • मल त्यागते समय दर्द, जलन और खुजली होना 
  • बैठने समय अत्यधिक दर्द का अनुभव होना 
  • मलद्वार क्षेत्र में सूजन या फिर लाल हो जाती है 
  • मल त्यागते समय ब्लीडिंग होना 
  • पेशाब करने के लिए बार-बार जाना 
  • कोई पुराना रोग की वजह से कमर दर्द 
  • कमज़ोर महसूस होना 

 

होम्योपैथिक उपचार कैसे करें ?    

यह बात तो सभी को पता है की होम्योपैथिक दवाओं से किसी भी तरह का शरीर पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है | भले ही इसकी प्रक्रिया बाकियों के मुकलबले काफी स्लो है लेकिन यह समस्या को जड़ से ख़तम कर देता है | इसलिए होम्योपैथिक उपचार से पाइल्स बिना किसी दर्द और दुष्प्रभाव से ठीक हो सकता है | अगर आप भी पाइल्स की बीमारी से जूझ रहे है और होम्योपैथिक उपचार करवाना चाहते है तो इसके लिए आप डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी से संपर्क कर सकते है, इस संस्था की डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथी दवाओं में एक्सपर्ट है, जो इस पाइल्स जैसी समस्या को जड़ से ख़तम करने में आपकी मदद कर सकता है |  

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क्या होम्योपैथी उपचार से हो सकता है पीसीओडी की समस्या का इलाज ?

पीसीओडी एक ऐसी समस्या है जिसकी वजह से महिलाओं में हार्मोनल विकार के कारण अंडाशय काफी बड़ा हो जाता है और इसके बाहरी किनारों में सिस्ट बनने लग जाता है | यह एक किस्म की हार्मोनल असंतुलन स्थिति होती है जो महिला के गर्भ में अंडाशय को काफी प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप छोटे-छोटे सिस्ट उत्पन्न हो जाते है | आइये जानते इस समस्या के बारे विस्तारपूवर्क से :- 

ड़ॉ सोनल हीलिंग विथ होमियोपैथी के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक वीडियो में यह बताया की पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिजीज यानी पीसीओडी महिलाओं की प्रजनन आयो में सबसे आम एंडोक्रिनोपैथी है, जिसकी वजह से इन्सुलिन के प्रतिरोध और प्रतिपूरक हाईपरइंसुलिनमिया की समस्या उत्पन्न्न हो जाती है | जिससे महिलाओं के अंडाशय काफी प्रभावित हो जाते है और साथ ही इसके बाहर छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते है | 

पीसीओडी के लक्षण कौन से है? 

इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार है :-  

  • वजन का बढ़ना
  • अनियमित रूप से मासिक चक्र का होना
  • चेहरे पर बालो का उगना 
  • पुरुषों में गंजेपन की स्थिति होना 
  • मुँहासे का कभी ठीक न होना 
  • गर्दन के आसपास ख़राब हो जाना 
  • बांझपन की समस्या होना 
  • चेहरे के त्वचा के रंग का काला पड़ना या फिर किसी भी शरीर के अंग में काला धब्बा पड़ना 
  • कुछ महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन की वजह से सिरदर्द भी लगता है | 

पीसीओडी होने के मुख्य कारण क्या है? 

इसके मुख्य कारण है कुछ इस प्रकार है :-  

  • बांझपन हो जाना 
  • गर्भपात की समस्या या फिर समय से पहले शिशु का जनम होना 
  • नॉन-अल्कोहोलिक स्टिटोहेपेटीएस के कारण होने वाली गंभीर यकृत सूजन होना 
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम से उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा जैसे की कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना और हृदय से जुड़े समस्या को भी बढ़ावा देता है | 

डॉक्टर सोनल जैन ने यह भी बताया की पीसीओडी के उपचार के लिए होमेओपेथी एक ऐसा विकल्प है जिससे इस समस्या को जड़ से ख़तम किया जा सकता है | यह बात तो सभी को जानते है की होमियोपैथी उपचार से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है | भले ही होमियोपैथी दवाओं की प्रक्रिया बहुत धीरे है लेकिन यह समस्या को जड़ से ख़तम करने में सक्षम भी है |   

