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थायराइड क्या होता है, इसके लक्षण, कारण और होम्योपैथिक में कैसे किया जाता है इलाज ?

थायराइड हमारे शरीर के गले में मौजूद तितली की तरह एक ग्रंथि होती है, जो गले के आगे के हिस्से में स्थित होता है | यह  ग्रंथि शरीर में अलग-अलग तरह के हार्मोन का निर्माण करती है, जैसे की ट्राईआयोडोथायरोनिन T3 और थायरोक्सिन T4 आदि शामिल है, जो हमारे शरीर में मौजूद मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का कार्य करते है और कैल्सीटोनिन नामक हार्मोन हड्डियों में मिनरल्स को बनाये रखने का काम करती है | 

 

हमारे दिमाग में मौजूद एक ग्रंथि प्रतिक्रिया को भी थायराइड द्वारा निर्मित हार्मोन के ज़रिये नियंत्रित किया जाता है | इसके अलावा पिट्यूटरी ग्रंथि भी इन हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन ( टीएसएच ) का निर्माण करती है, जो रक्त में T3 और T4 हार्मोन की मात्रा को कम-ज़्यादा करने का कार्य करता है | जब हमारे रक्त में मौजूद T3 और T4 हार्मोन का स्तर काफी हद तक बढ़ जाता है, तब इस स्थिति को थायराइड के स्तर का बढ़ना कहा जाता है | इसके विपरीत जब रक्त में मौजूद T3 और T4 हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो इससे भी थायराइड के स्तर कम हो जाता है, जिससे हाइपोथायरॉइडिज़्म भी कहा जाता है | 

Homeopathy thyroid treatment demonstration by Dr. Sonal Mehta at her clinic.

थायराइड कितने प्रकार के होते है ? 

पुरुषों की तुलना में महिलाएं सबसे अधिक थायराइड से प्रभावित होती है | थायराइड के स्तर बढ़ने और घटने के अलावा और भी ऐसे कई थायराइड से संबंधित समस्याएं होती है, जैसे की थायराइड में सिस्ट का बनना, ट्यूमर और थायराइड कैंसर आदि शामिल है | अब अगर थायराइड के प्रकार के बात करें तो यह दो प्रकार के होते है पहले है हाइपोथायरॉइडिज़्म और दूसरा है हाइपरथायरॉइडिज़्म |   

 

हाइपरथायरॉइडिज़्म तब उत्पन्न होता है, जब गले की ग्रंथि T4 यानी  थायरोक्सिन का निर्माण सबसे अधिक करने लग जाती है | जिसकी वजह से हमारे शरीर में थायराइड से संबंधित विकार तेज़ी से बढ़ने लग जाते है, जो शरीर के वजन को तेज़ी से घटाने और दिल की धड़कन को तेज़ी से बढ़ाने लग जाता है |      

         

हाइपोथायरॉइडिज़्म तब उत्पन्न होता है जब गले की ग्रंथि कुछ ज़रूरी हार्मोन का निर्माण करना बंद कर देती है | जब हमारे शरीर में बहुत कम ही मात्रा में हार्मोन मौजूद होते है तो हमारा शरीर बहुत थका हुआ महसूस करता है | इसके अलावा शरीर का वजन बहुत तेज़ी से बढ़ने लग जाता है और ठन्डे तपमान के लिए सहनशक्ति काफी कम हो जाती है |

 

थायराइड के मुख्य लक्षण क्या है ?      

थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का कार्य करता है | थायराइड में असामान्यताएं के कई लक्षण दिखाई दे सकते है, जिनमें शामिल है :-   

 

हाइपरथायरॉइडिज़्म होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखयी दे सकते है, 

  • वजन का तेज़ी से घटना 
  • गंजापन होना 
  • बार-बार पसीना आना 
  • चिड़चिड़ रहना 
  • गर्दन में सूजन होना 
  • गर्मी के संवेदनशील होना 
  • भूख लगना 
  • दिल के धड़कन का तेज़ी से बढ़ जाना 
  • अनियमित रूप से मासिक धर्म आदि 

 

हाइपोथायरॉइडिज़्म होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखयी दे सकते है, 

  • तेज़ी से वजन का बढ़ना 
  • ठंडे तापमान के प्रति संवेदनशील होना 
  • बालों और त्वचा का शुष्क होना 
  • हर समय मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी रहना 
  • हाथों का सुन्न और झुनझुनी होना 
  • अवसाद और चिंता की समस्या 
  • अधिक थकान का अनुभव करना 
  • मानसिक धुंधलापन स्थिति आदि 

थायराइड कैंसर होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते है,

  • गर्दन पर गांठ जैसे महसूस होना 
  • आवाज़ का बदलना 
  • खाना को निगलने में परेशानी होनी 
  • गार्ड की समस्या 

  

थायराइड के मुख्य कारण क्या है ?

