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आखिर कितना सही होता है, चेहरे पर शिकाकाई पाउडर लगाना? इस्तेमाल से पहले जानें डॉक्टर की सलाह

आज के समय में ज्यादातर लोग अपने चेहरे जो बालों को ज्यादा चमकाते हैं, ताकि वह खुद को और दूसरों को सुंदर और अट्रैक्टिव लग सके। ऐसे में, बालों के लिए शिकाकाई एक हर्बल इलाज के तौर पर मशहूर रही है। ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल अपने झड़ते हुए बालों के लिए और डैंड्रफ जैसी समस्या के लिए करते हैं। पर आज हम इसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, कि क्या चेहरे के लिए भी शिकाकाई का इस्तेमाल किया जा सकता है? और क्या यह त्वचा की समस्याओं को ठीक कर सकता है? कहीं इसका इस्तेमाल करने पर कोई समस्या तो नहीं हो जाएगी? तो आइये इस लेख के माध्यम से हम इस के डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि आखिर कितना सही होता है, चेहरे पर शिकाकाई पाउडर लगाना?

चेहरे पर शिकाकाई पाउडर लगाना कितना सही होता है?

शिकाकाई बालों की देखभाल में इस्तेमाल होने की वजह से, इस की एक पारंपरिक भारतीय दवा के तौर पर बड़े पैमाने पर पहचान की जाती है। आमतौर पर, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि हाँ, शिकाकाई पाउडर को हम अपने चेहरे पर लगा सकते हैं, पर इस दौरान, इसका बहुत ही सावधानी से इस्तेमाल करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। शिकाकाई पाउडर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो आमतौर पर, शरीर की त्वचा को सेहतमंद बनाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान कर सकते हैं। शिकाकाई बालों के लिए एक जादुई उपाय होने के साथ-साथ त्वचा के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। दरअसल, इसके फायदे कम मात्रा में पाए जाते हैं, पर यह त्वचा के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट काफी ज्यादा भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं और साथ ही इसमें सूजन-रोधी गुण भी मौजूद होते हैं। एक शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल होने की वजह से यह चेहरे की त्वचा के अलग-अलग संक्रमणों जैसे कि मुंहासों के इलाज में मददगार है और झुर्रियों और महीन रेखाओं जैसे उम्र बढ़ने की निशानियों को कम करके स्किन को चमकदार बनाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करते हैं। 

चेहरे पर शिकाकाई पाउडर का इस्तेमाल कैसे करें?

चेहरे पर शिकाकाई पाउडर का इस्तेमाल आप इन तरीकों से भी कर सकते हैं, जैसे कि

  1. शिकाकाई पाउडर को दही या फिर गुलाब जल में मिलाकर एक फेस पैक तैयार करें और 15 से 20 मिनट तक अपने चेहरे पर लगाएं और फिर धो लें।
  2. शिकाकाई पाउडर को पानी में मिलाकर एक हलके क्लींजर को तैयार करें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और फिर इस को ठंडे पानी से धो लें। 

निष्कर्ष

शिकाकाई पाउडर का उपयोग सावधानी से करें और त्वचा की समस्याओं के लिए इसका उपयोग करने से पहले एक त्वचा विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और स्किन कि किसी भी समस्या का इलाज कराने के लिए आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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होम्योपैथिक दवा लेने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना नहीं मिलेगा दवा का असली फायदा

दुनिया भर में कई ऐसे लोग हैं, जो कई तरह की बीमारियों का सामना कर रहे हैं और इन विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए लोग द्वारा होम्योपैथिक उपचार को काफी ज्यादा असरदार माना जाता है। आपको बता दें, कि कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका ऐसा मानना है, कि होम्योपैथिक दवाओं का किस भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। आम तौर पर, होम्योपैथिक दवाओं को किसी भी तरह की गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए भी जाना जाता है। आपको बता दें, कि एलोपैथिक दवाओं के लंबे समय में कुछ साइड इफ़ेक्ट होते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग इसकी बजाए होम्योपैथिक दवाओं पर काफी ज्यादा भरोसा करते हैं। 