इस वीडियो में पीसीओडी से पीड़ित महिला नाम नाती गेलकर ने बताया की कोविड जैसी महामरी के दौरान वह पीसीओडी समस्या का शिकार हो गयी थी | जिसकी वजह से वह अनियमित मासिक धर्म चक्र की समस्या से गुजर रही थी और उनका वजन भी बढ़ाने लग गया था | इसके इलाज के लिए उन्होंने अलोपथी दवाओं का सहारा भी लिया था परन्तु कोई असर नहीं हुआ | जब उन्हें डॉक्टर सोनल जैन के बारे में पता लगा तो उन्होंने बिना सोचे यहाँ से परीक्षण करवाने का निर्णय ले लिया | जिनके द्वारा बातये गए होमियोपैथी दवाओं के सेवन से यह समस्या कुछ ही दिनों में कम हो गयी और आज इस समस्या से उन्हें मुक्ति भी मिल गयी है | ड़ॉ सोनल हीलिंग विथ होमियोपैथी के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होमेओथी दवाओं में स्पेशलिस्ट जिससे आपको इस समस्या से प्रकृतिक रूप से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है |

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एलर्जी से प्रबंधन के लिए होम्योपैथी का चुनाव क्यों करें, जानें एक्सपर्ट्स क्या है उनकी सलाह

रायनाइटिस और हे फीवर की तरह और भी ऐसी कई मौसमी एलर्जी होती है जिससे लाखों की संख्या में लोग जुझ रहे है | हलाकि एलोपैथिक दवा के सेवन और घरेलु उपचार से भी यह समस्या दूर नहीं होती | ऐसे समय पर आप होम्योपैथिक उपचार का सहारा ले सकते है | होम्योपैथिक उपचार एक ऐसा उपचार से जिससे कोई शरीर पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ता और समस्या भी दूर हो जाती है | 

 

डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी के डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट यूट्यूब शॉर्ट्स के माध्यम से यह बताया कि दुनिया भर में लाखों लोग कई तरह के एलर्जी की समस्या से जूझ रहे है, जिससे कम करने के लिए लोग एलोपैथी दवाओं का सहारा लेते है, जो इस एलर्जी को कम करने के बजाये इससे बढ़ावा देते है | लेकिन होम्योपैथिक की दवाएं इन एलर्जी के लिए सबसे अच्छी दवा होती है, क्योंकि यह दवाएं सस्ती होती है और हर बार अपना कार्य करने में सक्षम भी होते     है |

 

उदाहरण के लिए अगर बात करें हे फीवर जैसे एलर्जी की, तो यह एलर्जी अलग-अलग मौसम में भिन्न-भिन्न तरह के पदार्थों से शुरू हो जाता है | यह एलर्जी तब उजागर होती है आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली पराग जैसे हानिरहित पदार्थों को खतरनाक मानने लगती है और उससे रक्षा के लिए रसायन तत्व को छोड़ने लगती है | आइये जानते है इसके मुख्य लक्षण :- 

 

  • बार-बार छींक आना 
  • नाक का बहते रहना 
  • आंखे गीली रहना और खुजली होना
  • गले में खुजली होना 
  • कान में जमाव होना 
  • सिरदर्द होता 
  • लगातार खाँसना आदि 

 

ऐसे मौसमी एलर्जी के लिए कुछ होम्योपैथिक उपचार होते है, जो किसी योग्य होम्योपैथी से ही परामर्श किया जा सकता है | होम्योपैथी दवाओं  के अन्य लाभ यह है कि यह अत्यंत किफायती होने साथ साथ शरीर के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और वास्तविक भी होते है | यह बात तो सभी जानते है की होम्योपैथिक दवाओं का कोई दुष्प्रभाव नहीं होते | यह समस्या को तेज़ी से ठीक भी करता है और इससे रोकथाम के लिए संकेत भी करता है | 

 

यदि आप भी किसी एलर्जी से परेशान हो और इलाज करवाना चाहते हो तो आप डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी से परामर्श कर सकते है,इस संस्था के डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक दवाओं में एक्सपर्ट है, जो आपके इस समस्या को कम करने में आपकी मदद कर सकते है |  

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तनाव से बचाव के कौन-से उपचार और आहार है मददगार ?

तनाव आधुनिक जीवन का एक सामान्य पहलू है, जो हर उम्र के लोगों को प्रभावित करते है। यह कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। हालाँकि, ऐसे कई उपचार और आहार है जो तनाव को कम करने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में मदद कर सकते है। तो इस ब्लॉग में, हम कुछ प्रभावी तरीकों और घरेलु उपाय के बारे में पता लगाएंगे, जो आपको तनाव से दूर रख सकें ;

तनाव को कम करने के कौन-से उपाय है मददगार ?