शरीर में थायराइड से जुड़े विकार होने के कई कारण हो सकते है, जिनमें शामिल है :- 

 

  • किसी तरह के वायरल की चपेट में आने से, थायराइड से जुड़े विकार बढ़ सकते है | 
  • आयोडीन की कमी होना 
  • ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण 
  • कुछ दवाओं के सेवन से 
  • अधिक समय तनाव में रहना 
  • बच्चे की डिलीवरी के बाद 
  • अनुवांशिक कारण से 

 

होम्योपैथिक में कैसे किया जाता है थायराइड का इलाज ? 

एलॉपथी डॉक्टर थायराइड के आम उपचार में पीड़ित व्यक्ति को कुछ सप्लीमेंट्स निर्धारित कर देते है, ताकि थायराइड के स्तर पर नज़र राखी जा सके, हालांकि यह समस्या का कोई स्थिर इलाज नहीं है | होम्योपैथी एकलौता ऐसा सुरक्षित उपचार है, जिसमें सही परिणाम मिलने के बाद मरीज़ हार्मोन के सप्लीमेंट्स को लेना छोड़ सकता है | 

 

होम्योपैथिक उपचार केवल बीमारी का ही नहीं उपचार करता, बल्कि यह उसके लक्षणों को पूरी तरह से कम करने और अन्य बीमारियों की संभावना को भी ठीक कर देता है | लक्षणों को दबाने के बजाय होम्योपैथिक उपचार इन लक्षणों को जड़ से ख़तम करने की कोशिश करता है | यह दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली की तरह काम करती है और उन एंटीबॉडी को ख़तम करने का काम करती है, जो थायराइड की ग्रंथि को नुक्सान पहुंचने का कार्य करती है | यदि आप में कोई भी व्यक्ति थायराइड से जुड़े विकार से पीड़ित है तो इलाज के लिए आप डॉक्टर सोनल जैन से मिल सकते है | 

डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक उपचार में स्पेशलिस्ट है, जो पिछले 18 वर्षों से होम्योपैथी उपचार के ज़रिये सटीकता से इलाज कर रही है | इसलिए आज ही डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मनेट को बुक करें | आप चाहे तो वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से सीधा संपर्क कर सकते है |         

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महिलाओं में कामेच्छा को बढ़ने के लिए अपनाएं ये होमेओपेथिक दवाएं

महिलाओं के शरीर में भी हार्मोनल परिवर्तन होने के कारण उनमें कामेच्छा की कमी आने लग जाती है या फिर स्थिति के अनुसार बदलती रहती है | इसके अलावा रिश्तों में अनबन, अवसाद को कम करने वाली दवाओं के सेवन से भी महिलाओं में कामेच्छा की कमी होने लग जाती है | यदि एक उम्र से पहले ही आपकी यौन संबंध ड्राइव कम होती जा रही है तो इसका मतलब यह है की आपके कामेच्छा में कमी होने लग गयी है | जिसका सही समय पर इलाज करवाना बेहद ज़रूरी होता है, नहीं तो इसकी वजह से आपके बनाये रिश्ते भी खराब हो सकते है | 

Natural homeopathic medicine preparation by Dr. Sonal Mehta for holistic health.

