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क्या आपने भी सर्दीओं के कपड़ों को ट्रंक में रख दिया है? डॉक्टर से जानें, जाती हुई ठंड आपको कैसे कर सकती है बीमार?

सभी लोगों को पता है, कि अब मौसम में काफी ज्यादा बदलाव होने लगा है और यह मौसम लगभग सभी लोगों को काफी ज्यादा पसंद भी होता है। क्योंकि इस मौसम में ज्यादातर लोगों को न तो ठंड लगती है और न ही ज्यादा गर्मी का एहसास होता है। इस मौसम में सब कुछ संतुलित होता है। दरअसल, इस दौरान न तो लोगों को ज्यादा पसीना आने की समस्या होती है और न ही ज्यादा भारी और गर्म कपड़ों को 24 घंटे पहन कर रखने की जरूरत होती है। इस तरह की स्थिति में, अब लोगों को पुरे दिन ठंड का अहसास ही नहीं होता है। केवल सुबह और शाम को ही हलकी से थोड़ी ज्यादा ठंड का अहसास होता है। 

आम तौर पर, ऐसा मौसम आते ही सभी मायें ठंड के कपड़ों और रजाइयों को ट्रंक के अंदर रख देती हैं और गर्मियों के कपड़ों को बाहर निकाल देती हैं। इस तरह का मौसम आते ही बहुत से लोग गर्मियों के कपड़ों को पहनना शुरू कर देते हैं और जाती हुई ठंड से बिल्कुल भी वाकिफ नहीं होते हैं और ऐसे में हल्के कपड़ों को पहकर बाहर ही घूमने लग जाते हैं। पर, क्या आप जानते हैं, कि जाती हुई ठंड में सेहत के साथ किसी भी तरह की कोई भी लापरवाही को नहीं बर्तना चाहिए। जाती हुई ठंड आपकी सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है। यह आपकी तबियत को काफी ज्यादा बिगाड़ सकती है। इसलिए, इस दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए जाती हुई ठंड में आपको अपनी सेहत का पहले से ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान ज्यादा हल्के कपड़ों को बिल्कुल भी नहीं पहना चाहिए। 

अक्सर ही यह देखा जाता है, कि जाती हुई ठंड के दौरान सभी लोग थोड़े से लापरवाह हो जाते हैं और गर्म कपड़ों को न पहन अपनी सेहत का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते हैं। एक यही कारण होता है, कि ज्यादातर लोगों में जाती हुई ठंड के दौरान बीमारियों का कहर काफी ज्यादा बढ़ जाता है। हालांकि, जाती हुई ठंड के दौरान अगर आप पूरी तरीके से गर्म कपड़ों को नहीं पहनते हैं, ठंडे पानी से नहाते हैं और ज्यादातर ठंडी हवा में ही घूमते रहते हैं, तो ऐसे में आपकी सेहत का खराब होना लाजमी है। जाती हुई ठंड के दौरान अपनी सेहत का ध्यान न रखने पर आपको कई तरह कि बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी कई समस्याएं शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, और भी कई बीमारियां जैसे फ्लू, निमोनिया, सांस की दिक्कत और जोड़ों में दर्द होना आदि जैसी समस्याओं का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ सकता है। जाती हुई ठंड के दौरान अक्सर लापरवाही बरतने पर लोग काफी ज्यादा बीमार हो जाते हैं। इसलिए, इस तरह की स्थिति में होने वाली किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए सावधानी को बरतना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

जाती हुई ठंड में आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? 

वैसे तो, जाती हुई ठंड के दौरान आपको ऐसी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी वजह से आपकी सेहत को काफी ज्यादा दिक्क्त महसूस हो सकती है। इस दौरान, आपको सेहत से जुड़ी ऐसी कई बिमारियों से जूझना पड़ सकता है, जिस में से कुछ निम्नलिखत अनुसार हो सकती हैं, जैसे कि 

  1. खांसी-जुकाम, थकान और साइनस की समस्या होना 

डॉक्टर के अनुसार, इस तरह के मौसम में लोगों को दिन में इतनी ज्यादा ठंड नहीं लगती है, केवल सुबह और शाम को ही ज्यादा ठंड का अहसास होता है। मतलब कि ऐसे मौसम में कभी ठंड का अहसास होता है, तो कभी गर्मी का अहसास होता है। ऐसे मौसम में, ज्यादातर लोग ठंड को नहीं मानते और गर्म कपड़ों की जगह हल्के और हवादार कपड़ों को पहनना शुरू कर देते हैं। पर, ऐसा करना सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं होता है। इस तरह के मौसम में सेहत के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बल्कि, इस दौरान सेहत का ख्याल रखने पर आप इंफ्लुएंजा, आरएसवी जैसे वायरल इंफेक्शन से अपना बचाव कर सकते हैं। अगर इस दौरान आपको इस तरह की बिमारियों का सामना करना पड़ जाये, तो इसके कारण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी ज्यादा कमजोर हो सकती है। जिसकी वजह से आपको लगातार खांसी, जुकाम, थकान और साइनस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, ऐसे में, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अपना काफी ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। क्योंकि, इस दौरान शरीर में दिखाई देने वाले लक्षण आपको एक एलर्जी की तरह लग सकते हैं, जिन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि समस्या गंभीर भी हो सकती है। 

  1. सांस से जुड़ी समस्याओं का बढ़ना 

इस तरह के मौसम में अपनी सेहत का ख्याल न रखने पर आपको सांस से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है, जिसमें कुछ निम्नलिखत अनुसार भी हो सकते हैं:

  1. इस दौरान हृदय प्रणाली भी बुरी तरीके से प्रभावित हो सकती है। 
  2. ऐसे में, सुबह की ठंडी हवा खून की नाड़ियों को सिकोड़ सकती है। 

जाती हुई ठंड के कारण होने वाले नुकसान से अपना कैसे बचाव करें?

जाती हुई ठंड के दौरान होने वाली बीमारियों से बचने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं: 

  1. इस दौरान सुबह और शाम हल्के या फिर ठंड के हिसाब से गर्म कपड़ों को पहने।
  2. इस दौरान ज्यादा से ज्यादा अपने शरीर को हाइड्रेट रखें। 

निष्कर्ष: कुल मिलाकर जाती हुई ठंड के दौरान आपको अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और सर्दियों के दौरान होने वाली किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

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नींबू से बवासीर की कौन सी परेशानियों को ठीक किया जा सकता है? डॉक्टर से जानें, इसके सेवन के बारे में!