नियमित व्यायाम :

व्यायाम एक तनाव निवारक तरीका है। यह एंडोर्फिन जारी करता है, जो शरीर के प्राकृतिक मूड को बेहतर बनाता है, और तनाव हार्मोन को कम करता है। दैनिक व्यायाम दिनचर्या को अपने जीवन में शामिल करना आवश्यक है। पैदल चलना, जॉगिंग या योग जैसी गतिविधियाँ बेहतरीन विकल्प है।

 

गहरी सांस लेना :

गहरी साँस लेने के व्यायाम करना आसान है और इसका अभ्यास कभी भी, कहीं भी किया जा सकता है। वे तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव कम करने में मदद करते है। अपनी नाक से गहरी सांस लें, कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस रोकें और अपने मुंह से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। और आराम के लिए इसे कई बार दोहराएं।

 

पर्याप्त नींद लें :

नियमित नींद का शेड्यूल बनाए रखना महत्वपूर्ण है। हर रात 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद का लक्ष्य रखें। नींद की कमी तनाव के स्तर को बढ़ा सकती है और दैनिक चुनौतियों से निपटने की आपकी क्षमता को ख़राब कर सकती है।

 

ध्यान :

तनाव कम करने के लिए ध्यान एक शक्तिशाली अभ्यास है। इसमें अपने दिमाग को केंद्रित करना और अव्यवस्थित विचारों की धारा को खत्म करना शामिल है। नियमित ध्यान सत्र भावनात्मक कल्याण में सुधार और चिंता को कम करने में मदद करते है।

 

शराब और कैफीन सीमित करें :

शराब और अत्यधिक कैफीन का सेवन तनाव को बढ़ा सकता है। इन पदार्थों का सेवन कम करें, खासकर तनावपूर्ण अवधि के दौरान।

 

सामाजिक संबंध :

मित्रों और परिवार के साथ मजबूत सामाजिक संबंध बनाए रखें। अपने विचारों और भावनाओं को साझा करने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है और चुनौतीपूर्ण समय के दौरान एक सहायता प्रणाली प्रदान की जा सकती है।

 

समय प्रबंधन का ध्यान रखें :

प्रभावी समय प्रबंधन तनाव को बढ़ने से रोक सकता है। व्यवस्थित और नियंत्रण में रहने के लिए कार्यों की सूचियाँ बनाएं, प्राथमिकताएँ निर्धारित करें और कार्यों को प्रबंधनीय भागों में बाँट लें।

 

जर्नलिंग :

अपने विचारों और भावनाओं को लिखना तनाव को प्रबंधित करने का एक चिकित्सीय तरीका हो सकता है। यह आपको तनाव ट्रिगर करने वालों की पहचान करने और उनके माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से काम करने की अनुमति देता है।

 

अरोमाथेरेपी :

अरोमाथेरेपी में विश्राम को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक तेलों का उपयोग शामिल है। लैवेंडर, कैमोमाइल और यूकेलिप्टस जैसी सुगंध आपके दिमाग को शांत करने और तनाव को कम करने में मदद कर सकती। तनाव से राहत पाने के लिए आपको मुंबई में होम्योपैथिक क्लिनिक से इस थेरेपी को जरूर करवाना चाहिए। 

 

प्रगतिशील मांसपेशी विश्राम :

इस तकनीक में विभिन्न मांसपेशी समूहों को तनाव देना और फिर आराम देना शामिल है। यह शारीरिक तनाव को दूर करने में मदद करता है, जो अक्सर तनाव से जुड़ा होता है।

 

स्क्रीन समय सीमित करें :

अत्यधिक स्क्रीन समय, विशेष रूप से सोने से पहले, नींद के पैटर्न में बाधा डाल सकता है और तनाव बढ़ा सकता है। इसलिए अपने स्क्रीन उपयोग पर सीमाएँ निर्धारित करें।

 

आभार अभ्यास :

अपने जीवन के सकारात्मक पहलुओं के लिए नियमित रूप से आभार व्यक्त करने से आपका ध्यान तनावों से हट सकता है और आपके समग्र दृष्टिकोण में सुधार हो सकता है।

 

तनाव को कम करने के लिए किस तरह के आहार का सेवन करें ! 