महिलाओं में कामेच्छा को बढ़ाने के लिए होमेओपेथिक दवायों को अपनाएं   

 

कई बार महिलाएं अपनी कामेच्छा को बढ़ाने के लिए एलॉपथी या फिर आयुर्वेदिक दवाओं का सहारा ले लेते है, जिसकी वजह से उन्हें कई तरह के दुष्प्रभावों से गुजरना पड़ जाता है | लेकिन इस स्थिति में होमेओपेथिक दवाओं को अपनाना से बेहतर विकल्प और कोई भी नहीं है, क्योंकि होमेओपेथिक दवाओं से दुष्प्रभाव पड़ने के अवसर शुन्य होते है और यह समस्या को जड़ से ख़तम करने में सक्षम होता है | एक सही विशेष्ज्ञ द्वारा निर्धारित किये गए होमेओपेथिक दवा के सेवन करने से, किसी भी प्रकार के दुष्प्रभावों को झेलना नहीं पड़ता | इन्ही कारणों से हर तरह के रोगों के इलाज के लिए होमियोपैथी उपचार का उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है | 

Vials of homeopathic tablets labeled with herbal remedy names on wooden surface, natural healing with homeopathy.

यदि आप भी कामेच्छा में कमी आने की समस्या से जूझ रहे है और इलाज करवाना चाहते है तो इसमें डॉ सोनल हीलिंग विथ होमियोपैथी आपकी पूर्ण रूप से मदद कर सकता है | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक दवाओं में स्पेशलिस्ट है, जो पिछले 18 वर्षों से पीड़ित मरीज़ों का सटीकता से इलाज कर रहे है | इसलिए परामर्श के लिए आज ही डॉ सोनल हीलिंग विथ होमियोपैथी नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मनेट को बुक करें | इसके अलावा आप वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से सीधा संस्था से संपर्क कर रहे है |      

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मिस आरती शिंदे ने बताया की कैसे होम्योपैथी द्वारा किया गया उनके पाइल्स की समस्या का इलाज

डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट एक वीडियो द्वारा एक मरीज़ ने यह बताया की उनका नाम मिस आरती शिंदे और वह पिछले एक-डेढ़ साल से पाइल्स की समस्या से जूझ रही थी | उन्हें पेट में काफी जलन और सूजन समस्या की हमेशा शिकायत रहती थी | इसलिए एक महीने पहले वह डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी में अपना इलाज करवाने आये थे | इस संस्था की डॉक्टर सोनल जैन ने काफी अच्छे से उनकी परशानी को समझा और जाँच-पड़ताल के बाद पाइल्स की समस्या का इलाज के लिए उन्हें एक महीने तक की होम्योपैथी दवा और मलहम की क्रीम निर्धारित कर दिया | 

 

होम्योपैथी दवाओं के सेवन के कुछ ही दिनों बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार आने लग गया और अब वह 70 प्रतिशत तक ठीक भी हो गयी है | इसलिए आज वह फिर से डॉक्टर सोनल जैन के पास अपना इलाज कराने आयी है, ताकि वह पूर्ण रूप से ठीक हो सके | इसलिए वह डॉक्टर सोनल जैन का तेह दिल से इलाज के लिए शुक्रिया करना चाहते है और साथ में यह भी कहना चाहते है की यदि कोई भी व्यक्ति ऐसा ही परिस्थिति से गुजर रहा है तो उनकी सलाह यही है कि वह व्यक्ति अपना इलाज डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी से ही करवाएं | 

यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की समस्या से गुज़र रहा है और एलॉपथी इलाज करवाने के बाद भी उनकी स्थिति में किसी प्रकार का सुधार नहीं आ रहा है तो इसके लिए आप डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन ने होम्योपैथी उपचार में स्पेशलिस्ट है, जो पिछले 18 सालों से पीड़ित मरीज़ों का सटीक इलाज कर रही है | इसलिए आज ही डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मनेट को बुक करें | आप चाहे तो वेबसाइट में दिए गए नंबरों से भी सीधा संस्था से संपर्क कर सकते है | 

 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और इस वीडियो को पूरा देखें | इसके अलावा आप डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है | इस चैनल पर आपको इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जाएगी |       

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कौन-सी होम्योपैथिक दवाएं का उपयोग कर, पेट के मोटापे और चर्बी को कम किया जा सकता है ?