आज के समय में हर कोई किसी न किसी समस्या से पीड़ित है और कहीं न कहीं इससे उसके रोजाना के काम काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं। इन्हीं समस्याओं में से एक बवासीर की समस्या जो एक व्यक्ति की सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित करके रख देती है। दरअसल, जो व्यक्ति बवासीर जैसी समस्या से पीड़ित होता है उसके मल द्वार में काफी ज्यादा सूजन होने लगती है और गंभीर मामलों में रक्तस्राव भी हो सकता है। इसके अलावा, इससे पीड़ित व्यक्तियों को मल त्यागने में काफी दिक्कत महसूस हो सकती है, जिसके लिए बवासीर की परेशानियों को कम करना बेहद जरूरी होता है। बवासीर की समस्याओं को कम करने के लिए डॉक्टरी इलाज के साथ- साथ कुछ घरेलु इलाज भी काफी ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं, जिसमें नींबू का इस्तेमाल करना बहुत ही ज्यादा लाभदायक साबित होता है। नींबू बवासीर की समस्या को ठीक करने के साथ-साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। 

दरअसल, नींबू बवासीर की समस्याओं को कम करने में काफी ज्यादा हेल्दी साबित हो सकता है। इससे बवासीर की कई समस्याओं को ठीक किया जा सकता है, जिसमें बवासीर के दौरान होने वाली सूजन को कम करना, दर्द को कम करना, सेल्स को सुरक्षित रखना, मल त्याग करने में आसानी होना और एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्या से छुटकारा मिलना आदि शामिल हो सकता है। इस दौरान किसी भी तरह की गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

नींबू से बवासीर की परेशानियों का इलाज 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर आप बवासीर की समस्या से परेशान हैं, तो ऐसे में इससे जुड़ी परेशानियों को कम करने के लिए आप नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं। नींबू से बवासीर की निम्नलिखित परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है:

  1. सूजन को कम करने में मददगार 

जो व्यक्ति बवासीर जैसी समस्या से पीड़ित होता है, दरअसल उसको गुदे में सूजन जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है, जो काफी ज्यादा परेशानी खड़ी कर देती है। इस तरह की स्थिति में नींबू का इस्तेमाल करना काफी ज्यादा प्रभावशाली साबित हो सकता है। यह सभी जानते हैं, कि नींबू में विटामिन सी जैसे कई तरह के गुण मौजूद होते हैं, जो रक्त वाहिकाओं में होने वाली सूजन को कम करने में काफी ज्यादा मददगार साबित होता है। इसी तरह यह बवासीर के कारण होने वाली सूजन को भी कम करने में काफी ज्यादा मददगार साबित होता है। 

  1. सेल्स को सुरक्षित रखने में सहायक 

दरअसल, नींबू में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई तरह के गुण मौजूद होते हैं, जो बवासीर में सेल्स को सुरक्षित रखने और मांसपेशियों की स्फूर्ति को बढ़ावा देने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करते हैं। इसलिए, इस तरह की स्थिति में नींबू का सेवन करना काफी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है। 

  1. दर्द कम करने में मददगार 

ऐसा माना जाता है, कि नींबू में दर्द-रोधी गुण काफी मात्रा में मौजूद होते हैं, जो बवासीर जैसी समस्या में होने वाले दर्द को कम करने में काफी ज्यादा सहायक होते हैं। इसलिए, इस तरह की स्थिति में नींबू का सेवन करना पीड़ित व्यक्ति की सेहत के लिए काफी ज्यादा सेहतमंद माना जाता है। 

  1. मल त्याग करने में आसानी होना 

नींबू सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है, इसलिए बवासीर के दौरान नींबू का सेवन सेहतमंद साबित हो सकता है। नींबू में काफी मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो बवासीर के दौरान मल त्याग करने में होने वाली समस्या को कम करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। दरअसल, यह आपके मल को नरम कर जोर लगाने की समस्या को कम करता है। 

बवासीर की समस्या के दौरान नींबू का सेवन कैसे किया जा सकता है?

दरअसल, आप निम्नलिखित तरीकों से बवासीर की समस्या के दौरान नींबू का सेवन कर सकते हैं, जैसे कि 

  1. नींबू का रस लगाना 

ज्यादातर लोगों को बवासीर की समस्या के दौरान खुजली और दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिसे कम करने के लिए आप नीम्बू के रास का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप सबसे पहले एक नींबू लें और उसे अच्छे तरीके से एक कटोरी में निचोड़ लें। इसके बाद इस को एक रुई की सहायता से अपने प्रभावित हिस्से पर लगाएं और समस्या में फर्क महसूस करें। 

  1. नींबू को अपनी डाइट में शामिल करें 

दरअसल, ऐसे में बवासीर से जुड़ी तरह- तरह की समस्याओं को कम करने के लिए आप अपनी रोजाना की डाइट में नींबू का सेवन शामिल कर सकते हैं। इससे आपकी सेहत को कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं। 

  1. नींबू पानी का सेवन करें 

जो व्यक्ति बवासीर जैसी समस्या से पीड़ित होता है, उसके लिए नींबू पानी का सेवन करना वाकई फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे बवासीर की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। 

निष्कर्ष: कुल मिलाकर बवासीर की समस्या में नींबू का सेवन काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। इससे बवासीर की कई परेशानियों को जैसे सूजन कम करना, दर्द कम करना, सेल्स को सुरक्षित रखना, मल त्याग करने में आसानी होना और एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्या को ठीक करना शामिल होता है। इसलिए, बवासीर की समस्याओं को कम करने के लिए नींबू का सेवन किया जा सकता है। इसके साथ ही इससे आपकी सेहत को कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं। बवासीर की समस्या के दौरान आप इस लेख में बताये तरीके से या फिर डॉक्टर की सलाह पर नींबू का सेवन कर सकते हैं। इससे आपको काफी फायदा मिल सकता है। हालाँकि, इस दौरान परेशानी काफी ज्यादा बढ़ रही है, तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और बवासीर जैसी समस्या का होम्योपैथिक समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या होम्योपैथी में पीसीओएस का इलाज हो सकता है? डॉक्टर से जानें आखिर कितने समय तक लेनी पड़ती है दवा?

दरअसल, आप की जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पीसीओएस यानी कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं को होने वाली एक आम समस्या है, जो किसी भी महिला को प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, इस तरह की समस्या के दौरान महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन का काफी ज्यादा मात्रा में उत्पादन होने लग जाता है और इसके साथ ही, ओवरी में बहुत से छोटे-छोटे सिस्ट बनने लग जाते हैं। आम तौर पर, इस तरह की समस्या होने के कारण महिलाओं को कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें महिलाओं को अनियमित पीरियड्स आना, चेहरे पर अनचाहे बालों का उगना, वजन बढ़ जाना, मूड स्विंग्स होना, त्वचा पर मुंहासे होना और साथ में हेयर फॉल जैसी कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की समस्या के दौरान, चिंता करने वाली बात यही है, कि पीसीओएस जैसी गंभीर समस्या को पुरे तरीके से या फिर इस को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। आम तौर पर, इस को सिर्फ कुछ दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि, होम्योपैथी में इस तरह की समस्या के इलाज का दावा किया जाता है। हाँ, यह बात बिल्कुल सच है, कि होम्योपैथी में पीसीओएस का इलाज किया जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या होम्योपैथी से पीसीओएस का इलाज हो किया जा सकता है?