संतुलित आहार : 

एक संतुलित आहार तनाव प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभिन्न प्रकार के फल, सब्जियाँ, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज का सेवन करें। अत्यधिक कैफीन और चीनी से बचें, जो तनाव बढ़ा सकते है।

 

हर्बल चाय का सेवन करें :

कुछ हर्बल चाय, जैसे कैमोमाइल और वेलेरियन रूट, अपने शांत गुणों के लिए जाने जाते है। हर्बल चाय का गर्म कप पीना सुखदायक हो सकता है और तनाव को कम कर सकते है।

 

हाइड्रेटेड रहें :

निर्जलीकरण आपके मूड को प्रभावित कर सकता है और तनाव बढ़ा सकता है। ठीक से हाइड्रेटेड रहने के लिए दिन भर में खूब पानी पीना सुनिश्चित करें।

 

फाइबर को आहार में शामिल करें :

  • फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पाचन और मल त्याग को सुविधाजनक बनाने के लिए उत्कृष्ट होते है, साथ ही एससीएफए के उत्पादन को उत्तेजित करके तनाव प्रबंधन में भी सहायता करते है। अगर आपको सोने में परेशानी हो रही है तो सोने से पहले गर्म दूध पीने से मदद मिल सकती है। यह नींद के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले भारतीय घरेलू उपचारों में से एक है ।
  • लेकिन दूध लेने के बाद भी नींद की समस्या आपकी ठीक न हो तो इसके लिए आपको मुंबई में होम्योपैथिक डॉक्टर का चयन करना चाहिए। 

 

तनाव को ठीक करने के लिए बेहतरीन क्लिनिक !

अगर आप तनाव से निजात पाना चाहते है तो इसके लिए आपको डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक का चयन करना चाहिए क्युकी यहां पर तनाव का खात्मा बहुत ही बेहतरीन तरीके से किया जाता है और इसका उपचार होम्योपैथिक तरीके से किया जाएगा तो इस दवाई का भी आपको किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं देखने को मिलेगा।

 

निष्कर्ष :

अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण को बनाए रखने के लिए तनाव का प्रबंधन महत्वपूर्ण है। इन उपचारों और आहार प्रथाओं को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने से आपको तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिल सकती है। याद रखें कि हर किसी के तनाव ट्रिगर और उससे निपटने के तरीके अलग-अलग होते है, इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या काम करता है। तनाव कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाकर आप अधिक खुशहाल, स्वस्थ जीवन जी सकते है।

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पीसीओएस (PCOS) को ठीक करने के लिए घरेलू उपाय कैसे सहायक है ?

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में एक आम अंतःस्रावी विकार है, जो हार्मोनल असंतुलन की विशेषता है जो अनियमित मासिक धर्म, अत्यधिक बाल विकास और प्रजनन संबंधी समस्याओं जैसे विभिन्न लक्षणों को जन्म देता है। जबकि चिकित्सा हस्तक्षेप मौजूद है, कई व्यक्ति पीसीओएस लक्षणों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए घरेलू उपचार भी तलाशते है, तो चलिए जानते है की इसको ठीक करने के लिए घरेलू उपाय के साथ होम्योपैथिक उपचार कैसे सहायक है ;

पीसीओएस में घरेलू उपचारों की क्या भूमिका है ?

घरेलू उपचारों को अक्सर चिकित्सा उपचारों का पूरक माना जाता है और लक्षणों को कम करने और समग्र कल्याण में सुधार करने की उनकी क्षमता के लिए उपयोग किया जाता है।

आहार संशोधन : 

प्राथमिक रणनीतियों में से एक आहार संबंधी आदतों में बदलाव करना है। संपूर्ण खाद्य पदार्थों को शामिल करने, परिष्कृत शर्करा और कार्बोहाइड्रेट को कम करने और फाइबर का सेवन बढ़ाने से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, जो पीसीओएस वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।

नियमित व्यायाम : 

पीसीओएस के लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि में शामिल होना मौलिक है। व्यायाम वजन प्रबंधन में सहायता करता है, इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है और हार्मोनल उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद करता है।

हर्बल सप्लीमेंट : 

कुछ व्यक्तियों को दालचीनी, पुदीना चाय और मेथी जैसे हर्बल सप्लीमेंट के माध्यम से राहत मिलती है। इन्हें संभावित रूप से मासिक धर्म चक्र को विनियमित करने और इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने का सुझाव दिया गया है।

तनाव प्रबंधन : 

तनाव हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है। योग, ध्यान और गहरी साँस लेने के व्यायाम जैसे अभ्यास तनाव के स्तर को प्रबंधित करने में मदद कर सकते है, जो पीसीओएस वाले व्यक्तियों के समग्र कल्याण में योगदान करते है।

पर्याप्त नींद : 

उचित नींद की स्वच्छता महत्वपूर्ण है। पर्याप्त आराम हार्मोन विनियमन और समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करता है, पीसीओएस लक्षणों के प्रबंधन में सहायता करता है।

घरेलू उपचारों का असर :

घरेलू उपचार पीसीओएस के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करते है। हालांकि यह कोई निश्चित इलाज नहीं है, फिर भी ये अक्सर लक्षणों से राहत प्रदान करते है और समग्र स्वास्थ्य और कल्याण में सहायता करते है।