मोटापा या फिर वजन को कम करने के लिए हर हेल्थ और फिटनेस एक्सपर्ट्स द्वारा एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाने की सलाह दी जाती है | वही कुछ लोग ऐस भी होते है जो घरेलू नुस्खे और कुछ दवाओं के सेवन से अपने वजन को कम करने की कोशिश किया करते है | इसी तरह से पेट के मोटापे और चर्बी को कम करने के लिए कुछ होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग किया जाता है | फैट को कम करने के लिए कई तरह की होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध है | अगर आप पेट के मोटापे और चर्बी को कम करना चाहते है तो इसके लिए आप एलॉपथी के बजाए होम्योपैथी दवाओं का चुनाव कर सकते है, क्योंकि होम्योपैथिक दवा को बाकी दवाओं की तुलना में सबसे सुरक्षित माना जाता है | 

 

डॉ सोनल हीलिंग विद होम्योपैथी के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन का यह कहना है कि पेट के मोटापे और चर्बी को कम करने के लिए होम्योपैथिक दवाओं का सेवन कर सकता है, क्योंकि होम्योपैथी इकलौती ऐसी दवा है, जिससे शरीर पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता | इसलिए निसंकोच होकर कोई भी व्यक्ति पेट के मोटापे और चर्बी को कम करने के लिए इन दवाओं का सेवन कर सकता है | लेकिन बिना सुझाव के किसी भी प्रकार के दवाओं का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है | इसलिए उनकी सलाह यही है की सबसे पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें और उनकी द्वारा निर्धारित दवाओं का ही सेवन करें | 

Natural homeopathy remedies for health and wellness.

होम्योपैथी दवाओं की कुछ नियम         

 

यदि आप अपने पेट के मोटापे और चर्बी को कम करना होम्योपैथिक दवाओं का चाहते है तो इसके लिए नियम होते है, जिनका अनुसरण करना बेहद ज़रूरी होता है | डॉ सोनल जैन का मानना है की पेट की चर्भी को कम करने के लिए होमियोपैथी दवायें तभी काम करती है, जब उन दवाओं को सेवन करने वाला व्यक्ति ज़रूरी परहेजों पर ध्यान देता है | 

 

एक डॉक्टर सबसे पहले मरीज़ के मेडिकल इतिहास को देखता है की कहीं किसी चीज़ से उस मरीज़ को एलर्जी या फिर किसी भी तरह की कोई परेशानी तो नहीं, इसके बाद ही वह पेट के मोटापे और चर्बी को कम करने के लिए होम्योपैथिक इलाज की प्रक्रिया को शुरू करता है | वजन को कम करने के लिए होम्योपैथिक दवाओं के उपयोग के साथ-साथ खाने में वसा के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है |   

 

मोटापे को कम करने के लिए होम्योपैथिक दवाएं 

 

यहाँ निम्नलिखित कुछ होम्योपैथिक दवाओं के नाम है, जिसके सेवन से पेट के मोटापे और चर्बी को तेज़ी से कम किया जा सकता है | लेकिन इन दवाओं का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से ज़रूर परामर्श कर लें, क्योंकि एक डॉक्टर स्थिति की जाँच-पड़ताल करने के बाद ही दवाएं निर्धारित करता है | 

 

  • कैल्केरिया कार्बोनिका 
  • नेट्रम म्यूर 
  • लाइकोपोडियम 
  • नक्स वोमिका 
  • एंटीमोनियम क्रूडम 

Plant-based homeopathy remedies for health and wellness at Dr Sonal Mehta Homeopathy clinic.

यदि आप में से कोई भी पेट के मोटापे और चर्बी की समस्या से परेशान है और अनेकों तरह के उपचारों और नुस्खों को अपनाने के बाद भी स्थिति पर किसी भी प्रकार का सुधार नहीं आ रहा है तो इलाज के लिए आप डॉ सोनल हीलिंग विद होम्योपैथी से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथी दवाओं में स्पेशलिस्ट है, जो पिछले 18 वर्षों से पीड़तों मरीज़ों का स्थायी रूप से इलाज कर रहे है | इसलिए परामर्श के लिए आज ही डॉ सोनल हीलिंग विद होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें इसके अलावा आप वेबसाइट पर दिए गयें नंबरों से सीधा संस्था से संपर्क कर सकते है | 

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मिस आरती रोबिन ने बताया डॉक्टर सोनल ने कैसे किया डरमोइड सिस्ट का होम्योपैथी से इलाज ?

डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी के यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक वीडियो के माध्यम से होम्योपैथी दवाओं से मिले सफलतापूर्वक इलाज के बारे में बताते हुए एक मरीज़ ने यह कहा की उनका नाम आरती रोबिन है | इस संस्था के बारे में उन्हें सर्च इंजन में रिसर्च के दौरान पता चला था, जहां उन्हें वेबसाइट में बने समीक्षा अनुभाग में इस संस्था के बारे में जाना की कैसे यह होम्योपैथी दवाओं के माध्यम से सभी मरीज़ों का सटीक इलाक़ कर रहे है | इसी से प्रेरित होकर उन्होंने डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी से इलाज करवाने का निर्णय लिया | 

 

जब पहली बार उनकी मुलाकात डॉक्टर सोनल जैन से हुई तो डॉक्टर ने एक से डेढ़ घंटे का समय लिया उनकी परेशानी को समझने का | सबसे खासियत वाली बात तो यह है की डॉक्टर सोनल जैन ने उनके बचपन से अब तक के पूरे इतिहास के बारे पुछा जैसे की उन्हें पहले कोई समस्या तो नहीं थी, कोई मेजर ऑपरेशन तो नहीं हुआ है और भी कई ऐसे बातों को जानने का प्रयास किया, जो उन्हें काफी प्रभावशाली लगा, क्योंकि यहाँ आने से पहले उन्होंने कई डॉक्टरों से अपना इलाज करवाया है, लकिन डॉक्टर सोनल जैन जैसे व्यवहार आजतक उन्हें और कहीं से भी देखने को नहीं मिला था |  

डॉक्टर सोनल जैन ने न केवल उनकी समस्याओं को भी समझा बल्कि इस समस्या का उपचार भी किया | इस समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर ने कुछ होम्योपैथी दवाएं निर्धारित की थी | हालाँकि शुरुआत दिनों में उन्हें दवाओं के सेवन से काफी संदेह हो रहा था, लेकिन सेवन के कुछ ही हफ़्तों बाद डरमोइड सिस्ट से होने वाले प्रभाव काफी कम होने लग गए थे | 

 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और इस वीडियो को पूरा देखिए | इसके अलावा आप डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट र सकते है | इस चैनल पर इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो बनाकर पोस्ट की हुई है |      

 

यदि आप में से कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की समस्या से जूझ रहा है और एलोपैथी इलाज कराने के बाद भी स्थिति में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं आ रहा तो होम्योपैथी इलाज के लिए आज ही डॉक्टर सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इसके अलावा आप वेबसाइट में मौजूद नंबरों से भी संपर्क कर सकते है |      

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फैटी लीवर क्या है ? जाने होम्योपैथिक उपचार से कैसे किया जा सकता है फैटी लीवर का इलाज

डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल मे पोस्ट एक यूट्यूब शोर्टस के माध्यम से यह बताया कि हर व्यक्ति के शरीर में मौजूद लीवर शरीर का सबसे बड़ा अंग होता है, जो भोजन को पचाने, शरीर के ऊर्जा को जमा करने और शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है | यदि बात करें तो फैटी लीवर की यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमे अनियमित रूप से वसा लीवर में जमा होने लग जाते है | दरअसल लीवर में मौजूद वसा की मात्रा यदि बहुत कम है तो यह सामन्य-सी बात होती है ओर इससे किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होता, लेकिन अगर लीवर में मौजूद वसा इसके वजन से 5 प्रतिशत अधिक है तो इस समस्या को फैटी लीवर या फिर वसायुक्त कहा जाता है | 

डॉक्टर सोनल जैन ने यह भी बताया की फैटी लीवर दो प्रकार के होते है, पहला है नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर और दूसरा है अल्कोहलिक फैटी लीवर | आइये जानते है दोनों में क्या अंतर है :- 

 

  • नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर :- यह समस्या भी दो प्रकार के होते है पहला जो साधारण फैटी लीवर की समस्या होती है, उसमे बिना लीवर की कोशिकाओं में सूजन के वसा एकत्रित होने लग जाते है, साथ ही इसकी जटिलताओं का जोखिम खतरा भी बहुत कम होता है और जो दूसरा नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर होता है उसे स्टीटोहेपेटाइटिस के नाम से से भी जाना जाता है, जो लीवर की कोशिकाएं में सूजन और लीवर को अन्य नुकसान भी पहुंचाने लग जाता है |

 