हालांकि, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि होम्योपैथिक दवाओं से पीसीओएस के लक्षणों को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि होम्योपैथिक दवाओं के सेवन से न केवल ग्रंथियों की काफी ज्यादा सक्रियता को संतुलित किया जा सकता है, बल्कि इस से हार्मोनल असंतुलन को भी ठीक करने में काफी ज्यादा सहायता प्राप्त हो सकती है। इसके अलावा, यह दवाएं ओवरी में सिस्ट का उपचार करने के साथ -साथ एक व्यक्ति के तनाव को भी कम करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती हैं। हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि होम्योपैथिक उपचार की सहायता से एक महिला के कंसीव करने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। आम तौर पर, पीसीओएस जैसी समस्या के इलाज के लिए न केवल होम्योपैथिक दवाओं का नियमित रूप से सेवन करना महत्वपूर्ण होता है, बल्कि इसके साथ -साथ नियमित व्यायाम करना और साथ में सेहतमंद आहार का सेवन करना भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

कितने समय तक लेनी पड़ती है दवा?

आम तौर पर, इस विषय पर डॉक्टर का कहना है, कि पीसीओएस जैसी समस्या के लक्षणों को होम्योपैथिक दवाओं के सेवन से कम किया जा सकता है। दरअसल, जानकारी के मुताबिक इस तरह की समस्या से पीड़ित लोगों को शुरुआत में कम से कम 6 से 12 महीने तक दवा का सेवन करने की सलाह प्रदान की जाती है। हालाँकि, इस तरह की स्थिति के बाद मरीज की हालत के हिसाब से ही इलाज के समय को बढ़ाया जाता है, या फिर कम किया जाता है।असल में, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए कम से कम 1 से 2 साल तक होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है। 

निष्कर्ष: पीसीओएस यानी कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह महिअलों को होने वाली एक आम समस्या है, जो काफी महिअलों पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। ध्यान न देने पर यह समस्या आम से काफी ज्यादा गंभीर भी हो सकती है। इस लिए वक्त पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस समस्या के कारण महिलाओं को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें पीरियड्स की अनियमित्ता होना, चेहरे पर अनचाहे बालों का उगना, वजन बढ़ जाना, मूड स्विंग्स होना, त्वचा पर मुंहासे होना और साथ में हेयर फॉल होना शामिल हो सकता है। हालांकि, पीसीओएस जैसी समस्या को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, सिर्फ इसके लक्षणों को कंट्रोल में किया जा सकता है। पर, होम्योपैथी में इस तरह की समस्या का सफलतापूर्वक इलाज करने का दावा किया जाता है। हाँ, होम्योपैथिक दवाओं से पीसीओएस के लक्षणों को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इस समस्या से पीड़ित लोगों को शुरुआत में, कम से कम 6 से 12 महीने तक दवा का सेवन करने की सलाह दी जाती है। 1 से 2 साल तक होम्योपैथिक दवाओं का सेवन कर के पीसीओएस को खत्म किया जा सकता है। गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस के बारे में, ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और पीसीओएस जैसी गंभीर समस्या का होम्योपैथिक समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इस के विशेषज्ञों से इस के इलाज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या होम्योपैथी में डेंगू का इलाज किया जा सकता है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

आज के समय में ऐसी कई समस्याएं होती हैं, जिन से लोग काफी जल्दी प्रभावित हो जाते हैं, इस में लोगों को डेंगू होना जैसी समस्या भी शामिल हो सकती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो किसी को भी और किसी भी उम्र में प्रभावित कर सकता है। आम तौर पर, यह चार अलग- अलग प्रजातियों के फ्लेवीवायरस की वजह से हो सकता है। दरअसल, हम में से ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता ही होगा, कि यह वायरस विशेष तौर पर एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस के मच्छरों के काटने की वजह से ही शरीर में फैलता है और एक व्यक्ति की सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर देता है। आपको बता दें, कि इस समस्या के लक्षण एक व्यक्ति के शरीर में लगभग 4 से 7 दिनों के अंदर- अंदर नज़र आने लग जाते हैं। 

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एक व्यक्ति की गंभीरता और संक्रामक के आधार पर डेंगू जैसी समस्या के लक्षण अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं, जो आम से गंभीर तक हो सकते हैं। डेंगू जैसी समस्या के ज्यादातर मामले काफी हलके होते हैं, जिस पर वक्त रहते ध्यान न देने पर यह काफी ज्यादा गंभीर भी हो सकते हैं। हालांकि, लोगों में इस तरह की स्थिति को आम देखा जा सकता है, जिसमें लोगों को मांसपेशियों में दर्द होना, हड्डियों और जोड़ों में दर्द होना और पूरे शरीर पर चकत्ते होना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। इसके अलावा, पीड़ित व्यक्ति को शरीर में तेज बुखार होना, गंभीर सिर दर्द होना, आंखों के सॉकेट में दर्द होना, मतली और उल्टी होना, नाक या फिर मसूड़ों में से खून बहना और इसके साथ- साथ प्लेटलेट्स काउंट में कमी होना जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सक्या है। इस तरह की स्थिति में डेंगू जैसी समस्या का इलाज कई तरीकों से किया जा सकता है। यहां तक कि होम्योपैथी में भी डेंगू डेंगू जैसी समस्या का इलाज किया जा सकता है, पर इस समस्या के लिए उपचार का इस्तेमाल लक्षणों के हिसाब से और सहायक थेरेपी के तौर पर किया जाता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

आइये जानते हैं इस पर होम्योपैथी डॉक्टर का क्या कहना है?

आम तौर पर, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि अगर आप डेंगू जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो इस समस्या का इलाज आप होम्योपैथी के माध्यम से करवा सकते हैं। होम्योपैथी में डेंगू का इलाज किया जा सकता है, यह बात बिल्कुल सच है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि होम्योपैथी में डेंगू जैसी समस्या का इलाज करने के लिए ब्रायोनिया अल्बा, आर्सेनिक एल्बम, लाइकोपोडियम और बेलाडोना जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। आम तौर पर, किसी भी हालत में इन दवाओं का उपयोग करने से पहले आप एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह करें। डॉक्टर की सलाह पर ही इन दवाओं का सेवन करना बिल्कुल ठीक रहता है। 