हालाँकि, आम तौर पर आपको होम्योपैथिक इलाज का असर दिखाई देने में थोड़ा वक्त लग सकता है, पर इसका असर काफी ज्यादा प्रभावशाली होता है। बता दें, कि इसने कई लोगों को कई तरह के फायदे प्रदान किये हैं। पर होम्योपैथी इलाज के दौरान, आपको कई रह की सावधानियों को ध्यान में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। आम तौर पर, अगर इस दौरान आप इन महत्वपूर्ण सावधानियों का ध्यान नहीं रखते हैं, या फिर भूल जाते हैं, तो यह आपके लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही इसके वजह से आप पर दवा का असर भी पुरे तरीके से नहीं हो पाता है। इसकी वहज से आपकी बीमारी को जड़ से खत्म होने के लिए काफी समय लग सकता है, या फिर सही तरीके से सावधानी न रखने के कारण समस्या का समाधान भी नहीं हो सकता है। इस वजह से ही आपको होम्योपैथी दवाओं का सेवन करने के दौरान कुछ नियमों को ध्यान में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

होम्योपैथिक दवाइयों के सेवन में बरतें ये सावधानियां

  1. दवाओं को सावधानी से रखें

आपको बता दें कि हमेशा होम्योपैथिक दवाओं को सावधानी के साथ रखना चाहिए, जैसे कि होम्योपैथिक दवाइयों को ज्यादा धूप और खुशबू वाली जगहों न रखें, क्योंकि इसके कारण यह दवाइयां खराब हो सकती हैं और तेज बदबू के कारण यह आपको नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसलिए इन दवाइयों को हमेशा सामान्य तापमान में ही रखें। 

  1. इन चीजों के सेवन से परहेज करें 

आम तौर पर, होम्योपैथिक दवाओं को लेते वक्त, कच्चे प्याज, लहसुन और कॉफी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करने से अपने आप का बचाव करें। इससे दवाओं का असर बिल्कुल भी नहीं होता है। इसके साथ ही आपको पान-गुटखा और स्मोकिंग आदि से भी अपना बचाव करना चाहिए। 

  1. कांच के गिलास में खाएं दवाएं 

बता दें, कि कभी भी होम्योपैथिक दवाओं का सेवन मेटल के गिलास में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से दवा और गिलास के बीच में, रिएक्शन हो सकता है और इस रिएक्शन की वह से आपकी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। दरअसल, इन होम्योपैथिक दवाओं का सेवन हमेशा कांच के गिलास में ही करना चाहिए।

  1. दवाओं को हाथों से न छुएं

अक्सर यह देखने को मिलता है, कि बहुत सारे लोग होम्योपैथिक दवाओं को अपने हाथों में लेकर ही खाते हैं। आम तौर पर, अगर आप भी इन दवाओं को अपने हाथों में लेकर ही खाते हैं, तो यह आपको कोई ख़ास फायदा नहीं प्रदान करती है। इसके साथ ही दवाओं का सेवन इस तरीके से करने से आपकी बीमारी पर किसी भी तरह का कोई असर नहीं होता है। आपको बता दें कि इस तरह की दवाओं को हमेशा कांच के बर्तन में लेकर ही खानी चाहिए। इससे आपको काफी फायदा हो सकता है। 

निष्कर्ष

विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए होम्योपैथिक उपचार को काफी ज्यादा असरदार माना जाता है। होम्योपैथिक दवाओं को किसी भी तरह की गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए भी जाना जाता है। होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करते वक्त आपको कई सावधानियों को ध्यान में रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, जैसे कि इन होम्योपैथिक दवाओं को हमेशा कांच के गिलास में खाएं, दवाओं को हाथों से न छुएं, होम्योपैथिक दवाओं को लेते वक्त, कच्चे प्याज, लहसुन और कॉफी जैसे पेय पदार्थों का सेवन आदि न करें। इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए या फिर अगर आप अपनी किसी भी तरह की समस्या के लिए होम्योपैथिक उपचार करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में इसके विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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जानें ऐसे 4 होम्योपैथिक उपचार के बारे में, जो आपकी डायबिटीज को करते हैं कंट्रोल