  • अल्कोहलिक फैटी लीवर :- जो व्यक्ति शराब और धूम्रपान जैसे नशीली पदार्थों का सेवन सबसे अधिक करता है वह  अल्कोहलिक फैटी लीवर का शिकार हो जाता है | 

 

यदि आप भी फैटी लिवर जैसी समस्या से गुज़र रहे है और इलाज करवाना चाहते है तो इसके लिए आप डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथिक उपचार में स्पेशलिट है,  जो होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग कर इस समस्या को कम करने में आपकी पूरी तरह से मदद कर सकते है | इसलिए डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी की वेबसाइट पर जाएं  और आज ही अपनी अप्पोइन्मनेट को बुक करें या फिर वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है | 

 

इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप डॉ सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते  है | इस चैनल पर इस विषय संबंधी पूरी जानकारी पर वीडियो बनाकर पोस्ट की हुई है |

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एक्जिमा क्या होता है और इसके मुख्य लक्षण कौन से है ? जाने होम्योपैथी से कैसे करें इसका इलाज

डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी के सीनियर डॉक्टर सोनल जैन ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक यूट्यूब शॉर्ट्स में यह बताया कि आज के समय में सबसे आम होने वाली समस्या में से एक है एक्जिमा, एक्जिमा एक किस्म की ऐसी समस्या है जिससे सामान्य-सी  दिखने वाली स्थिति भी त्वचा में लाल और सूजन जैसे विकार उतपन्न हो जाते है | त्वचा में कभी यह सुखी पपड़ी की तरह भी दिख सकता है या फिर कभी यह धब्बों के तरह भी दिख सकता है और कई बार गंभीर स्थिति होने पर यह छालों में परिवर्तित भी हो सकता है |   

 

अगर बात करें की एक्जिमा क्या होती है तो यह त्वचा से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिससे पीड़ित व्यक्ति को अपनी त्वचा  पर खुजली, लालिमा, सूजन और सूखापन जैसी समस्या होने लग जाती है | यह समस्या अक्सर शरीर की त्वचा पर पैच के रूप में दिखाई देने लग जाते है, जो पपड़ीदार और रिसने वाले तरल पदार्थ में परिवर्तित हो जाते है | हालाँकि इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति काफी असुविधाजनक हो जाता है, लेकिन एक्जिमा किसी भी तरह का संक्रामक नहीं होता है | यह एक तरह की चलनसार स्थिति होती है, जिसे होम्योपैथी की दवाओं से इसे प्रंबंधित और इसके लक्षण को कम किया जा सकता है | 

आइये जानते है एक्जिमा के मुख्य लक्षण कौन से :-    

 

एक्जिमा के प्रमुख लक्षण 

 

  • त्वचा में काफी खुजली होना  
  • सुखी त्वचा या फिर लालिमा होना 
  • खारिश के बाद त्वचा का सूज जाना
  • पपड़ीदार या फिर रिसने वाले पैच का उत्पन्न होना 
  • त्वचा पर गोल सा दाग पड़ना या फिर छाले पड़ना 
  • किसी भी तरह की चीज़ से आपकी त्वचा का संवेदनशील होना 

 

लेकिन इस बात का खासकर ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में एक्जिमा के लक्षण अलग-अलग तरह से भी दिखाई देते है | यदि आप भी एक्जिमा की समस्या से गुज़र रहे है और होम्योपैथी इलाज करवाना चाहते है तो इसमें डॉ सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी आपकी संपूर्ण रूप से मदद कर सकता है | बाकियों दवाओं की तुलना में होम्योपैथी एकलौती ऐसी दवा है, जिससे शरीर पर किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं पड़ते | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर सोनल जैन होम्योपैथी दवाओं में स्पेशलिस्ट है जो इस समस्या को कम करने में आपकी मदद कर सकते है |

 

इसलिए आज ही  सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी नामक वेबसाइट पर हैं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है या फिर डॉक्टर सोनल जैन हीलिंग विथ होम्योपैथी क्लिनिक नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है| इस चैनल पर आपको इस विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जाएगी |     

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Treating Digestive Problems With Homeopathic Treatments

Food is essential for all of us because we eat to live and live to eat. The more nutritious you eat, the better your health, but the more unhealthy you eat, the more it affects your health. Some people suffer from digestive disorders, including gastroesophageal reflux disease, cancer, irritable bowel syndrome, etc. 

