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आखिर क्या हो सकते हैं फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण? इसके होम्योपैथिक उपचारों के बारे में जाने डॉक्टर से

व्यस्त जीवनशैली के कारण लोग आपके लिए बिल्किल भी समय नहीं निकाल पाते हैं और इसकी वजह से उनको कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, खराब जीवनशैली, अनहेल्दी डाइट और नियमित व्यायाम की कमी के कारण लोगों में कई ऐसी समस्याएं हैं, जो आज के समय में काफी ज्यादा आम देखने को मिलती है, दरअसल इसके साथ ही लोगों में फैटी लिवर की समस्या काफी ज्यादा आम देखी जाती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की समस्या तब विकसित होती है, जब लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है और जिसकी वजह से लिवर के सही तरीके से काम करने की क्षमता में काफी ज्यादा रुकावट आने लग जाती है। दरअसल, इसमें चिंता करने वाली बात यह होती है, कि बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं, जो फैटी लिवर के शुरुआती चरणों में, इसके लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते हैं। जिसकी वजह से इस तरह की स्थिति बिना किसी लक्षण के अपने आप बढ़ती रहती है। 

आपको बता दें, कि इस समस्या के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, ताकि समय पर इलाज से लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस या फिर लिवर फेलियर जैसी गंभीर जटिलताओं को ठीक किया जा सके। अब सवाल यह उठता है, कि आखिर फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं? तो फैटी लिवर के शुरुआती लक्षणों में थकान और कमजोरी, ऊपरी दाहिने पेट में बेचैनी, बिना किसी वजह से वजन बढ़ना, मतली और भूख न लगना, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और गहरे रंग का मूत्र या फिर हल्के रंग का मल आना आदि शामिल हो सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

फैटी लिवर के लक्षण शुरुआती लक्षण

असल में, फैटी लिवर की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है, और इस समस्या की शुरुआत में लोगों को कोई लक्षण नहीं दिखते। हालांकि, हम आपको बता दें कि फैटी लिवर के लक्षण हल्के हो सकते हैं, जो आमतौर पर बताते हैं कि आपके लिवर पर बहुत ज्यादा दबाव है। समस्या की पहचान करने और सही इलाज करने के लिए फैटी लिवर के इन शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है:

  1. थकान और कमजोरी होने लगना। 
  2. पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में तकलीफ होना। 
  3. बिना किसी वजह के वजन बढ़ना।
  4. मतली और भूख लगना।
  5. कमजोर इम्यून सिस्टम होना। 
  6. गहरे रंग का पेशाब आना। 
  7. स्किन और आंखों के रंग में बदलाव होना। 
  8. ध्यान लगाने में मुश्किल और दिमाग में धुंधलापन आना। 
  9. पेट या फिर पैरों में सूजन होना। 
  10. आंतों से जुड़ी हल्की परेशानी होना। 

फैटी लिवर के लिए होम्योपैथी उपचार

दरअसल, फैटी लिवर के लिए होम्योपैथिक इलाज लिवर की सेहत को बेहतर बनाने और फैटी लिवर की बीमारी को नियंत्रित करने का एक प्राकृतिक तरीका माना जाता है। फैटी लिवर के लिए होम्योपैथी दवा में शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. चेलिडोनियम माजस

होम्योपैथी उपचार का यह तरीका लिवर के कामों को बेहतर बनाने में सहायता प्रदान करता है और साथ में, पित्त के प्रवाह को उत्तेजित करता है। इसके अलावा, यह मरीज के पेट के ऊपरी दाहिने भाग में होने वाली दिक्कत और थकान से काफी ज्यादा राहत प्रदान करता है। 

  1. कार्डुअस मारियानस (दूध थीस्ल)

उपचार का यह तरीका लिवर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता होता है, क्योंकि यह लीवर को जहरीले पदार्थों से छुटकारा दिलवाने और साथ में लिवर की रक्षा करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करते हैं। 

  1. नक्स वोमिका 

आपको बता दें, कि यह मरीज के डाइजेशन और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने का काम करता है। इसके साथ ही यह काफी ज्यादा शराब पीने, खराब आहार का सेवन करने और तनाव के कारण होने वाले फैटी लिवर के लिए काफी ज्यादा प्रभावी होता है। 

निष्कर्ष

फैटी लिवर के शुरुआती लक्षणों में थकान, पेट खराब होना, जी मिचलाना या फिर वजन में बदलाव शामिल होते हैं। सूजन, फाइब्रोसिस या फिर सिरोसिस के जोखिम को कम करने के लिए फैटी लिवर के इन शुरुआती लक्षणों की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है। इसके इलाज में होम्योपैथी उपचार काफी ज्यादा सहायता करते हैं। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी या फिर अगर आपको भी फैटी लिवर की समस्या है और आप इसका समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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आखिर कितना सही होता है, चेहरे पर शिकाकाई पाउडर लगाना? इस्तेमाल से पहले जानें डॉक्टर की सलाह

आज के समय में ज्यादातर लोग अपने चेहरे जो बालों को ज्यादा चमकाते हैं, ताकि वह खुद को और दूसरों को सुंदर और अट्रैक्टिव लग सके। ऐसे में, बालों के लिए शिकाकाई एक हर्बल इलाज के तौर पर मशहूर रही है। ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल अपने झड़ते हुए बालों के लिए और डैंड्रफ जैसी समस्या के लिए करते हैं। पर आज हम इसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, कि क्या चेहरे के लिए भी शिकाकाई का इस्तेमाल किया जा सकता है? और क्या यह त्वचा की समस्याओं को ठीक कर सकता है? कहीं इसका इस्तेमाल करने पर कोई समस्या तो नहीं हो जाएगी? तो आइये इस लेख के माध्यम से हम इस के डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि आखिर कितना सही होता है, चेहरे पर शिकाकाई पाउडर लगाना?

चेहरे पर शिकाकाई पाउडर लगाना कितना सही होता है?

शिकाकाई बालों की देखभाल में इस्तेमाल होने की वजह से, इस की एक पारंपरिक भारतीय दवा के तौर पर बड़े पैमाने पर पहचान की जाती है। आमतौर पर, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि हाँ, शिकाकाई पाउडर को हम अपने चेहरे पर लगा सकते हैं, पर इस दौरान, इसका बहुत ही सावधानी से इस्तेमाल करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। शिकाकाई पाउडर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो आमतौर पर, शरीर की त्वचा को सेहतमंद बनाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान कर सकते हैं। शिकाकाई बालों के लिए एक जादुई उपाय होने के साथ-साथ त्वचा के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। दरअसल, इसके फायदे कम मात्रा में पाए जाते हैं, पर यह त्वचा के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट काफी ज्यादा भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं और साथ ही इसमें सूजन-रोधी गुण भी मौजूद होते हैं। एक शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल होने की वजह से यह चेहरे की त्वचा के अलग-अलग संक्रमणों जैसे कि मुंहासों के इलाज में मददगार है और झुर्रियों और महीन रेखाओं जैसे उम्र बढ़ने की निशानियों को कम करके स्किन को चमकदार बनाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करते हैं। 

चेहरे पर शिकाकाई पाउडर का इस्तेमाल कैसे करें?

