आज की भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण सेहत का ध्यान न रखने पर व्यक्ति कई तरह की समस्याओं का शिकार हो जाता है, जिसमें डायबिटीज की समस्या भी शामिल है। दरअसल, आज के समय में डायबिटीज की समस्या होना बहुत ही आम बात है। पहले से समस्या अधिक उम्र वाले लोगों को ही प्रभावित करती थी, पर आज इस समस्या की चपेट में सभी लोग आ गये हैं। आप देखेंगे, कि आज हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित होता ही है। यह बीमारी ब्लड शुगर से जुड़ी हुई होती है, जिस पर ध्यान न देने पर गंभीर भी हो सकती है। दरअसल, शरीर में इस समस्या का निर्माण तब होता है, जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है, या फिर उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति के खून में ग्लूकोज का स्तर हद से ज्यादा बढ़ जाता है। इस समस्या को मेटाबॉलिक डिसऑर्डर भी कहा जाता है। दरअसल, यह उम्र भर बनी रहने वाली एक गंभीर समस्या है, जिसका कोई भी स्थायी इलाज नहीं है। इस समस्या को सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है, जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता। इसलिए, नियमित रूप से डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को इसका टेस्ट करवाते रहना चाहिए, ताकि उनके पास ब्लड शुगर के स्तर की पूरी जानकरी हो। समस्या की समय पर पहचान करके इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
दरअसल, आपने यह हर बार सुना ही होगा, कि जो व्यक्ति डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित होता है, दरअसल उसको हर तीन महीने में डायबिटीज टेस्ट कराने की जरूर सलाह दी जाती है। ऐसे में, बहुत से लोगों के मन में सवाल उठता है, आखिर क्यों डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को हर तीन महीने में टेस्ट कराने के लिए कहा जाता है? दरअसल, हर व्यक्ति के लिए हर तीन महीने में ब्लड शुगर टेस्ट कराना महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को हर तीन महीने में HbA1c टेस्ट कराने कि सलाह दी जाती है। क्योंकि, इससे मरीज की मौजूदा स्थिति का पता चलता है और इससे यह भी पता चलता है, कि दवा का मरीजों पर कितना असर हो रहा है। ऐसे में, मरीज की स्थिति के हिसाब से दवा में बदलाव भी किया जा सकता है। दरअसल, हर तीन महीने में की जाने वाली जांच से दवा पर मरीज का स्वास्थ्य ठीक है या फिर नहीं यह पता चलता है। काफी लंबे समय से ली जाने वाली डायबिटीज की दवा आंखों, गुर्दों और दिल की सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। ब्लड शुगर की जांच से ही इस समस्या से बचाव किया जा सकता है। गंभीर स्थिति होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
ब्लड शुगर की जांच के लिए कौन-सा टेस्ट महत्वपूर्ण होता है?
ब्लड शुगर की जांच के लिए विशेष तौर पर HbA1c टेस्ट की सलाह प्रदान की जाती है। HbA1c टेस्ट हीमोग्लोबिन से जुड़ी ब्लड शुगर की मात्रा को मापने में मदद करता है। दरअसल, हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स का वो हिस्सा होता है, जो ऑक्सीजन को फेफड़ों के माध्यम से पूरे शरीर तक पहुँचता है। इस टेस्ट से ब्लड शुगर के स्तर की सही जानकारी एक व्यक्ति के पास होती ही है।
हर तीन महीने में डायबिटीज टेस्ट करने के क्या फायदे होते हैं?
- इलाज के प्रभाव की जानकारी प्राप्त होना।
- लम्बे समय की बीमारियों से बचाव होना।
- मरीज की स्थिति पर नजर होना।
निष्कर्ष: डायबिटीज एक आम समस्या है, जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। डायबिटीज के मरीजों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है, क्योंकि यह एक गंभीर बीमारी है, जो जिंदगी भर बनी रहती है। इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, केवल कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए, जो व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित होता है, उसको हर तीन महीने में HbA1c टेस्ट कराने की स्लाज दी जाती है। इस टेस्ट के माध्यम से मरीज की मौजूदा स्थिति के बारे में पता चलता है। इस समस्या और इसके इलाज के बारे में ज्यादा जानने के लिए आप डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. क्या पैदल चलने से शुगर लेवल कम हो सकता है?
हाँ, यह साथ है, कि रोजाना पैदल चलने से शरीर में शुगर का लेवल काफी कम हो जाता है और साथ में, डायबिटीज जैसी समस्या को कंट्रोल करने में काफी सहायता मिलती है। विशेष तौर पर, जो लोग टाइप 2 मधुमेह जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, उनके लिए रोजाना वॉक करना काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
प्रश्न 2. डायबिटीज टेस्ट दिन में कितनी बार करना चाहिए?
डॉक्टर के अनुसार, टाइप 1 मधुमेह की दिन में कम से कम 4 से 10 बार जांच करनी चाहिए, जिसमें रात को डिनर से पहले का समय, एक्सरसाइज करने के बाद का समय और सोने से पहले का समय शामिल होता है। इसके के चलते, जो लोग टाइप 2 मधुमेह की समस्या से पीड़ित होते हैं, उनको दिन में कम से कम 1 से 4 बार जांच करबि चाहिए। इसके साथ ही, जो लोग नॉन-इंसुलिन दवाओं का सेवन कर रहे होते हैं, दरअसल उनको दिन में कम से कम 1 से 3 बार जांच करनी चाहिए।
प्रश्न 3. डायबिटीज की समस्या किन लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है?
डायबिटीज की समस्या विशेषकर टाइप 2 मधुमेह, 45 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्तियों, अधिक वजन वाले लोगों, अनहेल्थी भोजन का सेवन करने वालों लोगों और साथ में, आनुवंशिक इतिहास रखने वाले लोगों को यह समस्या काफी ज्यादा प्रभावित करती है।
प्रश्न 4. डायबिटीज का पता लगाने के लिए कौन से 4 टेस्ट जरूरी होते हैं?
डायबिटीज जैसी समस्या का पता करने के लिए, HbA1c, फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्ट-प्रैंडियल शुगर और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस जैसे 4 टेस्ट काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।