Its symptoms are bleeding, bloating, heartburn, pain, and vomiting—some stomach problems that can be cured by doing home remedies. If you still have a digestion problem, visit the best doctor specializing in Digestion Problem Treatments In Mumbai Because some stomach problems should not be ignored. Homeopathic medicines are totally safe and have no side effects. 

Causes: 

  1. Infections: Some infections, such as food allergies, viral infections, and parasitic infections, can cause bacteria. Its symptoms are vomiting, diarrhea, fever, abdominal cramping, and pain.
  2. Gastroesophageal Reflux Disease: It can be a painful disturbance to the stomach. It may cause heartburn and acid in digestion. Its symptoms are a burning sensation in the chest after eating and chest pain. 
  3. Poor Nutrition: If you feed your body with unhealthy food, it negatively affects the immune system. 
  4. Celiac Disease: This disorder affects the digestive system.

Homeopathic remedies: 

1: Pulsatilla: It is a transition herbal remedy. It is explicitly considered for painful or inflammatory reproductive conditions. Pulsatilla helps relieve gastric discomfort, which can be caused by eating fatty foods such as cheese, cream, popcorn, chocolate, etc. 

2: China: It is a tree. Its bark is used to make medicines; china is used to kill germs, promote the release of digestive juices, and prevent bloating caused by gas. Several abdominal pains also cause this bloating. It has a broad action on the gastric tract and manages diarrhea. 

3: Lycopodium: Lycopodium is a homeopathic medicine used when the stomach is full from eating very little food. It helps treat acidity caused by the intake of starchy food such as pasta, bread, rice and potatoes. 

4: Ipecac: Ipecac is the root used to make medicines. It is most commonly used to cause vomiting by poisoning. It is also used to treat cancer. Ipecac contains all the chemicals that irritate the digestive tract. 

5: Nux Vomica: It is the tree. Its seeds are used to make medicines. It is most commonly used for swelling in the stomach, migraines, and many other diseases. It contains many different chemicals and germs that affect the brain. 

Some people suffer from digestive disorders, including gastroesophageal reflux disease, cancer, etc., which are caused by poor nutrition, infection, etc. Visit the best homeopathy doctor in Mumbai if symptoms don’t improve after five days. Some homeopathic remedies are used to treat digestion problems, such as China, Ipecac, Nux Vomica, Pulsatilla, and lycopodium. Homeopathic medicines are completely safe with no side effects.

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Heal Your Problems Naturally With Dr Sonal’s Healing With Homeopathy

Nothing compares to the power of nature, especially when it comes to finding a solution to cure our medical conditions. Nature has all the elements to heal every single condition that the human body can experience. Homoeopathy is a field of natural medical science that involves the curing of an ailment. 

In this video, the patient’s father, Vishal, explains his daughter’s health problem she has been experiencing for the past four years. The patient’s father approached several doctors to treat his daughter’s condition, which was causing her extreme discomfort. After taking several tests and numerous treatments, the patient was not able to find relief from her allergic cough until they contacted Dr Sonal’s Healing With Homeopathy.

 

Dr Sonal’s Healing With Homeopathy provided an absolute treatment to the patient. The homoeopathic treatment finally solved her allergic cough condition and relieved her from the discomfort she had been experiencing for a long time. The worried parents could not be happier as their daughter was finally able to relax. 

With Dr Sonal’s Healing With Homeopathy, you can get absolute treatment for your health condition and remarkable results. Homoeopathy identifies and cures the sole problem causing your health complications. Therefore, if you are experiencing any kind of pain or discomfort in the body and are not able to identify and cure the problem, contact Dr Sonal’s Healing With Homeopathy and get the care you deserve for yourself.  

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क्या होम्योपैथिक दवा गर्मी से जुड़ी समस्याओं को ठीक कर सकती है?