डेंगू में होम्योपैथी का इलाज कितना है कारगर होता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि डेंगू जैसी समस्या की बहुत सी ऐसी स्थितियों का इलाज होम्योपैथिक दवाओं के इस्तेमाल से संभव किया जा सकता है। आम तौर पर, ऐसी बहुत सी रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिस में डेंगू जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या को होम्योपैथिक इलाज के जरिए काफी ज्यादा कम किया गया है। यह डेंगू जैसी समस्या में काफी ज्यादा प्रभावी माना गया है। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि ब्राजील में डेंगू जैसी समस्या के प्रकोप को रोकने या फिर उनको खत्म करने के लिए साल 2001 में यूपेटोरियम परफोलिएटम की एक डोज़ से ही डेंगू के मामलों में लगभग 81.5 प्रतिशत कमी देखी गई थी। 

इसके अलावा, साल 2007 में आये एक और प्रकोप में, केवल 3 महीनों के अंदर ही होम्योपैथी के फास्फोरस और क्रोटेलस हॉरिडस जैसे इलाज के माध्यम से लगभग डेंगू के मामलों में 93 प्रतिशत कमी देखी गई थी। इस तरह की स्थिति को देखते हुए आप कह सकते हैं, कि हाँ होम्योपैथिक इलाज के मफयाम से डेंगू जैसी समस्या का इलाज किया जा सकता है। हालांकि, गंभीर स्थिति होने पर इस दौरान किसी भी तरह की दवा का इस्तेमाल करने से पहले आपको एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। 

निष्कर्ष: मानसून के दौरान, भारत में ज्यादातर लोगों को डेंगू होना एक आम बात होई है, पर यह एक गंभीर एक वायरल संक्रमण है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इस समस्या का पता चलते ही तुरंत इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। इस समस्या के लिए इन्फेक्टेड मच्छर का काटना, रुका हुआ पानी और बारिश का मौसम जिम्मेदार हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए इन चीजों से अपने आप को बचाकर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। डेंगू जैसी समस्या से पीड़ित लोगों का इलाज होम्योपैथिक दवाओं के माध्यम से किया जा सकता है, जिस में ब्रायोनिया अल्बा, आर्सेनिक एल्बम, लाइकोपोडियम और बेलाडोना जैसी दवाएं शामिल हो सकती हैं। पर, किसी भी स्थिति में इन दवाओं का सेवन करने से पहले आपको एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। इस के बारे में, ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और साथ में डेंगू जैसी और किसी भी समस्या का होम्योपैथिक समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इस के विशेषज्ञों से इस के इलाज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या वाकई बालों की कई समस्याओं को दूर करने में मददगार हो सकता है आर्निका का तेल? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आर्निका एक जड़ी बूटी की तरह होती है, जो आम तौर पर बहुत से औषधीय गुणों से भरपूर होती है। आम तौर पर, इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल ज्यादातर सदियों के मौसम में आयुर्वेद और होम्योपैथी में किया जाता है। दरअसल, इस जड़ी बूटी में एंटीबैक्टीरियल, एंटी एनाल्जेसिक, एंटीसेप्टिक और एंटी इंफ्लेमेटरी जैसे कई तरह के गुण मौजूद होते हैं, जो बालों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं को दूर करने में काफी ज्यादा मददगार साबित हो सकते है। हालांकि, यह इन्हीं गुणों के कारण जानी जाती है। आमतोर पर, अगर आप चाहें तो इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल बालों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं। दरअसल, आपको बता दें, कि आर्निका का तेल बालों के लिए काफी ज्यादा लाभदायक साबित होता है। आम तौर पर, इस के बालों पर एक इस्तेमाल से ही स्कैल्प के सारे डेड स्किन सेल्स आसानी से निकल जाते हैं और बालों को काफी ज्यादा लाभ प्राप्त होता है। इसके अलावा, आर्निका का तेल हेयर फॉलिकल्स को काफी ज्यादा मुलायम और मजबूत बनाने में भी काफी ज्यादा सहायता प्रदान करते हैं। आम तौर पर, अगर इस तेल का इस्तेमाल बिल्कुल सही तरीके से किया जाये, तो इससे बालों की बहुत सी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हाँ, यह सच है, कि आर्निका का तेल बालों का झड़ना, स्कैल्प को ठीक रखना, बालों की चमक वापस लाना, दो मुंहे बालों को सही करना और डैंड्रफ की समस्या को सही करना जैसी समस्याओं में काफी ज्यादा मददगार साबित होता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आर्निका के तेल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी जैसे कई गुण मौजूद होने के कारण यह बालों की ग्रोथ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

बालों की समस्याओं को ठीक करने के लिए आर्निका ऑयल

आम तौर पर, इस में किसी भी तरह का कोई शक नहीं है, कि अगर आर्निका ऑयल का इस्तेमाल सही तरीके से किया जाये, तो यह बालों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं को ठीक करने में काफी ज्यादा मददगार साबित हो सकता है। आर्निका ऑयल निम्नलिखित बालों की समस्याओं को दूर कर सकता है: 

  1. बालों का झड़ना ठीक करना 

आम तौर पर, अगर अर्निका ऑयल का इस्तेमाल बालों पर किया जाये, तो यह न केवल हेयर फॉलिकल्स को स्टिमुलेट करता है, बल्कि एक व्यक्ति के बालों को जड़ से मजबूत करने में काफी ज्यादा सहयता प्रदान करता है। इसके अलावा, यह तेल बालों के स्ट्रैंड को भी मजबूत करने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करते हैं। दरअसल, इसके इस्तेमाल से एक व्यक्ति के बाल झड़ना काफी हद तक कम हो जाते हैं। इसके साथ ही इससे हेयर इलास्टिसिटी में भी काफी ज्यादा सुधार देखा जा सकता है। अगर आर्निका ऑयल का इस्तेमाल अपने बालों पर कंसेंट्रेटेड फॉर्म में किया जाये, तो इससे एलोपेसिया को भी ठीक करने में काफी ज्यादा सहायता प्राप्त होती है। कुल मिलाकर यह बालों की सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। 

  1. स्कैल्प के लिए लाभदायक होता है 

दरअसल, यह तो आपको पता चल ही गया होगा, कि अर्निका ऑयल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेटरी जैसे कई तरह के गुण मौजूद होते हैं, जो स्कैल्प की सूजन को कम करने में काफी ज्यादा सहायता करते हैं और इसकी वजह से होने वाले दर्द से भी काफी ज्यादा राहत प्रदान करते हैं। दरअसल, आपको बता दें, कि यह तेल आपकी स्कैल्प को हर गंदगी से बचाने में आपकी काफी ज्यादा सहायता करता है, जिसमें सीबम, गंदगी, एक्स्ट्रा ऑयल और प्रदूषण की वजह से होने वाली गंदगी शामिल होती है। दरअसल, यह तेल न केवल स्कैल्प में बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है, बल्कि स्कैल्प में मौजूद एक्स्ट्रा ऑयल को भी साफ़ करने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करता है। इससे स्कैल्प की सेहत में काफी ज्यादा सुधार देखने को मिल सकता है। 