चेहरे पर शिकाकाई पाउडर का इस्तेमाल आप इन तरीकों से भी कर सकते हैं, जैसे कि

  1. शिकाकाई पाउडर को दही या फिर गुलाब जल में मिलाकर एक फेस पैक तैयार करें और 15 से 20 मिनट तक अपने चेहरे पर लगाएं और फिर धो लें।
  2. शिकाकाई पाउडर को पानी में मिलाकर एक हलके क्लींजर को तैयार करें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और फिर इस को ठंडे पानी से धो लें। 

निष्कर्ष

शिकाकाई पाउडर का उपयोग सावधानी से करें और त्वचा की समस्याओं के लिए इसका उपयोग करने से पहले एक त्वचा विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और स्किन कि किसी भी समस्या का इलाज कराने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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होम्योपैथिक दवा लेने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना नहीं मिलेगा दवा का असली फायदा

दुनिया भर में कई ऐसे लोग हैं, जो कई तरह की बीमारियों का सामना कर रहे हैं और इन विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए लोग द्वारा होम्योपैथिक उपचार को काफी ज्यादा असरदार माना जाता है। आपको बता दें, कि कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका ऐसा मानना है, कि होम्योपैथिक दवाओं का किस भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। आम तौर पर, होम्योपैथिक दवाओं को किसी भी तरह की गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए भी जाना जाता है। आपको बता दें, कि एलोपैथिक दवाओं के लंबे समय में कुछ साइड इफ़ेक्ट होते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग इसकी बजाए होम्योपैथिक दवाओं पर काफी ज्यादा भरोसा करते हैं। 

हालाँकि, आम तौर पर आपको होम्योपैथिक इलाज का असर दिखाई देने में थोड़ा वक्त लग सकता है, पर इसका असर काफी ज्यादा प्रभावशाली होता है। बता दें, कि इसने कई लोगों को कई तरह के फायदे प्रदान किये हैं। पर होम्योपैथी इलाज के दौरान, आपको कई रह की सावधानियों को ध्यान में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। आम तौर पर, अगर इस दौरान आप इन महत्वपूर्ण सावधानियों का ध्यान नहीं रखते हैं, या फिर भूल जाते हैं, तो यह आपके लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही इसके वजह से आप पर दवा का असर भी पुरे तरीके से नहीं हो पाता है। इसकी वहज से आपकी बीमारी को जड़ से खत्म होने के लिए काफी समय लग सकता है, या फिर सही तरीके से सावधानी न रखने के कारण समस्या का समाधान भी नहीं हो सकता है। इस वजह से ही आपको होम्योपैथी दवाओं का सेवन करने के दौरान कुछ नियमों को ध्यान में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

होम्योपैथिक दवाइयों के सेवन में बरतें ये सावधानियां

  1. दवाओं को सावधानी से रखें

आपको बता दें कि हमेशा होम्योपैथिक दवाओं को सावधानी के साथ रखना चाहिए, जैसे कि होम्योपैथिक दवाइयों को ज्यादा धूप और खुशबू वाली जगहों न रखें, क्योंकि इसके कारण यह दवाइयां खराब हो सकती हैं और तेज बदबू के कारण यह आपको नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसलिए इन दवाइयों को हमेशा सामान्य तापमान में ही रखें। 

  1. इन चीजों के सेवन से परहेज करें 

आम तौर पर, होम्योपैथिक दवाओं को लेते वक्त, कच्चे प्याज, लहसुन और कॉफी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करने से अपने आप का बचाव करें। इससे दवाओं का असर बिल्कुल भी नहीं होता है। इसके साथ ही आपको पान-गुटखा और स्मोकिंग आदि से भी अपना बचाव करना चाहिए। 

  1. कांच के गिलास में खाएं दवाएं 

बता दें, कि कभी भी होम्योपैथिक दवाओं का सेवन मेटल के गिलास में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से दवा और गिलास के बीच में, रिएक्शन हो सकता है और इस रिएक्शन की वह से आपकी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। दरअसल, इन होम्योपैथिक दवाओं का सेवन हमेशा कांच के गिलास में ही करना चाहिए।

  1. दवाओं को हाथों से न छुएं

अक्सर यह देखने को मिलता है, कि बहुत सारे लोग होम्योपैथिक दवाओं को अपने हाथों में लेकर ही खाते हैं। आम तौर पर, अगर आप भी इन दवाओं को अपने हाथों में लेकर ही खाते हैं, तो यह आपको कोई ख़ास फायदा नहीं प्रदान करती है। इसके साथ ही दवाओं का सेवन इस तरीके से करने से आपकी बीमारी पर किसी भी तरह का कोई असर नहीं होता है। आपको बता दें कि इस तरह की दवाओं को हमेशा कांच के बर्तन में लेकर ही खानी चाहिए। इससे आपको काफी फायदा हो सकता है। 

निष्कर्ष

विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए होम्योपैथिक उपचार को काफी ज्यादा असरदार माना जाता है। होम्योपैथिक दवाओं को किसी भी तरह की गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए भी जाना जाता है। होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करते वक्त आपको कई सावधानियों को ध्यान में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, जैसे कि इन होम्योपैथिक दवाओं को हमेशा कांच के गिलास में खाएं, दवाओं को हाथों से न छुएं, होम्योपैथिक दवाओं को लेते वक्त, कच्चे प्याज, लहसुन और कॉफी जैसे पेय पदार्थों का सेवन आदि न करें। इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए या फिर अगर आप अपनी किसी भी तरह की समस्या के लिए होम्योपैथिक उपचार करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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जानें ऐसे 4 होम्योपैथिक उपचार के बारे में, जो आपकी डायबिटीज को करते हैं कंट्रोल

आज के समय में, डायबिटीज जैसी समस्या लोगों में काफी ज्यादा आम हो गयी है। मधुमेह या फिर डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है। इस बीमारी को सिर्फ दवाओं, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है। इस तरह की बीमारी में, लोगों के शरीर में शुगर की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ने लग जाती है, और इस तरह की स्थिति को कंट्रोल करने वाला हार्मोन (इंसुलिन) की पैदावार कम होने लगती है। आम तौर पर, डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों को लगातार भूख लगना, थकान, काफी ज्यादा प्यास लगना, अत्यधिक पेशाब, मुंह का सूखना, घाव का ठीक न होना और लगातार धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। आपको बता दें, कि अगर समय पर ब्लड शुगर जैसी समस्या को कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो इसके कारण शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसलिए मधुमेह या फिर डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी को कभी भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके लक्षण नज़र आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इसके अलावा इस तरह की समस्या के लक्षणों को कम करने के लिए कई अंग्रेजी दवाएं उपलब्ध है। इसके साथ ही, कुछ लोगों का मानना ​​है कि होम्योपैथी भी मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि कौन से होम्योपैथिक उपचार मधुमेह को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं?