गर्मियों की गर्म हवा खतरनाक साबित हो सकती है। जब गर्मी शुरू होती है, साथ में अपने साथ कोई न कोई बीमारी की स्थिति लेकर आती है जिसको  बहुत ध्यान से ठीक करना पड़ता है। यह साल एलोपैथिक दवा लेने के बजाय होम्योपैथिक दवा ली जाए- सुरक्षित, गैर- विषैला प्राथमिक चिकित्सा के उपयोग के लिए अपेक्षाकृत सरल दिशानिर्देशों के साथ, और बच्चों और बड़ों के लिए समान रूप से प्रभावी है। होम्योपैथी के अंतर्निहित सिद्धांत में ऐसे पदार्थ लेना शामिल है जो किसी व्यक्ति में बीमारी का सामना करने वाले लक्षणों के समान लक्षण पैदा कर सकता है।

होम्योपैथिक उपचार दर्द से राहत, उपचार में तेजी लाने और संक्रमण को रोकने के लिए तेजी से काम करते हैं। इसके अलावा, होम्योपैथिक उपचार सुरक्षित, सौम्य, गैर विषैले, सुखद स्वाद और बिना किसी दुष्प्रभाव के हैं। गर्म मौसम में पसीना आने के कारण हमारे शरीर में महत्वपूर्ण तरल पदार्थों और लवणों का भंडार कम हो जाता है, जो पोषक तत्व हमें स्वस्थ रूप से काम करने के लिए चाहिए होते हैं। इससे निर्जलीकरण और थकावट, या यहां तक कि हीट स्ट्रोक जैसी सामान्य समस्याएं हो सकती हैं जो कभी-कभी घातक हो सकती हैं, लेकिन होम्योपैथिक उपचार आपको गर्मी के मौसम में गर्मी की थकावट के लक्षणों से बचने में मदद कर सकते हैं।

 

गर्मी में अक्सर होने वाले कुछ लक्षण: 

  • बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • ठंडी और चिपचिपी त्वचा
  • नाड़ी और श्वास तेज होना
  • सिरदर्द
  • चक्कर आना
  • जी मिचलाना
  • मांसपेशियों में ऐंठन और पेट दर्द

होम्योपैथिक उपचार गैर विषैले होते हैं और शरीर को गर्म अवधि में आवश्यक सेल लवण और पोषक तत्वों के भंडार को फिर से भरने में मदद करने और ऐंठन, दर्द और थकान से राहत देने का एक सुरक्षित तरीका है। गर्मी से निपटने के लिए कुछ सबसे आम होम्योपैथिक दवाएं हैं:

 

  • कैलेंडुला: यह सभी उद्देश्य त्वचा की खराबी के लिए दवा है जो हम लोग अक्सर गर्मी में देखते है। जब घाव, संक्रमण, लंबे समय तक धूप में रहने और यहां तक कि अत्यधिक प्रदूषण और गंदगी के कारण त्वचा क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो कैलेंडुला का उपयोग करने का प्रयास किया जा सकता है। 
  • बेलाडोना: सामान्य तौर पर, सन स्ट्रोक, निर्जलीकरण और सूरज के अत्यधिक संपर्क में आने से आपको गर्मी से होने वाले सिरदर्द सहित कई समस्याएं और स्थितियां हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों का इलाज करने के लिए, सन-स्ट्रोक से संबंधित बीमारियों और लक्षणों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली होम्योपैथिक दवा बेलाडोना का उपयोग किया जा सकता है।
  • रहस्य टोक्सिकोडेन्डोंन: यह दवा सामान्य तौर पर, सन स्ट्रोक, निर्जलीकरण और सूरज के भारी संपर्क में आने से आपको गर्मी से होने वाले सिरदर्द सहित कई विकार और स्थितियां हो सकती हैं। एस्थेटिक का इलाज करने के लिए, सन-स्ट्रोक से संबंधित आयुर्वेदिक औषधि बेलाडोना का उपयोग किया जा सकता है।
  • लेडुम: लेडुम या लीडम पलुस्त्रे एक सबसे बढ़िया होम्योपैथिक दवा, जब गर्मियों में किसी को कोई छोटा मोटा कीड़ा काट जाए। 
  • यूफ्रासिया ऑफिसिनैलिस: यह होमो दवा आंखों की समस्याओं के लिए बनी है जो कि सूर्य अनाश्रयता या घमौरियों और गर्मी से संबंधित अन्य कारकों में अत्यधिक पसीना आना।  

अगर आप कोई गर्मी के मौसम में थकावट, सिरदर्द, या किसी भी प्रकार की और परेशानी से जूझ रहे है तो अपने नजदीकी होम्योपैथिक डॉक्टर से दवा अपनी दिकत की मुताबिक गर्मी में ले सकते है।