  1. बालों में चमक लाता है 

आम तौर पर, बालों में आर्निका ऑयल लगाने से बालों को काफी ज्यादा पोषण प्राप्त होता है और साथ में इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करने से बालों में काफी ज्यादा

चमक आ जाती है, जो एक व्यक्ति की पर्सनालिटी को निखारने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करते हैं। इससे आपके बाल सॉफ्ट और स्मूथ बन जाते हैं। 

आर्निका ऑयल का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

दरअसल, बालों की समस्याओं को दूर करने के लिए आर्निका ऑयल का इस्तेमाल करने के लिए आप सबसे पहले केवल जरूरत के हिसाब से ही इस तेल की थोड़ी सी मात्रा लें और उसको एक कटोरी में डाल लें। थोड़ी मात्रा में तेल लेने के बाद अब इसमें थोड़ा सा नारियल का तेल या फिर बादाम का तेल मिलाएं। इस को अच्छे से मिक्स करके अपने बालों पर लगाएं और अच्छे से मसाज करें। कम से कम 10 से 15 मिनट तक इस की ऐसे ही मसाज करते रहें। इसके बाद अगले दिन अपना सिर अच्छे से धो लें। 

निष्कर्ष: आर्निका एक जड़ी बूटी है, जो कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर होती है। आर्निका ऑयल बालों की कई समस्याओं को दूर करने में काफी ज्यादा मददगार साबित होता है। वैसे तो, आर्निका ऑयल बालों के लिए काफी ज्यादा लाभदायक होता है, पर इसके इस्तेमाल से एलर्जी आदि भी हो सकती है। इसलिए, इसका इस्तेमाल अक्सर दूसरे तेलों के साथ मिलकर ही करना चाहिए, जैसे की आपको इस लेख में बताया गया है, इसकी जगह आप डॉक्टर की सलाह पर कोई और तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही किसी भी तरह का कोई भी नया एक्सपेरिमेंट करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और बालों से जुड़ी किसी भी समस्या का होम्योपैथी समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक के विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं।

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होम्योपैथी में किडनी की पथरी का इलाज किस तरीके से किया जाता है? जानें डोक्टर से जानें!

आज के समय में ज्यादातर लोगों को गलत खानपान और जीवनशैली से जुड़ी गलत आदतों को अपनाने की वजह से किडनी में पथरी जैसी तरह -तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वैसे तो, किडनी में पथरी की समस्या होना एक आम बात होती है, पर वक़्त रहते इस समस्या का इलाज न होने पर यह कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकती है। इसलिए, वक्त रहते इस समस्या का इलाज होना अत्यंत जरूरी होता है। 

दरअसल, पथरी पेशाब में एक न घुलने वाला पदार्थ होता है, जिसमें फॉस्फेट, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड जैसे कई तरह के पदार्थ शामिल होते हैं। आम तौर पर, किडनी में इन तीनों पदार्थों के एक साथ जमा होने पर पथरी का निर्माण होता है। इस तरह की स्थिति में, किडनी की पथरी का इलाज एलोपैथी के साथ साथ होम्योपैथी और आयुर्वेद में भी किया जा सकता है। ऐसे में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि होम्योपैथी में किडनी की पथरी का इलाज किस तरीके से किया जाता है? तो दरअसल, होम्योपैथी में पथरी का इलाज होम्योपैथिक ट्रीटमेंट के माध्यम से सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इसमें होम्योपैथिक दवाओं की मदद से किडनी की पथरी को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। आम तौर पर, इन दवाओं का इस समस्या पर दोहरा असर होता है, जिसमें न केवल शरीर से पथरी को पेशाब के रस्ते से बाहर निकालना होता है, बल्कि इन दवाओं के माध्यम से पथरी का आकार भी काफी छोटा हो जाता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किडनी की पथरी के गंभीर लक्षण

वैसे तो, किडनी की पथरी के कई आम लक्षण हो सकते हैं, पर इसके गंभीर लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पीठ के निचले हिस्से में काफी तेज दर्द होना। 
  2. पेट या फिर बगल में असहनीय दर्द महसूस होना। 
  3. पेशाब का रंग बदलकर लाल, भूरा और गुलाबी हो जाना। 
  4. बार बार पेशाब करने की इच्छा होना। 
  5. पेशाब में लगातार खून आना। 
  6. पेशाब करते वक्त काफी ज्यादा दर्द और जलन महसूस होना। 
  7. मतली इस फिर उल्टी आना। 
  8. पेशाब करने में असमर्थ महसूस करना। 
  9. धुंधला और बदबूदार पेशाब का आना। 
  10. ठंड लगना और बुखार होना। 

किडनी की पथरी के गंभीर कारण 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि बहुत से कारणों की वजह से ही हमको सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का शिकार होना पड़ता है, जिसमें किडनी की पथरी भी शामिल होती है। किडनी की पथरी के गंभीर कारणों में निम्नलिखित कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. रोजाना कम मात्रा में पानी का सेवन करना। 
  2. काफी ज्यादा मोटापा होना। 
  3. कुछ का सेवन करना। 
  4. इस समस्या का पारिवारिक इतिहास होना। 
  5. पाचन से जुड़ी कुछ दिक्कतों का होना। 
  6. गाउट, हाइपर- पैराथायराइडिज्म और यूटीआई जैसी समस्याओं का होना। 7. खराब खान पान जैसे कि ज्यादा नमक, चीनी, पशु प्रोटीन और ऑक्सलेट से भरपूर भोजन का सेवन करना। 

डॉक्टरों द्वारा किडनी में पथरी की स्थिति की पूछताछ कैसे की जाती है?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि किडनी में पथरी की समस्या को जाँच ने के लिए सबसे पहले होम्योपैथिक डॉक्टर पीड़ित व्यक्ति के लक्षणों के बारे में जानते हैं और फिर किसी समस्या के बारे में पूछने की कोशिश करते हैं। इसके बाद डॉक्टर पारिवारिक इतिहास मतलब कि परिवार में पहले से ही किसी को समस्या तो नहीं इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। दरअसल, सब कुछ जानने के बाद मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टरों द्वारा दवाओं को दिया जाता है। इसके साथ ही, होम्योपैथी में जेनेटिक कारणों का भी इलाज सफलतापूर्वक किया जाता है, ताकि भविष्य में पीड़ित व्यक्ति को पथरी होने की संभावना दोबारा न हो सके। 