डायबिटीज और होम्योपैथी

दरअसल, होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसका इतिहास 200 साल से भी पुराना है। आमतौर पर, इसे होम्योपैथिक दवा के नाम से भी जाना जाता है। असल में, इसका इस्तेमाल कई मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है। आपको बता दें, कि होम्योपैथी इस बात को काफी ज्यादा बढ़ावा देती है, कि किसी भी बीमारी के लक्षणों का इलाज प्राकृतिक पदार्थों से किया जा सकता है। ऐसे में, आपको यह ध्यान रखना चाहिए, कि अगर आप मधुमेह के इलाज के लिए होम्योपैथी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इस उपचार को प्राप्त करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

डायबिटीज के लक्षणों के लिए होम्योपैथिक उपचार

आमतौर पर, होम्योपैथिक उपचार मिनरल्स, पौधों, या फिर जानवरों से प्राप्त किये जाते हैं और इन सभी को प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। डायबिटीज के लिए होम्योपैथिक उपचार इस प्रकार हैं: 

  1. काला आलूबुखारा

ऐसा माना जाता है, कि काला आलूबुखारा में, मधुमेह के लक्षणों जैसे अत्यधिक प्यास, कमजोरी, त्वचा के छाले और अत्यधिक पेशाब का इलाज करने की क्षमता होती है।

  1. कोनियम हेमलॉक

हेमलॉक एक जहरीले पौधे की तरह होता है, जिसके रस का इस्तेमाल कई दवाइयाँ बनाने में किया जाता है। दरअसल, कोनियम हेमलॉक के इस्तेमाल से, डायबिटिक न्यूरोपैथी, या नर्व डैमेज जैसी समस्याओं का इलाज करने में मदद प्राप्त होती है। 

  1. प्लंबम (लेड)

दरअसल, लेड एक धातु की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल कई तरह की दवाओं को बनाने में किया जाता है। यह हाथ और पैरों में सुन्नता, नसों में दर्द और टिनिटस जैसे डायबिटीज के लक्षणों के इलाज में सहायता करता है। 

  1. मैरीगोल्ड

दरअसल, फूल का यह पौधा सिर्फ घर की सुंदरता को ही नहीं बढ़ाता है, बल्कि इस पौधे का इस्तेमाल, कई तरह की दवाइओं को बनाने में भी किया जाता है। आम तौर पर, ऐसा माना जाता है, कि यह पौधा डायबिटीज के लक्षण जैसे कि अल्सर के इलाज में भी काफी ज्यादा मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

मधुमेह या फिर डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है। इस बीमारी को सिर्फ दवाओं, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है। डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को लगातार भूख लगना, अत्यधिक पेशाब, मुंह का सूखना, घाव का ठीक न होना और लगातार धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। डायबिटीज के लक्षणों के लिए काला आलूबुखारा, कोनियम हेमलॉक, प्लंबम (लेड) और मैरीगोल्ड जैसे होम्योपैथिक उपचार काफी ज्यादा फायदेमंद होते हैं। अगर समय पर ब्लड शुगर जैसी समस्या को कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो इसके कारण शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसलिए इस समस्या के लक्षण नज़र आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही अगर आप मधुमेह के इलाज के लिए होम्योपैथी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इस उपचार को प्राप्त करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आपको भी डायबिटीज जैसी कोई समस्या है और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में इस के डॉक्टर से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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चिंता और तनाव से राहत पाने के लिए जाने होम्योपैथी कैसे काम करती हैं।

तनाव अक्सर दिखाई नहीं देता पर यह काफी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। 

 

क्या आप इसके बारे में जानते हैं, कि चिंता और तनाव दुनिया भर में सबसे ज्यादा आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आम तौर पर, तनाव बुरा और अच्छा दोनों हो सकता है, क्योंकि यह हमें थोड़े समय के लिए प्रेरित और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए सहायता प्रदान कर सकता है, फिर चाहे वे समय सीमा को पूरा करना हो या फिर अपने आप को किसी खतरे से बचाना हो। पर जब किसी व्यक्ति का तनाव स्तर काफी ज्यादा पुराना हो जाता है, तो यह उसको थका सकता है और साथ ही कई तरह की सेहत समस्याओं को पैदा कर सकता है। 

जैसे कि, कई मामलों में, काम की समय सीमाओं से लेकर, अपनी खुद की जिम्मेदारिओं तक, तनाव हमारे जीवन में चुपचाप एक आधुनिक हिस्सा बन गया है। अध्ययनों के अनुसार, दुनिया भर में 75 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग अपनी जिंदगी में हर दो हफ्ते में किसी न किसी रूप में तनाव का एहसास करते हैं। आपको बता दें, कि यह हमेशा काफी ज्यादा गुस्सा करने, ज्यादा उदासी महसूस करने, काफी ज्यादा खाना खाने या फिर नींद न आने के रूप में दिखाई दे सकता है। आम तौर पर, अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाये, तो इसकी वजह से हृदय रोग, डिप्रेशन और यहां तक कि किसी भी चीज की लत लगना जैसी दीर्घकालिक बीमारियां पैदा हो सकती है। 

 

दरअसल तनाव के इलाज के लिए, व्यक्तिगत होम्योपैथिक दवाओं को बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, जो आम तौर पर, बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के आपके भावनात्मक और शारीरिक सेहत को ठीक करती हैं, चाहे वो चिंता हो, या फिर अचानक से होने वाली थकान हो, यह उपचार एक व्यक्ति को स्थाई शांति प्रदान करने के लिए जड़ से काम करता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं, तनाव के लक्षण और साथ ही चिंता और तनाव में होम्योपैथिक दवाएं कैसे काम करती हैं? 

 

दीर्घकालिक तनाव के लक्षण 

 

वैसे, तो एक व्यक्ति में तनाव के कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि

1. ज्यादा चिड़चिड़ापन और मन की स्थिति में उतार चढ़ाव होना। 

2. नींद की गुणवत्ता खराब होना। 

3. चिंता या फिर रोजाना घबराहट के दौरे पड़ना। 

चिंता और तनाव के लिए होम्योपैथी कैसे काम करती है?

 

1. मन और शरीर को संतुलित करना: आमतौर पर होम्योपैथी बिना किसी बेहोशी के एक व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायता प्रदान करता है। 

2. दीर्घकालिक उपयोग के लिए सुरक्षित: दरअसल इसमें किसी भी तरह की कोई भी आदत बनाने वाली दवा या फिर किसी भी तरह की कोई निर्भरता का जोखिम नहीं होता है। 

3. शारीरिक प्रभावों को कंट्रोल करना: होम्योपैथी एक व्यक्ति के पाचन और ऊर्जा स्तर को बहुत ही अच्छा बनाता है और साथ में नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। 

4. भावनात्मक ट्रिगर्स को लक्षित करना: यह अंतर्निहित दुःख, डर या फिर सदमे का समाधान करने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करता है। 

 

चिंता और तनाव से राहत पाने के लिए सब से बढ़िया होम्योपैथिक दवायें

 

1. इग्नाटिया

2. काली फॉस

3. नैट्रम म्यूर 

4. जेल्सीमियम 

5. अर्जेंट्स नाइट्रिक्स 

निष्कर्ष:

चिंता और तनाव दुनिया भर में सबसे ज्यादा आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। समय सीमाओं से लेकर, अपनी खुद की जिम्मेदारिओं तक, तनाव हमारे जीवन में चुपचाप एक आधुनिक हिस्सा बन गया है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाये, तो इसकी वजह से हृदय रोग, डिप्रेशन और यहां तक कि किसी भी चीज की लत लगना जैसी दीर्घकालिक बीमारियां हो सकती है। तनाव के लिए व्यक्तिगत होम्योपैथिक दवाओं को बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। चिड़चिड़ापन और मन की स्थिति में उतार चढ़ाव होना और नींद की गुणवत्ता खराब होना यह सब दीर्घकालिक तनाव के लक्षण होते हैं, जिनको इग्नाटिया, काली फॉस, नैट्रम म्यूर, जेल्सीमियम, अर्जेंट्स नाइट्रिक्स जैसी होम्योपैथिक दवाओं के इस्तेमाल से ठीक किया जा सकता है। चिंता और तनाव के लिए होम्योपैथी, मन और शरीर को संतुलित और शारीरिक प्रभावों को कंट्रोल करती है। अगर आप किसी तरह की चिंता या फिर तनाव से जूझ रहे हैं, और आप इसका होम्योपैथिक इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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उच्च रक्तचाप का होम्योपैथिक इलाज बिना किसी दुष्प्रभाव से पाएं आराम।

दरअसल, ब्लड प्रेशर का मतलब होता है, खून के प्रवाह की वजह से धमनियों पर बनने वाला दबाव। आम तौर पर, अगर आपको लगातार सिरदर्द, चक्कर आना या फिर बेचैनी जैसी समस्या महसूस होती है, तो यह असल में हाई ब्लड प्रेशर यानी कि उच्च रक्तचाप के संकेत हो सकते हैं। आपको बता दें, कि 120/80 mmHg के प्रेशर को नार्मल ब्लड प्रेशर कहा जाता है और 140/90 mmHg के प्रेशर को हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है, जो की असल में, आपकी किडनी और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सेहत के लिए नुकसान -दायक साबित हो सकता है। यह आम तौर पर एक “साइलेंट किलर” है, जो बिना किसी लक्षण के शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। दरअसल, इस तरह की समस्या के लिए एक अच्छी खबर यह है, कि होम्योपैथिक इलाज से आप इस को प्राकृतिक रूप से कंट्रोल कर सकते हैं, वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट के। इस लेख के माध्यम से, हाई ब्लड प्रेशर के कारण, लक्षण, और इस समस्या के लिए असरदार होम्योपैथिक दवाइयों के बारे में, जानकारी प्राप्त करेंगे। 

हाई ब्लड प्रेशर के कारण 

  1. मोटापा होना। 
  2. धूम्रपान करना। 
  3. ज्यादा मात्रा में शराब पीना। 
  4. ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करना। 
  5. नियमित व्यायाम न करना। 

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण 

आम तौर पर, ब्लड प्रेशर के स्तर को नार्मल बनाने और इस में अचानक होने वाले बदलाव को रोकने के लिए और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान से बचाने के लिए ब्लड प्रेशर का इलाज करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं, जैसे कि

  1. रोजाना सिर में दर्द होना। 
  2. नज़र की समस्याएं होना। 
  3. नाक से खून आना। 
  4. सांस लेने में दिक्कत होना। 

हाई ब्लड प्रेशर का होम्योपैथिक इलाज

असल में, एक होम्योपैथिक डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए, होम्योपैथिक दवाओं का चुनाव व्यक्ति के लक्षणों को बहुत ही ध्यान से देखने, शारीरिक जांच करने और अलग-अलग नैदानिक परिक्षणों के बाद किया जाता है। हाई ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए प्रयोग की जाने वाली होम्योपैथिक दवाएं इस प्रकार हैं: 

  1. नैट्रम म्यूर

इस दवा का इस्तेमाल, विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनका हाई बीपी के कारण, काफी ज्यादा सिर दर्द होता है, स्ट्रेस और इमोशनल ट्रॉमा बढ़ता है।

  1. बेलाडोना 

अगर हाई ब्लड प्रेशर के कारण आप का अचानक से सिर दर्द, तेज धड़कन और साथ ही चेहरा लाल हो जाए, तो इस तरह की स्थिति के लिए बेलाडोना दवा का उपयोग किया जा सकता है। 

  1. ग्लोनोइनम 

ग्लोनोइनम दवा का इस्तेमाल आम तौर पर, जब पूरे शरीर में नस फड़कने की भावना महसूस होना, तेज़ धड़कन, सिर में सनसनाहट जैसे संपन्न और गर्म मौसम में ब्लड प्रेशर बढ़ने पर किया जाता है। 

  1. रॉउवोल्फिया सर्पेंटिना 

रॉउवोल्फिया सर्पेंटिना दवा असल में, कुदरती रूप से ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायता प्रदान करती है, विशेष रूप से अगर आपका लगातार हाई ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ रहा है, तो इस दवा का विकल्प बहुत ही अच्छा होता है। 

नोट: किसी भी समस्या के लिए इन होम्योपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल करने से पहले एक बार किसी प्रमाणित होम्योपैथ डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

निष्कर्ष: उच्च रक्तचाप का समय पर इलाज न करने पर यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इस तरह की समस्या के लिए होम्योपैथिक एक प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी उपचार हो सकता है, जिस को डॉक्टर की सलाह के साथ अपनाया जा सकता है। अगर आपको भी हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, और आप इस समस्या का समाधान ढूंढ रहे हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

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एलोपेसिया एरीटा के लिए सबसे बढ़िया 6 होम्योपैथिक उपचार!

दरअसल एलोपेसिया एरीटा का मतलब है बालों का पैच में झड़ना, आम तौर पर एलोपेसिया एरियाटा की समस्या में व्यक्ति के सिर या अन्य जगहों जैसे भौंहों, दाढ़ी आदि से गोलाकार या अंडाकार पैच में बाल झड़ने लगते हैं। हालांकि, यह समस्या बालों से ढके हुए शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है। आपको बता दें की जब दाढ़ी में एलोपेसिया एरीटा समस्या दिखाई देती है तो उसको एलोपेसिया एरीटा बारबे के नाम से जाना जाता है। आम तौर पर सिर या शरीर के किसी भी अन्य जगह पर गंजे पैच पांच रुपये या एक रुपये के सिक्के के आकार के दिखाई पड़ते हैं। इस समस्या दौरान कुछ लोगों में उनके पुरे बालों का झड़ना भी हो सकता है, हालांकि यह आम नहीं है। एलोपेसिया की समस्या सभी उम्र, नस्लों और लिंगों के लोगों को समान रूप से प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर सिर, दाढ़ी और भौंहों पर गंजे पैच दिखाई देना व्यक्ति को बहुत परेशान कर देने वाला हो सकता है। हालांकि एलोपेसिया एरियाटा किसी अन्य तरीके से रोगी के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता है। जब एक व्यक्ति के बाल झड़ने लग जाते हैं, तो ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो खुजली की शिकायत करते हैं। इससे व्यक्ति को कोई शारीरिक समस्या नहीं होती है। 

होम्योपैथिक उपचार क्या है?