आज के समय में, डायबिटीज जैसी समस्या लोगों में काफी ज्यादा आम हो गयी है। मधुमेह या फिर डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है। इस बीमारी को सिर्फ दवाओं, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है। इस तरह की बीमारी में, लोगों के शरीर में शुगर की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ने लग जाती है, और इस तरह की स्थिति को कंट्रोल करने वाला हार्मोन (इंसुलिन) की पैदावार कम होने लगती है। आम तौर पर, डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों को लगातार भूख लगना, थकान, काफी ज्यादा प्यास लगना, अत्यधिक पेशाब, मुंह का सूखना, घाव का ठीक न होना और लगातार धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। आपको बता दें, कि अगर समय पर ब्लड शुगर जैसी समस्या को कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो इसके कारण शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसलिए मधुमेह या फिर डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी को कभी भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके लक्षण नज़र आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इसके अलावा इस तरह की समस्या के लक्षणों को कम करने के लिए कई अंग्रेजी दवाएं उपलब्ध है। इसके साथ ही, कुछ लोगों का मानना ​​है कि होम्योपैथी भी मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि कौन से होम्योपैथिक उपचार मधुमेह को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं?

डायबिटीज और होम्योपैथी

दरअसल, होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसका इतिहास 200 साल से भी पुराना है। आमतौर पर, इसे होम्योपैथिक दवा के नाम से भी जाना जाता है। असल में, इसका इस्तेमाल कई मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है। आपको बता दें, कि होम्योपैथी इस बात को काफी ज्यादा बढ़ावा देती है, कि किसी भी बीमारी के लक्षणों का इलाज प्राकृतिक पदार्थों से किया जा सकता है। ऐसे में, आपको यह ध्यान रखना चाहिए, कि अगर आप मधुमेह के इलाज के लिए होम्योपैथी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इस उपचार को प्राप्त करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

डायबिटीज के लक्षणों के लिए होम्योपैथिक उपचार

आमतौर पर, होम्योपैथिक उपचार मिनरल्स, पौधों, या फिर जानवरों से प्राप्त किये जाते हैं और इन सभी को प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। डायबिटीज के लिए होम्योपैथिक उपचार इस प्रकार हैं: 

  1. काला आलूबुखारा

ऐसा माना जाता है, कि काला आलूबुखारा में, मधुमेह के लक्षणों जैसे अत्यधिक प्यास, कमजोरी, त्वचा के छाले और अत्यधिक पेशाब का इलाज करने की क्षमता होती है।

  1. कोनियम हेमलॉक

हेमलॉक एक जहरीले पौधे की तरह होता है, जिसके रस का इस्तेमाल कई दवाइयाँ बनाने में किया जाता है। दरअसल, कोनियम हेमलॉक के इस्तेमाल से, डायबिटिक न्यूरोपैथी, या नर्व डैमेज जैसी समस्याओं का इलाज करने में मदद प्राप्त होती है। 

  1. प्लंबम (लेड)

दरअसल, लेड एक धातु की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल कई तरह की दवाओं को बनाने में किया जाता है। यह हाथ और पैरों में सुन्नता, नसों में दर्द और टिनिटस जैसे डायबिटीज के लक्षणों के इलाज में सहायता करता है। 

  1. मैरीगोल्ड

दरअसल, फूल का यह पौधा सिर्फ घर की सुंदरता को ही नहीं बढ़ाता है, बल्कि इस पौधे का इस्तेमाल, कई तरह की दवाइओं को बनाने में भी किया जाता है। आम तौर पर, ऐसा माना जाता है, कि यह पौधा डायबिटीज के लक्षण जैसे कि अल्सर के इलाज में भी काफी ज्यादा मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

मधुमेह या फिर डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है। इस बीमारी को सिर्फ दवाओं, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है। डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को लगातार भूख लगना, अत्यधिक पेशाब, मुंह का सूखना, घाव का ठीक न होना और लगातार धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं। डायबिटीज के लक्षणों के लिए काला आलूबुखारा, कोनियम हेमलॉक, प्लंबम (लेड) और मैरीगोल्ड जैसे होम्योपैथिक उपचार काफी ज्यादा फायदेमंद होते हैं। अगर समय पर ब्लड शुगर जैसी समस्या को कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो इसके कारण शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसलिए इस समस्या के लक्षण नज़र आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही अगर आप मधुमेह के इलाज के लिए होम्योपैथी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इस उपचार को प्राप्त करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आपको भी डायबिटीज जैसी कोई समस्या है और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल हीलिंग विथ होम्योपैथी क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में इस के डॉक्टर से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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चिंता और तनाव से राहत पाने के लिए जाने होम्योपैथी कैसे काम करती हैं।

तनाव अक्सर दिखाई नहीं देता पर यह काफी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। 

 