निष्कर्ष: दरअसल, ज्यादातर गलत खानपान और लाइफस्टाइल से जुड़ी गलत आदतों की वजह से लोगों को किडनी में पथरी जैसी तरह -तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किडनी की पथरी की समस्या में कई गंभीर कारण और लक्षण शामिल हो सकते हैं, जिसका इलाज होम्योपैथिक दवाओं की मदद से सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इस दौरान, होम्योपैथिक डॉक्टरों द्वारा पीड़ित व्यक्ति की स्थिति के बारे में सब कुछ जानने के बाद ही दवाओं को दिया जाता है। होम्योपैथी में इस समस्या के जेनेटिक कारणों का भी इलाज किया जाता है, ताकि पीड़ित व्यक्ति को आगे चलकर इस तरह की समस्या का दुबारा सामना न करना पड़े। समस्या की गंभीर स्थिति होने पर आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किसी भी प्रकार की किडनी का होम्योपैथिक इलाज प्राप्त करने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या होम्योपैथिक दवाओं से थायराइड का इलाज किया जा सकता है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

लगभग सभी लोग इस बात को जानते ही हैं, कि आज के समय में लोगों को थायराइड जैसी समस्या होना एक आम बात हो गयी है। असल में, कि आज पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस समस्या का खतरा ज्यादा बना रहता है। आम तौर पर, हाइपो थायराइड और हाइपर थायराइड यह दो तरीके से थायराइड होते हैं, जिस में इससे पीड़ित मरीजों को दवा दी जाती है। इस तरह की स्थिति में जब थायराइड जैसी समस्या की दवा एक बार शुरू हो जाती है, तो इन का सेवन पीड़ित मरीजों को काफी दिनों तक करना पड़ सकता है। दरअसल, थायराइड जैसी समस्या का इलाज बहुत सी स्थितियों में संभव हो सकता है। वहीं, इससे पीड़ित कुछ लोग जानना चाहते हैं, कि क्या होम्योपैथिक दवाओं से थायराइड का इलाज किया जा सकता है? दरअसल, इस मामले में डॉक्टर का कहना है, कि हाँ होम्योपैथी में थायराइड का इलाज पूरी तरीके से किया जा सकता है। पर, इस तरह की स्थिति के दौरान आपको इस बात पर विशेष ध्यान देने कि जरूरत पड़ सकती है, कि इस दौरान समस्या ज्यादा पुरानी न हो। दरअसल, अगर आपको यह समस्या 5 से 6 साल से कम समय से है, तो इसका इसका इलाज किया जा सकता है, पर वहीं अगर थायराइड की समस्या 10 साल से ज्यादा पुरानी है, तो इसका इलाज करना काफी मुश्किल हो सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

होम्योपैथिक में किस तरीके से थायराइड का इलाज किया जाता है? 

दरअसल, इस मामले में डॉक्टर का कहना है, कि किस भी तरह की बीमारी का इलाज होम्योपैथी में दो तरीकों से किया जाता है। इसके पहले तरीके में मरीज की मानसिक और शारीरिक स्थिति के लक्षणों को पहचान कर उसमें सुधार किया जाता है और इसके बाद मानसिक और शारीरिक स्थिति में होने वाले बदलाव के कारणों और लक्षणों का इलाज करने के लिए कुछ दवाओं को दिया जाता है। दरअसल, इस इलाज को आम भाषा में क्लासिक ट्रीटमेंट कहा जाता है।

आम तौर पर, इसके इलाज के दूसरे तरीके में किसी भी तरह की बीमारी का खास इलाज किया जाता है, जिसमें किसी भी तरह की बीमारी से पीड़ित मरीजों को कई तरह की दवाओं को दिया जाता है। इस दौरान, जो दवा मरीज को सूट कर जाती है, दरअसल उस को मरीज को काफी लंबे वक्त तक दिया जाता है। हालांकि, इस तरह का इलाज इतना असरदार नहीं होता है, क्योंकि शुरुआत में मरीजों की स्थिति में सुधार किया जा सकता है। 

थायराइड से पीड़ित मरीजों का इलाज जड़ से कब किया जा सकता है?

दरअसल, अगर आप थायराइड जैसी समस्या से काफी लंबे वक्त से परेशान नहीं है, तो इस तरह की स्थिति में थायराइड जैसी समस्या का इलाज जड़ से किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर आप का टीएसएच स्तर 200 या फिर इससे भी काफी ज्यादा कम है, तो इस तरह की स्थिति के दौरान, थायराइड जैसी समस्या का इलाज करना काफी हद तक संभव हो सकता है। 

निष्कर्ष: हाँ, होम्योपैथिक दवाओं से थायराइड का इलाज किया जा सकता है, पर ध्यान रहे समस्या अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। 10 साल से ज्यादा पुरानी समस्या का इलाज करना मुश्किल हो जाता है। थायराइड की गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और थायराइड जैसी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

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क्या सर्दियों में होम्योपैथी उपचार से बालों का झड़ना और डैंड्रफ को खत्म किया जा सकता है? डॉक्टर से जानिए बाल झड़ने की होम्योपैथिक दवा

दरअसल, सर्दियों के दौरान बालों की देखभाल करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, क्योंकि सर्दियों का मौसम आते ही कम नमी वाली ठंडी हवाएं आपकी त्वचा पर परत बनाने लग जाती हैं। इस लिए, इस दौरान बालों का झड़ना, डैंड्रफ होना और बालों में रूखापन होना काफी आम हो जाता है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में सर्द हवाओं की वजह से बालों में काफी ज्यादा रूखापन आ जाता है। इस दौरान, वह ज्यादातर उलझे हुए, रूखे और नमी से रहित नजर आ सकते हैं। इसके अलावा, इस तरह के मौसम में न केवल एक व्यक्ति के सिर की त्वचा में खुजली की समस्या हो सकती है, बल्कि सिर में पपड़ी भी बनने लगती हैं। दरअसल, इसकी वजह से बालों के किनारों पर नमी को बनाए रखने वाली सुरक्षा परत को काफी ज्यादा नुकसान पहुँचता है और साथ में बालों का टेक्सचर भी काफी ज्यादा बिगड़ जाता है। 

आम तौर पर, सर्द हवाओं में नमी की कमी होने की वजह से ज्यादातर लोगों को बालों में डैंड्रफ की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जिस पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। अगर वक्त रहते इस तरह की समस्या पर ध्यान न दिया जाये, तो यह बालों के झड़ने का एक बहुत बड़ा कारण बन सकती है और इससे सिर की त्‍वचा की स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। यह समस्या पुरुष और महिला दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। 

आम तौर पर, जिन लोगों को हर दिन लगभग 50 से 100 बाल झड़ने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है, दरअसल उनको इस तरह के मौसम में, काफी ज्यादा बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के मौसम में, ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इस दौरान स्कैल्प ड्राई, डिहाइड्रेटेड और डैंड्रफ से काफी ज्यादा भर जाती है और ठंड भरे मौसम में त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी को खो देती है, जिसकी वजह से लोगों को ज्यादातर सेबोरिक डर्मेटाइटिस और सोरायसिस जैसी कई तरह की बिमारियों का सामना करना पड़ता है। 