दरअसल होम्योपैथी एक बहुत ही उन्नत विज्ञान है जो एलोपेसिया एरीटा के साथ- साथ ऑटोइम्यून मूल की बीमारियों का भी इलाज करता है। आपको बता दें कि शुरुआत में होम्योपैथिक दवाएँ, किसी भी गंजे धब्बों के आकार को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं और इसके साथ ही नए गंजे धब्बों को बनने से रोकती हैं। इसके इलावा होम्योपैथी बालों के पुनः विकास को बढ़ावा देने में काफ़ी मदद करती हैं। एलोपेसिया एरीटा समस्या का जब एक बार होम्योपैथी से इलाज हो जाता है, तो व्यक्ति को दोबारा एलोपेसिया एरीटा जैसी समस्या होने कि संभावना बहुत ज़ियादा कम हो जाती है। 

हालांकि कुछ लोग पारंपरिक तरीकों का प्रयोग करते हैं, और एलोपेसिया एरीटा के इलाज के लिए विशेष रूप से इम्यूनो सप्रेसेंट, कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं का उपयोग करते हैं। जिनको आम तौर पर या तो शीर्ष पर लगाया जाता है, स्कैल्प में इंजेक्ट किया जाता है या फिर मुंह के माध्यम से लिया जाता है। यह उपचार आमतौर पर व्यक्ति की इम्यून सिस्टम को दबाते हैं, अपने दुष्प्रभावों को दिखाते हैं और तो और नए गंजे धब्बों को दिखने से रोक नहीं पाते हैं। इसलिए होम्योपैथी आपके लिए एक बहुत ही सुरक्षित वैकल्पिक उपचार हो सकता है, जिसको एक मीठी गोलियों के रूप में दिया जाता है। यह दवा खाने में आसान और बहुत ज़्यादा प्रभावी होती हैं। 

होम्योपैथिक उपचार इम्यून सिस्टम में अंदरूनी गड़बड़ियों को दबाने की बजाय उन्हें ठीक करने के लिए अंदरूनी रूप से काम करती है। आमतौर पर होम्योपैथिक दवा का एक बड़ा लाभ यह है कि यह दुष्प्रभावों से मुक्त होते हैं।

क्या होम्योपैथी इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाती है?

हाँ, होम्योपैथी इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाती है। दरअसल एलोपेसिया एरीटा के लिए होम्योपैथिक दवाएँ आमतौर पर बालों के रोमों को नष्ट करने वाली अति सक्रिय इम्यून सिस्टम को अनुकूलित करके मदद करती हैं। यह उपचार काफ़ी हद तक सफ़ल साबित होता है, क्योंकि यह व्यक्ति के बालों को दुबारा से वापस बढ़ने में मदद करता है। और बार-बार व्यक्ति के गंजे धब्बे को बनने से रोकता है।

होम्योपैथी का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता

दरअसल होम्योपैथी प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थों से बनाई गई दवाओं का इस्तेमाल करती है। आमतौर पर इसमें कोई भी हानिकारक रसायन नहीं होता है। इसकी वजह से ही इसका उपयोग करना बहुत सुरक्षित होता है, और तो और इनका कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है। आपको बता दें कि होम्योपैथी का उपयोग सभी आयु वर्ग के लोग बिना किसी चिंता के आराम से कर सकते हैं।

एलोपेसिया एरीटा के लिए होम्योपैथिक दवाएं

  1. विंका माइनर – एलोपेसिया एरीटा की प्रवृत्ति जब दोबारा उगे बाल सफेद होते हैं। 

दरअसल यह दवा ‘लेसर पेरीविंकल’ नामक पौधे से तैयार की जाती है। यह विंका माइनर एलोपेसिया एरियाटा के लिए एक और उपयोगी होम्योपैथिक दवा है। आमतौर पर यह एलोपेसिया एरीटा के उन मामलों में अच्छी तरह से काम करता है, जहां बालों के झड़ने की प्रवृत्ति होती है, और जो बाद में सफेद बालों से बदल जाते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति की खोपड़ी पर खुजली और हिंसक खरोंच भी हो सकती है। 

विंका माइनर का उपयोग कब करें?

विंका माइनर का उपयोग ज्यादातर उन मामलों में किया जाता है, जहां व्यक्ति के जगह-जगह से बाल झड़ने और उसकी जगह पर दोबारा सफेद बाल उगने की प्रवृत्ति होती है।

विंका माइनर का उपयोग कैसे किया जाता है। 

आमतौर पर इस दवा को 30C पोटेंसी में दिन में दो बार ले सकते हैं। यह दवा दो तरीकों से काम करती है, पहला यह जगह-जगह से बाल झड़ने की समस्या का इलाज करती है और दूसरा यह दोबारा उगने वाले बालों को सफेद होने से रोकने में मदद करती है। 

  1. फ्लोरिक एसिड –एलोपेसिया एरीटा के लिए शीर्ष ग्रेड होम्योपैथिक दवा। 

आपको बता दें कि एलोपेसिया एरियाटा के लिए फ्लोरिक एसिड सबसे अच्छे होम्योपैथिक उपचारों में से एक है। आमतौर पर यह सिर के किसी भी हिस्से में बाल झड़ने की समस्या को दूर करते हैं। यह व्यक्ति के गंजे पैच में बालों के दोबारा उगने में हैरानीजनक रूप से मदद करता है। जिन लोगों को इसकी जरूरत होती है उसके सिर में खुजली हो सकती है और सिर की त्वचा छूने के प्रति संवेदनशील भी हो सकती है। 

फ्लोरिक एसिड का उपयोग कब किया जाता है?

दरअसल इस दवा का इस्तेमाल एलोपेसिया एरीटा के मामले में हो सकता है। जिसमें व्यक्ति के सिर पर कहीं भी गंजे धब्बे हो, जो खुजली-दार और संवेदनशील हो।

फ्लोरिक एसिड का उपयोग कैसे किया जाता है?

हालांकि शुरुआत में फ्लोरिक एसिड का इस्तेमाल 30C दिन में दो से तीन बार कर सकते हैं। जब आपके बाल दोबारा से नए उगने लगे, तो इस की खुराक को कम कर देना चाहिये। 

  1. फास्फोरस – सिर के आगे या किनारे से बाल झड़ने के साथ। 

वैसे तो सिर के किसी भी हिस्से में बाल झड़ने पर फास्फोरस का इस्तेमाल किया जा सकता है, पर यह दवा सबसे ज्यादा तब कारगर होती है, जब व्यक्ति के सामने से या फिर साइड से बाल झड़ रहे हों। जिन लोगों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उन लोगों के सिर पर बहुत ज़्यादा पसीना आने की संभावना होती है। आमतौर पर सिर पर गर्मी भी महसूस हो सकती है, सिर में डेंड्रफ भी हो सकती है। 

फास्फोरस का उपयोग कब किया जाता है?

दरअसल फास्फोरस का इस्तेमाल मुख्य रूप से तब किया जाता है जब व्यक्ति के सिर के सामने से या फिर बगल से बाल झड़ने लग जाते हैं। 

फास्फोरस का उपयोग कैसे किया जाता है?

वैसे तो इसको कम और ज्यादा किसी भी शक्ति में लिया जा सकता है, पर इसकी सबसे ज्यादा अनुशंसित 30C शक्ति है। आमतौर पर इसके अच्छे नतीजों को प्राप्त करने के लिए आप फास्फोरस 30C को दिन में दो बार ले सकते हैं। 

कैल्केरिया कार्ब – पसीने से सिर के बाल झड़ने के लिए

कैल्केरिया कार्ब दवा का उपयोग उन मामलों में किया जाता है, जहां पर व्यक्ति के पैची बाल झड़ने के साथ-साथ पसीना भी बढ़ जाता है। आमतौर पर व्यक्ति को अपने सिर पर ठंडक का अहसास भी हो सकता है और उसके सिर पर पर खुजली भी हो सकती है। 

कैल्केरिया कार्ब का उपयोग कब किया जाता है?