क्या आप इसके बारे में जानते हैं, कि चिंता और तनाव दुनिया भर में सबसे ज्यादा आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आम तौर पर, तनाव बुरा और अच्छा दोनों हो सकता है, क्योंकि यह हमें थोड़े समय के लिए प्रेरित और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए सहायता प्रदान कर सकता है, फिर चाहे वे समय सीमा को पूरा करना हो या फिर अपने आप को किसी खतरे से बचाना हो। पर जब किसी व्यक्ति का तनाव स्तर काफी ज्यादा पुराना हो जाता है, तो यह उसको थका सकता है और साथ ही कई तरह की सेहत समस्याओं को पैदा कर सकता है। 

जैसे कि, कई मामलों में, काम की समय सीमाओं से लेकर, अपनी खुद की जिम्मेदारिओं तक, तनाव हमारे जीवन में चुपचाप एक आधुनिक हिस्सा बन गया है। अध्ययनों के अनुसार, दुनिया भर में 75 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग अपनी जिंदगी में हर दो हफ्ते में किसी न किसी रूप में तनाव का एहसास करते हैं। आपको बता दें, कि यह हमेशा काफी ज्यादा गुस्सा करने, ज्यादा उदासी महसूस करने, काफी ज्यादा खाना खाने या फिर नींद न आने के रूप में दिखाई दे सकता है। आम तौर पर, अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाये, तो इसकी वजह से हृदय रोग, डिप्रेशन और यहां तक कि किसी भी चीज की लत लगना जैसी दीर्घकालिक बीमारियां पैदा हो सकती है। 

 

दरअसल तनाव के इलाज के लिए, व्यक्तिगत होम्योपैथिक दवाओं को बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, जो आम तौर पर, बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के आपके भावनात्मक और शारीरिक सेहत को ठीक करती हैं, चाहे वो चिंता हो, या फिर अचानक से होने वाली थकान हो, यह उपचार एक व्यक्ति को स्थाई शांति प्रदान करने के लिए जड़ से काम करता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं, तनाव के लक्षण और साथ ही चिंता और तनाव में होम्योपैथिक दवाएं कैसे काम करती हैं? 

 

दीर्घकालिक तनाव के लक्षण 

 

वैसे, तो एक व्यक्ति में तनाव के कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि

1. ज्यादा चिड़चिड़ापन और मन की स्थिति में उतार चढ़ाव होना। 

2. नींद की गुणवत्ता खराब होना। 

3. चिंता या फिर रोजाना घबराहट के दौरे पड़ना। 

चिंता और तनाव के लिए होम्योपैथी कैसे काम करती है?

 

1. मन और शरीर को संतुलित करना: आमतौर पर होम्योपैथी बिना किसी बेहोशी के एक व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायता प्रदान करता है। 

2. दीर्घकालिक उपयोग के लिए सुरक्षित: दरअसल इसमें किसी भी तरह की कोई भी आदत बनाने वाली दवा या फिर किसी भी तरह की कोई निर्भरता का जोखिम नहीं होता है। 

3. शारीरिक प्रभावों को कंट्रोल करना: होम्योपैथी एक व्यक्ति के पाचन और ऊर्जा स्तर को बहुत ही अच्छा बनाता है और साथ में नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। 

4. भावनात्मक ट्रिगर्स को लक्षित करना: यह अंतर्निहित दुःख, डर या फिर सदमे का समाधान करने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करता है। 

 

चिंता और तनाव से राहत पाने के लिए सब से बढ़िया होम्योपैथिक दवायें

 

1. इग्नाटिया

2. काली फॉस

3. नैट्रम म्यूर 

4. जेल्सीमियम 

5. अर्जेंट्स नाइट्रिक्स 

निष्कर्ष:

चिंता और तनाव दुनिया भर में सबसे ज्यादा आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। समय सीमाओं से लेकर, अपनी खुद की जिम्मेदारिओं तक, तनाव हमारे जीवन में चुपचाप एक आधुनिक हिस्सा बन गया है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाये, तो इसकी वजह से हृदय रोग, डिप्रेशन और यहां तक कि किसी भी चीज की लत लगना जैसी दीर्घकालिक बीमारियां हो सकती है। तनाव के लिए व्यक्तिगत होम्योपैथिक दवाओं को बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। चिड़चिड़ापन और मन की स्थिति में उतार चढ़ाव होना और नींद की गुणवत्ता खराब होना यह सब दीर्घकालिक तनाव के लक्षण होते हैं, जिनको इग्नाटिया, काली फॉस, नैट्रम म्यूर, जेल्सीमियम, अर्जेंट्स नाइट्रिक्स जैसी होम्योपैथिक दवाओं के इस्तेमाल से ठीक किया जा सकता है। चिंता और तनाव के लिए होम्योपैथी, मन और शरीर को संतुलित और शारीरिक प्रभावों को कंट्रोल करती है। अगर आप किसी तरह की चिंता या फिर तनाव से जूझ रहे हैं, और आप इसका होम्योपैथिक इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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उच्च रक्तचाप का होम्योपैथिक इलाज बिना किसी दुष्प्रभाव से पाएं आराम।