आहार परिवर्तन : 

संपूर्ण खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दुबले प्रोटीन और स्वस्थ वसा पर ध्यान केंद्रित करने वाला आहार इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते है। कम चीनी और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट वजन प्रबंधन और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करने में सहायता कर सकते है।

नियमित व्यायाम : 

एरोबिक गतिविधियों और शक्ति प्रशिक्षण जैसे व्यायाम न केवल वजन प्रबंधन में मदद करते है, बल्कि इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार करते है, जिससे पीसीओएस लक्षणों की गंभीरता कम हो जाती है।

हर्बल सप्लीमेंट्स : 

कुछ हर्बल सप्लीमेंट्स, हालांकि सार्वभौमिक रूप से समर्थित नहीं है, कुछ व्यक्तियों में आशाजनक दिखे है। उदाहरण के लिए, दालचीनी और मेथी इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में मदद कर सकते है, और पुदीना चाय संभावित रूप से अतिरिक्त बालों के विकास को कम कर सकती है।

तनाव प्रबंधन : 

तनाव हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाता है। ध्यान, योग या माइंडफुलनेस जैसी तकनीकें तनाव के स्तर को काफी कम कर सकती है और परिणामस्वरूप, पीसीओएस के लक्षणों को कम कर सकती है।

पर्याप्त नींद : 

गुणवत्तापूर्ण नींद हार्मोन विनियमन और समग्र स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते है, जो पीसीओएस लक्षणों के प्रबंधन में योगदान करती है।

यदि आप होम्योपैथिक तरीके से अपना उपचार करवा रहें है, तो इसके लिए आपको उपरोक्त्त उपायों को अपनाने से पहले एक बार मुंबई में होम्योपैथिक डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।

होम्योपैथिक तरीके से पीसीओएस का इलाज कैसे संभव है ?

  • मानव शरीर पूरी तरह से बीमारी से मुक्त होने के लिए प्रकृति से पूरी तरह सक्षम है। यह केवल तब होता है जब प्रतिरक्षा या अपने स्वयं के आंतरिक जीवनशक्ति निकल जाती है कि शरीर की रोग मुक्त रखने के लिए असमर्थ हो जाता है इसलिए होमियोपैथी उस जीवन शक्ति का संतुलन बहाल करने की कोशिश करता है जो एक बार जीवनशैली अपने मूल संतुलन को पुनः प्राप्त कर लेता है, यह बिना किसी बाहरी सहायता के स्वयं उपचार करके खुद स्वास्थ्य में सुधार ला सकते है।
  • होम्योपैथिक दवाएं हार्मोनल असंतुलन को सही करती है और इसके नकारात्मक प्रभावों की बेअसर करती है।
  • यूएसजी श्रोणि की दोहराकर, उपचार शुरू करने के 3 से 6 महीने के बाद, अगले चरण में अल्सर को धीरे-धीरे भंग किया जा सकता है।
  • माहवारी चक्र नियमित हो जाता है। चेहरे पर मुँहासे और बाल वृद्धि सहित अन्य शिकायतों को भी ध्यान में रखा जाता है।
  • भविष्य में महिलाओं की गर्भधारण करने के लिए प्रजनन क्षम होने की संभावना की खीलता भी उपस्थित है।    

पीसीओएस का इलाज होम्योपैथिक तरीके से करवाने के लिए आपको मुंबई में होम्योपैथिक क्लिनिक का चयन करना चाहिए।

सुझाव :

आयुर्वेद से लेकर होम्योपैथिक तक हर बीमारी और समस्या का इलाज काफी अच्छे से मिल जाता है। वहीं अगर आप होम्योपैथिक तरीके से पीसीओएस का इलाज करवाना चाहती है, तो इसके लिए आपको डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

घरेलू उपचार पीसीओएस लक्षणों के प्रबंधन में संभावित लाभ प्रदान करते है, यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि व्यक्तिगत प्रतिक्रियाएं भिन्न हो सकती है। इन उपचारों का उपयोग अक्सर चिकित्सा उपचार और जीवनशैली में संशोधन के साथ किया जाता है। पीसीओएस के प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत और व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ परामर्श आवश्यक है। इन घरेलू उपचारों को पेशेवर चिकित्सा मार्गदर्शन के साथ एकीकृत करके, व्यक्ति लक्षणों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने और अपने जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने की दिशा में सक्रिय कदम उठा सकते है। और इस कदम में होम्योपैथिक उपचार भी कारगर साबित होते है।