आम तौर पर कैल्केरिया कार्ब का इस्तेमाल उन लोगों के लिए अनुशंसित होता है, जिन लोगों के सिर से जगह-जगह से बाल झड़ रहे होते हैं और उनको पसीना बहुत ज्यादा आता हो। 

कैल्केरिया कार्ब का उपयोग कैसे किया जाता है?

इसका उपयोग आमतौर पर शिकायत के प्रकार के आधार पर कम से लेकर ज़्यादा तक की अलग अलग शक्तियों में किया जा सकता है, पर इसका सबसे आम उपयोग 30C शक्ति का है। इसके सबसे अच्छे परिणामों के लिए आप कैल्केरिया कार्ब 30C को सुबह एक बार और शाम को एक बार ले सकते हैं। 

  1. लाइकोपोडियम – जब सिर की त्वचा के ऊपरी हिस्से (वर्टेक्स) से बाल झड़ने लगते हैं। 

आमतौर पर लाइकोपोडियम एक प्राकृतिक उपचार है, जिस को पौधे क्लब मॉस से प्राप्त किया जाता है। दरअसल यह विशेष रूप से खोपड़ी के शीर्ष पर होने वाले गंजे धब्बों से उबरने में बहुत अच्छा काम करता है। इस दौरान व्यक्ति को अपनी खोपड़ी पर जलन और जली का अहसास होता है। इसके साथ ही लाइकोपोडियम समय से पहले बालों के सफेद होने के इलाज के लिए, एक बहुत ही प्रमुख दवा है।

लाइकोपोडियम का उपयोग कब किया जा सकता है?

लाइकोपोडियम दवा के इस्तेमाल पर तब ध्यान दिया जा सकता है जब व्यक्ति के सिर के ऊपरी भाग पर बाल झड़ने के निशान दिखाई देने लग जाते हैं 

लाइकोपोडियम का उपयोग कैसे  किया जाता है?

लाइकोपोडियम का इस्तेमाल कम से लेकर ज्यादा तक इसकी अलग अलग शक्तियों में से, इसको दिन में दो बार 30C शक्ति से शुरू करना सबसे अच्छा होता है। इसके बाद ही इसकी ज़्यादा शक्तियों पर ध्यान दिआ जा सकता है, पर केवल होम्योपैथिक चिकित्सक से सलाह लेने के बाद। 

  1. हेपर सल्फ – छूने के प्रति खोपड़ी की संवेदनशीलता के साथ

असल में हेपर सल्फ एक लाभकारी दवा है। यह दवा बालों के झड़ने के साथ-साथ खोपड़ी को छूने के प्रति संवेदनशीलता के मामलों में मदद करती है। व्यक्ति की खोपड़ी पर खुजली और जलन भी हो सकती है और खोपड़ी पर पसीना भी बढ़ सकता है, जिससे खोपड़ी से खट्टी गंध आती है। 

हेपर सल्फ का उपयोग कब किया जाता है?

आमतौर पर हेपर सल्फ की दवा को उन मामलों में चुना जाता है, जहां व्यक्ति के पैच के रूप में बाल झड़ते हैं, और साथ के साथ सिर की त्वचा छूने के प्रति संवेदनशील हो जाती है।

हेपर सल्फ का उपयोग कैसे किया जाता है?

दरअसल हेपर सल्फ की दवा 30C शक्ति में अच्छी तरह से काम करती है। इस दवा का इस्तेमाल आमतौर पर दिन में एक से दो बार तक सीमित होता है। आमतौर पर तब तक उच्च शक्ति की सिफारिश नहीं की जाती, जब तक कोई डॉक्टर आपको ऐसा करने के लिए नहीं कहता। 

एलोपेसिया एरीटा के संकेत और लक्षण

  1. अंडाकार या गोल आकार के गंजे धब्बे दिखाई देना। 
  2. व्यक्ति के बालों के रोमों का ढीला हो जाना। 
  3. ठंड के मौसम में बालों का बहुत ज्यादा झड़ना। 
  4. सिर के एक स्थान पर बाल उग आते हैं पर दूसरे स्थान पर बाल झड़ जाते हैं। 
  5. खोपड़ी की एक तरफ दूसरे की तुलना में बहुत ज़्यादा पैच का होना। 
  6. हाथों और पैरों के नाखूनों का पतला हो जाना और उनकी चमक खत्म होना। 

एलोपेसिया एरीटा के प्रकार:

एलोपेसिया एरीटा के आम गोलाकार या फिर अंडाकार आकार के पैच के अलावा, एलोपेसिया एरीटा के कुछ दुर्लभ प्रकार भी हैं :

  1. एलोपेसिया एरीटा टोटलिस : इसमें व्यक्ति के पूरे सिर से बाल झड़ जाते हैं। 
  2. एलोपेसिया एरीटा यूनिवर्सलिस : एलोपेसिया यूनिवर्सलिस में व्यक्ति के पूरे शरीर से बाल झड़ जाते हैं जिसमें, सिर, भौहें, पलकें, दाढ़ी, बगल और गुप्तांग शामिल हैं।
  3. ओफियासिस एलोपेसिया एरीटा:  ओफियासिस एलोपेसिया में व्यक्ति के टेम्पोरल क्षेत्र (साइड्स) और ओसीसीपट क्षेत्र (सिर के पीछे) से बैंड जैसा बालों का झड़ना शामिल है। 
  4. डिफ्यूज एलोपेसिया एरीटा : डिफ्यूज एलोपेसिया में लोगों के पैची बालों के झड़ने की बजाय अचानक बालों का झड़ना शुरू हो जाता है। 

एलोपेसिया एरीटा के कारण और ट्रिगर कारक

एलोपेसिया एरीटा के कारण:

1.आनुवंशिक कारक: 

आपको बता दें कि कई जीन एलोपेसिया एरीटा से जुड़े हुए हैं जो शरीर के इम्यून प्रतिक्रिया में भाग लेते हैं। ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) से संबंधित जीन इम्यून प्रतिक्रिया को संशोधित करने और आमतौर पर बालों के रोम को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। इस विकार से पीड़ित व्यक्तियों में अक्सर देखा जाता है कि एलोपेसिया एरीटा के अलावा कोई और ऑटोइम्यून विकार होता है जो उनके परिवारों में नहीं होता है।

  1. रसायन : 

आमतौर पर सल्फर, ईथर और पैराबेन के आधारित कॉस्मेटिक जैसे कि, शैंपू, कंडीशनर और सीरम आदि चीजों का नियमित उपयोग  बालों के रोमों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे लोगों के बाल झड़ने लगते हैं। 

  1. यांत्रिक : 

दरअसल बालों को लम्बे समय तक कसकर बांधने से व्यक्ति की हेयरलाइन पीछे की ओर खिसक जाती है, जिससे ट्रैक्शन एलोपेसिया हो जाता है। 

एलोपेसिया एरीटा के ट्रिगर कारक :

की गई शोध के अनुसार, आमतौर पर एलोपेसिया एरीटा वाले व्यक्तियों को किसी और ऑटोइम्यून बीमारी का इतिहास भी हो सकता है। उदाहरण के तौर पर विटिलिगो – मेलेनिन वर्णक की कमी की वजह से व्यक्ति की त्वचा पर सफेद धब्बे; थायरॉयडिटिस- थायरॉयड ग्रंथि की सूजन या फिर परिवार का कोई और सदस्य किसी ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हो सकता है। आमतौर पर वायरल संक्रमण, टीके और व्यक्ति का शारीरिक तनाव जैसे कुछ कारक एलोपेसिया एरीटा को ट्रिगर कर सकते हैं। 

एलोपेसिया एरीटा समस्या कितनी आम है और क्या इससे स्थायी रूप से बाल झड़ते हैं?