असल में, इस तरह की समस्या को हल करने के लिए लोग कई तरह के महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं और बाल झड़ने की समस्या को और ज्यादा बढ़ावा दे देते हैं। बाल झड़ने की समस्या के लिए होम्योपैथी उपचार काफी ज्यादा लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। यह सच है, कि सर्दियों में होम्योपैथी उपचारों से बालों का झड़ना और डैंड्रफ को खत्म किया जा सकता है और इस तरह की समस्या में, कैल्‍केरियासल्‍फ्युरिका 6 एक्‍स और काली सल्‍फ्युरिकम जैसी होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

सर्दियों में झड़ते बालों को रोकने के उपाय

  1. सर्दियों में झड़ते बालों की समस्या को रोकने के लिए रातभर बालों में जैतून का तेल लगाकर रख सकते हैं। इससे पपडियां और चकत्‍ते ढीले हो जाते हैं और खुजली की समस्या खत्म हो जाती है। 
  2. बाल झड़ने से रोकने के लिए शैम्‍पू के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल जरूर करें, इससे बालों में नमी बनी रहेगी। 
  3. सर्दियों में रोज शैम्पू और कंडीशनिंग करने की सलाह नहीं दी जाती है। 
  4. एक दिन छोड़कर बाल धोना महत्वपूर्ण होता है, इससे सिर की त्‍वचा के प्राकृतिक तेल बने रहते हैं। 

सर्दियों में बालों की समस्याओं के लिये होम्योपैथिक उपचार 

दरअसल, होम्योपैथिक दवाओं को पौधों से बनी चीजों से बनाया जाता है, इसलिए यह दवाएं सुरक्षित और असरदार होती हैं। इसके साथ ही, इन दवाओं का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है। बालों की देखभाल के लिए और झड़ते बालों को रोकने के लिए निम्नलिखत दवाओं को दिया जा सकता है, जैसे कि 

  1. कैल्‍केरियासल्‍फ्युरिका 6 एक्‍स: डॉक्टर यह होम्योपैथिक दवा सूखे और सफेद डैंड्रफ से भरे बालों के लिए बताते हैं। इसके लिए हर दिन दो गोलियां ली जा सकती हैं। 
  2. काली सल्फ्यूरिकम: चिपचिपे और पीले डैंड्रफ जैसी बालों से जुड़ी समस्याओं के लिए इस दवा का सेवन किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह पर हर दिन दो गोलियां ली जा सकती हैं।

निष्कर्ष: सर्दियों में, होम्योपैथी उपचार बालों का झड़ना और डैंड्रफ जैसी समस्या को खत्म करने में काफी ज्यादा सहयता प्रदान कर सकते हैं। बालों की देखभाल के लिए और झड़ते बालों को रोकने के लिए कैल्‍केरियासल्‍फ्युरिका 6 एक्‍स और काली सल्‍फ्युरिकम जैसी होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। डैंड्रफ और रूखेपन की गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और बालों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का होम्योपैथिक समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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होम्योपैथी में किन-किन बीमारियों का इलाज होना संभव होता है? जानें डॉक्टर से

आज ज्यादातर लोग किसी न किसी समस्या से परेशान हैं। आम तौर पर जब भी हम किसी समस्या की चपेट में आते हैं, तो इस समस्या का समाधान पाने के लिए हम किसी नजदीकी या फिर घर के पास वाले एलोपैथिक डॉक्टर के पास ही जाते हैं। इस तरह की स्थिति में, बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो प्राकृतिक तरीके से ठीक होने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना काफी ज्यादा पसंद करते हैं। आम तौर पर, इन दोनों चिकित्सा पद्धतियों में हर तरह की बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज होना संभव होता है। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि होम्योपैथी में भी कई तरह की समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। पर, आज के समय में ज्यादातर लोगों को होम्योपैथी के इलाज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। दरअसल, होमियोपैथी एक वैकल्पिक डॉक्टरी प्रणाली है, जो आम तौर पर पारंपरिक दवाओं से काफी ज्यादा अलग होती है। आम तौर पर, इसमें पौधों और खनिजों से दवाओं का निर्माण किया जाता है। होम्योपैथी इलाज को प्राकृतिक, सुरक्षित और समस्या में काफी ज्यादा असरदार माना जाता है। पर, ज्यादातर लोगों को इसके बारे जानकारी न होने की वजह से वह यह भी नहीं जानते हैं, कि होम्योपैथी में किन-किन बीमारियों का इलाज किया जा सकता है? दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि होम्योपैथी में कई तरह बीमारियों का इलाज किया जा सकता है, जिस में त्वचा से जुड़ी समस्याओं का इलाज, पाचन से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का इलाज, महिलाओं से जुड़ी किसी भी गंभीर और आम समस्याओं का इलाज, जोड़ों, हड्डियां और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं का इलाज और सांस की समस्याओं का सफलतापूर्वक इलाज होना शामिल होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इसके डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

होम्योपैथी में किन-किन बीमारियों का इलाज होना संभव है?

दरअसल, होम्योपैथी में निम्नलिखित समस्याओं का इलाज किया जा सकता है:

  1. त्वचा से जुड़ी समस्याओं का इलाज

दरअसल, होम्योपैथी में मस्से, विटिलिगो (सफेद दाग), पित्ती, फंगल इंफेक्शन, मुंहासों और एक्जिमा जैसी त्वचा से जुड़ी बीमारियों का इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है। आम तौर पर, होम्योपैथी में त्वचा से जुड़ी सभी समस्याओं का इलाज प्राकृतिक तरीके से किया जाता है। 

  1. पाचन से जुड़ी समस्याओं का इलाज

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आयुर्वेद के अलावा, होम्योपैथी में भी पाचन से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। दरअसल, होम्योपैथी में पाचन से जुड़ी आम समस्याओं से लेकर गंभीर समस्याओं तक सभी का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। इसमें कब्ज, अपच, डायरिया, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, बवासीर, हर्निया जीईआरडी जैसी समस्याओं को आसानी से ठीक किया जा सकता है। इसलिए, इस तरह की समस्याओं के लिए होम्योपैथी का सहारा लिया जा सकता है।

  1. महिलाओं से जुड़ी समस्याओं का इलाज

दरअसल, महिलाओं से जुड़ी समस्याओं का इलाज केवल एलोपैथी और आयुर्वेद में ही नहीं, बल्कि होम्योपैथी में भी किया जा सकता है। इसमें, पीसीओडी, पीसीओएस और मासिक धर्म अनियमितता जैसी समस्याओं को आसानी से ठीक किया जा सकता है। इसके अलावा, थायराइड और गर्भाशय फाइब्रॉएड जैसी महिलाओं से जुड़ी गंभीर समस्याओं का इलाज भी होम्योपैथी में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। होम्योपैथी में सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं का भी इलाज किया जा सकता है। 