आमतौर पर एलोपेसिया एरियाटा की समस्या काफी आम है। यह समस्या व्यक्ति को किसी भी समय हो सकती है, लगभग एक प्रतिशत आबादी इससे प्रभावित होती है। दरअसल एलोपेसिया एरियाटा में बालों का झड़ना स्थायी नहीं होता है। आमतौर पर एलोपेसिया एरियाटा एक उल्टा बाल झड़ना है, क्योंकि बालों की जड़ को घेरने वाली संरचना(बालों के रोम) को कोई नुक्सान नहीं होता है। 

एलोपेसिया एरीटा का निदान कैसे करें?

आमतौर पर डॉक्टर मरीज़ के बालों के झड़ने और गंजे धब्बों के पैटर्न को देखकर एलोपेसिया एरियाटा के मामलों का तुरंत निदान कर सकते हैं। दरअसल एलोपेसिया एरीटा के बहुत ही दुर्लभ मामलों में, बालों या खोपड़ी की बायोप्सी के नमूने मूल्यांकन के लिए प्रयोगशाला में भेजे जा सकते हैं। इसके निदान की पुष्टि ट्राइकोस्कोपी के द्वारा भी की जा सकती है, जो पीले और काले बिंदु (रोम पर नष्ट हुए बाल) दिखाती है। इसके अलावा कभी-कभी और ऑटोइम्यून बीमारियों की जांच करने के लिए खून टेस्ट की सिफारिश की जा सकती है।

निष्कर्ष : एलोपेसिया एरीटा की समस्या लोगों में काफी आम है। यह समस्या बालों से ढके हुए शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है। एलोपेसिया एरीटा जैसी कोई भी समस्या होने पर आपको तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिये, इससे आपको बेहतर इलाज मिल सकता है। अगर आपको भी बालों से जुड़ी एलोपेसिया एरीटा जैसी कोई समस्या है और आप इस समस्या से काफी परेशान हैं और आप इसका इलाज ढूंढ रहे हैं तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाके अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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डैंड्रफ होने के मुख्य लक्षण, कारण और कैसे पाएं निदान ?

डैंड्रफ एक सामान्य विकार है, जिसकी वजह से सिर की त्वचा पपड़ीदार बनने लग जाती है | रुसी की वजह से सिर में काफी खुजली होती है और बाल झड़ने की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है | यह समस्या तब उत्पन्न होती है, जब सिर के त्वचा की कोशिकाओं काफी बढ़ जाती है | स्कैल्प यानी सिर की त्वचा में सिबेशियस ग्रंथि मौजूद होती है, जो स्कैल्प को नरम और मुलायम रखने के लिए सीबम का स्त्राव करती है | सीबम के अधिक मात्रा में उत्पादन होने के कारण यह त्वचा को तैलीय कर देते है, जिसके चलते स्कैल्प पर खुजली होने लग जाती है | सिर की त्वचा में आये इस तरह के बदलाव से कई तरह के त्वचा से जुड़े रोग होने का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें से एक है डैंड्रफ | 

 

आमतौर पर यौवनावस्था के बाद ही बहुत से लोगों को डैंड्रफ की समस्या होने लग जाता है और जिसके मामले सबसे अधिक पुरुषों में पाए जाते है | सिबोरिया होने के लक्षणों में भी रूसी हो सकती है | सिबोरिया होने से त्वचा लाल हो जाती है और उनमें काफी जलन होने लग जाता है | डैंड्रफ के इलाज के लिए होम्योपैथी में कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है | यदि आप में से कोई भी व्यक्ति डैंड्रफ की समस्या से पीड़ित है तो इलाज के लिए आप डॉ सोनल हीलिंग  विद होम्योपैथी से परामर्श कर सकते है | आइये जानते है डैंड्रफ होने के मुख्य लक्षण और कारण क्या है :- 

डैंड्रफ होने के मुख्य लक्षण 

डैंड्रफ होने के मुख्य लक्षण निम्नलिखित है :- 

 

  • सिर की त्वचा यानी स्कैल्प और बालों का सफ़ेद या फिर भूरे रंग की परत होना 
  • स्कैल्प पर बार-बार खुजली होना 
  • स्कैल्प में सूखापन होना 
  • बालों का लगातार झड़ना 
  • सिर की त्वचा से सफ़ेद रंग के पाउडर की तरह गिरना 
  • सिर की त्वचा में लाल और चिकने धब्बे का दिखाई देना 
  • स्कैल्प में तनाव होने का महसूस होना 
  • स्कैल्प, बालों, भौहों, दाढ़ी, मूछों पर या फिर अपने कंधों और पीठ की ऊपरी त्वचा में गुच्छों का दिखाई देना   आदि | 

 

डैंड्रफ होने के मुख्य कारण 

सिर में डैंड्रफ कई कारणों से उत्पन्न हो सकते है, जिनमें शामिल है :- 

 

यीस्ट मालासेजिया 

यह एक फंगस की तरह होता है, जो अधिकतर लोगों के सिर में ही होता है | यह सीबम पर ही पनपता है और फैटी एसिड से बनता है, जिससे स्कैल्प में लगातार खुजली होने लग जाती है |   

 

त्वचा की कोशिकाएं 

त्वचा हमारी पुरानी कोशिकाओं के बहाने का काम करती है, जब यह कोशिकाएं सिर और बालों से निकलने वाले तेल से जाकर मिलकर जम जाती है, तो इससे रूसी होने लग जाती है | 

 

शुष्क त्वचा का होना 

सुखी त्वचा होने के कारण भी रूसी होने की समस्या हो सकती है | 

 

अनियमित बालों की देखभाल करना 

बालों का गलत तरीकों से ख्याल रखने से जैसे की गलत दिनचर्या में बालों को धोना, ज्यादा या फिर कम मात्रा में शैम्पू का उपयोग करना और बालों को बार-बार न धोना, रूसी होने के मुख्य कारण बन सकते है |      

 

थायराइड की समस्या का होना 

थायराइड की समस्या होने से भी सिर की त्वचा काफी रूखी हो जाती है, जिससे रूसी हो सकती है | 

 

तनाव और मानसिक स्वास्थ्य का ख़राब होना 

अत्यधिक तनाव में रहने से और ख़राब मानसिक स्वास्थ्य भी रुसी होने का कारण बन सकते है | 

 

रूसी से छुटकारा पाने के लिए आप कटोकोनाज़ोल, सेलेनियम सल्फाइड या फिर जिंक युक्त शैम्पू का इस्तेमाल कर सकते है, पर ध्यान रहे किसी तरह के नुस्खे को अपनाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से ज़रूर परामर्श कर लें | आइये जानते है होम्योपैथी में डैंड्रफ का कैसे किया जाता है इलाज :- 

 

होम्योपैथी में कैसे किया जाता है डैंड्रफ का इलाज ? 