  1. सांस से जुड़ी समस्याओं का इलाज 

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि होम्योपैथी में सांस से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का इलाज किया जा सकता है, जिस में एलर्जिक राइनाइटिस, साइनसाइटिस, सीओपीडी और अस्थमा जैसी समस्याओं का इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इसके अलावा, होम्योपैथी में सर्दी, जुकाम, खांसी, डिप्रेशन, तनाव और अनिद्रा जैसी आम समस्याओं को भी आसानी से ठीक किया जा सकता है। अगर आपको सांस से जुडी किसी भी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो आप होम्योपैथी इलाज का सहारा ले सकते हैं। 

निष्कर्ष:

दरअसल, एलोपैथी और आयुर्वेद के अलावा होम्योपैथी में भी कई तरह की समस्याओं का इलाज किया जा सकता है, जिस में त्वचा से जुड़ी समस्याओं का इलाज, पाचन से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का इलाज, महिलाओं से जुड़ी किसी भी गंभीर और आम समस्याओं का इलाज, जोड़ों, हड्डियां और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं का इलाज और सांस से जुड़ी समस्याओं का इलाज आसानी से किया जा सकता है। अगर आपको इस तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है, तो आप होम्योपैथी इलाज का सहारा ले सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और किसी भी तरह की समस्या होने पर होम्योपैथी इलाज पाने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इस के विशेषज्ञों से इस के इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त सकते हैं।

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लिवर के मरीजों को होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करने से पहले किन 4 बातों का ध्यान रखना चाहिए? जानें डॉक्टर से

दरअसल, आज के समय में लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिस के इलाज के लिए उन्हें अलग-अलग तरह की दवाइयां लेनी पड़ती हैं। लेकिन कहीं न कहीं हम यह भी अच्छे तरीके से जानते हैं, कि हम जितना ज्यादा दवाओं का सेवन करेंगे या फिर उन पर निर्भर रहेंगे, उनके साइड इफ़ेक्ट का खतरा उतना ही बढ़ेगा। दरअसल, यही एक बहुत बड़ा कारण होता है, कि सभी डॉक्टर कभी भी खुद से किसी भी तरह की कोई भी दवा का सेवन करने की सलाह प्रदान नहीं करते हैं। 

आम तौर पर, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस में सिर्फ आधुनिक दवाएं ही नहीं शामिल होती हैं, बल्कि होम्योपैथिक दवाएं भी कुछ इसी तरीके की होती हैं। दरअसल, अगर आप इन खुराक का सेवन निर्धारित सीमा से ज्यादा करते हैं, या फिर डॉक्टर की सलाह या फिर इजाजत के बिना ही इन दवाओं का सेवन करते हैं, तो इसकी वजह से आपके लिवर पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में कुछ लोगों को लगता है, कि बिना डॉक्टर की इजाजत के होम्योपैथी दवा का सेवन करना पूरी तरीके से सुरक्षित होता है, पर उन लोगों के लिए यह दवाएं काफी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकती हैं, जिनका लिवर या फिर किडनी पहले से ही खराब होती हैं। इस तरह की स्थिति में, ज्यादातर उन लोगों को ध्यान रखने की जरूरत होती है, जिन को लिवर से जुड़ी कोई समस्या होती है। अगर, लिवर के मरीज होम्योपैथिक दवाओं को लेना चाहते हैं, तो उनको इन 4 बातों का ध्यान रखना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, जिसमें लिवर की जांच करवाना, पानी की पूर्ति का ध्यान रखना, डॉक्टर से अच्छे से जानकारी लेना और कोई समस्या महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह पर दवाओं को तुरंत छोड़ना शामिल होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

लिवर के मरीजों को होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करने से पहले इन 4 बातों का ध्यान रखना चाहिए 

  1. पहले लिवर की जांच करवाएं 

आम तौर पर, किसी भी तरह की या फिर कोई भी दवा का सेवन करने या फिर उस दवा की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर दुआरा एक बार पहले लिवर फंक्शन की जांच कराने की सलाह प्रदान की जाती है। क्योंकि जिस केमिकल कंपोजिशन से इन दवाओं का निर्माण किया जाता है, दरअसल इन का पूरा प्रोसेस लिवर से ही होकर गुजरता है। इसलिए, होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करने से पहले अपने लिवर की जांच करवाएं।

  1. पानी की पूर्ति का ध्यान रखें 

हालांकि, होम्योपैथिक दवाओं में भी अलग-अलग तरह के कंपोजिशन पाए जाते हैं, जो प्रभाव दिखाने के बाद शरीर से बाहर निकल जाते हैं। अगर, शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी न दिया जाये, तो दवा में मौजूद केमिकल शरीर में लंबे समय तक बैठ सकते हैं और शरीर को बुरे तरीके से प्रभावित कर सकते हैं। 

  1. डॉक्टर से अच्छे से समझ लें

दरअसल, जब भी आपका होम्योपैथिक इलाज शुरू होता है, तो आपको उसी दौरान, डॉक्टर से दवाओं के बारे में अच्छे तरीके से जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि होम्योपैथिक दवाओं की खुराक ज्यादा या फिर लंबे समय तक लेने से लिवर बुरी तरीके से प्रभावित हो सकता है। 

  1. दिक्कत महसूस होने पर तुरंत छोड़ दें

आपको बता दें कि, इन सभी बातों का ध्यान रखने के बाद भी होम्योपैथिक दवाओं की वजह से होने वाले इफेक्ट पर निगरानी रखना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, अगर दवाओं का सेवन करने के बाद भी आपको शरीर में किसी भी तरह का कोई बदलाव या फिर तकलीफ दिखाई देती है, तो आपको इन दवाओं का सेवन बंद करके तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

निष्कर्ष:

लोगों को अपनी जिंदगी में, कभी न कभी किसी न किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, जिसके इलाज के लिए वह तरह तरह की दवाओं का सेवन करते हैं। इसके अलावा, दवाओं का ज्यादा सेवन और उन पर निर्भरता से साइड इफ़ेक्ट देखने को मिल सकते हैं। इसलिए, डॉक्टर कभी भी खुद से किसी भी तरह की दवा का सेवन करने की सलाह नहीं देते हैं। इसमें, आधुनिक दवाओं के साथ -साथ होम्योपैथिक दवाएं भी शामिल होती हैं। हालांकि, होम्योपैथिक दवाओं को काफी ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, पर इसका गलत तरीके से इस्तेमाल या फिर ज्यादा सेवन लिवर के मरीजों को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर लिवर के मरीज होम्योपैथी दवाओं का सेवन करना चाहते हैं, तो उनको पहले लिवर टेस्ट कराने, पानी की पूर्ति का ध्यान रखने, डॉक्टर से अच्छे से जानकारी लेने और कोई समस्या महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह पर दवाओं को तुरंत छोड़ने जैसी विशेष बातों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी या फिर अगर आपको भी इस स्वस्थ से जुडी कोई समस्या है, जिसका आप होम्योपैथिक तरीके से समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।