होम्योपैथी उपचार केवल एक ऐसा उपचार है, जो व्यक्ति को सामान्य रूप से ठीक कर देता है | आसान भाषा में बात करे तो होम्योपैथिक उपचार पूरे रोगी पर और उनकी विक्षिप्त स्थिति पर ध्यान अधिक केंद्रित करता है | होम्योपैथिक दवाओं को निर्धारित करने से पहले रोगी के स्थिति की अच्छे से जांच-पड़ताल की जाती है, इसके बाद ही स्थिति अनुसार होमियोपैथ डॉक्टर दवाओं को निर्धारित करता है, जिसमें रोगी के मेडिकल इस्तिहास, शरीरिक और मानसिक संरचना शामिल होते है | 

यदि आप में से कोई भी डैंड्रफ की समस्या से परेशान है और कई संस्थानों या फिर घरेलू उपचार करने के बाद भी आपकी स्थिति पर किसी भी तरह का सुधार नहीं आ रहा है तो डैंड्रफ होम्योपैथी इलाज के लिए आप डॉक्टर सोनल जैन से परामर्श कर सकते है | डॉ सोनल हीलिंग विद होम्योपैथी की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन मुंबई के बेहतरीन होमियोपैथ में से एक है, जो अपने मरीज़ों पिछले 18 सालों से होम्योपैथिक उपचार के ज़रिये सटीकता से इलाज कर रही है | इसलिए आज ही डॉ सोनल हीलिंग विद होम्योपैथी की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं और इलाज के लिए अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इसके अलावा आप वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से संपर्क कर सीधा संस्था से बात कर सकते है |        

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मिस वैशाली ने बताया होम्योपैथिक की मदद से कैसे मिली उनके बेटे को जुकाम और बुखार की समस्या से मुक्ति

डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी के यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक वीडियो के माध्यम से एक मरीज़ ने यह बताया की उनका नाम वैशाली है और उनके बेटे का नाम गिरीश है | उनके बेटा को काफी समय से जुखाम और भुखार की समस्या से गुजर रहा था | जब उनका बेटा 4 साल का था, तब से ही उसे मीठे पदार्थ और तले हुए पदार्थ को खाने में परेशानी हो रही थी | जब भी बर्रिश पड़ती थी उनके बेटे का काफी ठंड लगने लग जाती थी | उन्होंने अपने बेटे का कई एलॉपथी हॉस्पिटल में इलाज करवाये, लेकिन इलाज के बाद भी स्थिति में किसी भी प्रकार का सुधर नहीं आ रहा था | उनके बेटे ने जुखाम और भुखार से संबंधित कई तरह के एलॉपथी दवाओं का भी सेवन भी किया, लेकिन समस्या ने सुधार आने के बजाये उनके बेटे को इन दवाओं से होने दुष्प्रभाव से सामना कर पड़ रहा था | 

फिर किसी ने उन्हें डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी में जाकर अपने बेटे का इलाज कराने का सुझाव दिया और अगले दिन ही वह इस संस्था में अपना इलाज करवाने के लिए पहुंच गए | इस संस्था में उनकी मुलाकात डॉक्टर सोनल जैन से हुई, जिन्होंने उनके बेटे की सस्याओं का परीक्षण किया और कुछ होम्योपैथी दवाएं निर्धारित कर दिया | दवाइयों को सेवन करते हुए अब 2 महीने हो गए है और उनके बेटे की स्थिति में काफी सुधार भी आने लग गया है | इसके साथ ही उनके बेटे को मीठे खाने में किसी भी की परेशानी नहीं हो रही और उनके बेटे को अब अपने नेबुलाइज़र रखने की ज़रुरत नहीं पड़ती | इसलिए इलाज के लिए वह डॉक्टर सोनल जैन का तेह दिल से शुक्रिया करना चाहते है | 

इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक दवाओं में स्पेशलिस्ट है, जो पिछले 18 वर्षों से पीड़ित मरीज़ों का होम्योपैथिक उपचार के माध्यम से स्थायी रूप से इलाज  कर रही है | इसलिए आज ही डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नमक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें इसके अलावा आप वेबसाइट में दिए गए नंबरों से भी सीधा संपर्क कर सकते है | 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और इस विडियो को पूरा देखें | आप चाहे तो डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है | इस चैनल पर आपको इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जाएगी |

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मिस रिद्धि कांबले ने बताया होम्योपैथी दवाओं ने किया उनकी समस्याओं का सटीक इलाज

डॉ. सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी संस्था के यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक वीडियो में सफलतापूवर्क मिले इलाज के बारे में एक मरीज़ ने यह बताया की उनका नाम रिद्धि कांबले है और वह काफी समय से पाइल्स, पीसीओडी और वजहें घटने की समस्या से गुजर रहा थे | इंटरनेट में सर्चिंग के दौरान ही उन्हें डॉ. सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी संस्था के बारे में पता लगा था और उनके वेबसाइट में मौजूद समीक्षा को पढ़कर ही उन्होंने इस संस्था में अपना करवाने का निर्णय लिया था | वह इस संस्था में इलाज के लिए 3 महीने पहले आयी थी | 

इस संस्था में पहुंचने के बाद उनकी मुलाकात डॉक्टर सोनल जैन से हुई | डॉक्टर ने विनम्रता से उनकी परेशानी को समझा और जाँच-पड़ताल के बाद उन्हें 3 महीने के लिए कुछ होम्योपैथी दवाएं निर्धारित कर दी | उन्होंने इन दवाओं को निर्धारित किये गए समय पर निरतं सेवन किया था, जिसके परिणाम स्वरुप अब उन्हें पाइल्स से जुडी कोई भी परेशानी नहीं है और इसके साथ ही जब वह इस संस्था में इलाज के लिए आये थे तब उनके शरीर में सिर्फ 7.5 ग्राम खून ही मौजूद था, लेकिन इलाज के बाद अब यह बढ़कर 11.5 ग्राम हो गया है | उन्हें पीसीओडी की भी समस्या थी, जिस वजह से उन्हें पीरियड्स इरेगुलर आते थे, लेकिन अब उस समस्या से भी उन्होंने छुटकारा पा लिया है | 

इसलिए वह इलाज के लिए डॉक्टर सोनल जैन का शुक्रिया करना चाहते है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथी दवाओं में स्पेशलिस्ट है, जो पिछले 18 वर्षों से पीड़ित मरीज़ों का स्थायी रूप से इलाज कर रही है | इसलिए परामर्श के लिए आज ही डॉ. सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी की वेबसाइट पर जाएं और अपनी अपॉइनमेंट को बुक करें | इसके अलावा आप वेबसाइट में मौजूद नंबरों से भी सीधा संपर्क कर सकते है | 

इससे जुड़ी अधिक जानकरी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक कर इस वीडियो को पूरा देखें | आप चाहे तो डॉ. सोनल जैन होम्योपैथिक क्लिनिक मुंबई नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है | इस चैनल पर आपको इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जाएगी |