दरअसल, ब्लड प्रेशर का मतलब होता है, खून के प्रवाह की वजह से धमनियों पर बनने वाला दबाव। आम तौर पर, अगर आपको लगातार सिरदर्द, चक्कर आना या फिर बेचैनी जैसी समस्या महसूस होती है, तो यह असल में हाई ब्लड प्रेशर यानी कि उच्च रक्तचाप के संकेत हो सकते हैं। आपको बता दें, कि 120/80 mmHg के प्रेशर को नार्मल ब्लड प्रेशर कहा जाता है और 140/90 mmHg के प्रेशर को हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है, जो की असल में, आपकी किडनी और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सेहत के लिए नुकसान -दायक साबित हो सकता है। यह आम तौर पर एक “साइलेंट किलर” है, जो बिना किसी लक्षण के शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। दरअसल, इस तरह की समस्या के लिए एक अच्छी खबर यह है, कि होम्योपैथिक इलाज से आप इस को प्राकृतिक रूप से कंट्रोल कर सकते हैं, वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट के। इस लेख के माध्यम से, हाई ब्लड प्रेशर के कारण, लक्षण, और इस समस्या के लिए असरदार होम्योपैथिक दवाइयों के बारे में, जानकारी प्राप्त करेंगे। 

हाई ब्लड प्रेशर के कारण 

  1. मोटापा होना। 
  2. धूम्रपान करना। 
  3. ज्यादा मात्रा में शराब पीना। 
  4. ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करना। 
  5. नियमित व्यायाम न करना। 

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण 

आम तौर पर, ब्लड प्रेशर के स्तर को नार्मल बनाने और इस में अचानक होने वाले बदलाव को रोकने के लिए और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान से बचाने के लिए ब्लड प्रेशर का इलाज करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं, जैसे कि

  1. रोजाना सिर में दर्द होना। 
  2. नज़र की समस्याएं होना। 
  3. नाक से खून आना। 
  4. सांस लेने में दिक्कत होना। 

हाई ब्लड प्रेशर का होम्योपैथिक इलाज

असल में, एक होम्योपैथिक डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए, होम्योपैथिक दवाओं का चुनाव व्यक्ति के लक्षणों को बहुत ही ध्यान से देखने, शारीरिक जांच करने और अलग-अलग नैदानिक परिक्षणों के बाद किया जाता है। हाई ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए प्रयोग की जाने वाली होम्योपैथिक दवाएं इस प्रकार हैं: 

  1. नैट्रम म्यूर

इस दवा का इस्तेमाल, विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनका हाई बीपी के कारण, काफी ज्यादा सिर दर्द होता है, स्ट्रेस और इमोशनल ट्रॉमा बढ़ता है।

  1. बेलाडोना 

अगर हाई ब्लड प्रेशर के कारण आप का अचानक से सिर दर्द, तेज धड़कन और साथ ही चेहरा लाल हो जाए, तो इस तरह की स्थिति के लिए बेलाडोना दवा का उपयोग किया जा सकता है। 

  1. ग्लोनोइनम 

ग्लोनोइनम दवा का इस्तेमाल आम तौर पर, जब पूरे शरीर में नस फड़कने की भावना महसूस होना, तेज़ धड़कन, सिर में सनसनाहट जैसे संपन्न और गर्म मौसम में ब्लड प्रेशर बढ़ने पर किया जाता है। 

  1. रॉउवोल्फिया सर्पेंटिना 

रॉउवोल्फिया सर्पेंटिना दवा असल में, कुदरती रूप से ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायता प्रदान करती है, विशेष रूप से अगर आपका लगातार हाई ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ रहा है, तो इस दवा का विकल्प बहुत ही अच्छा होता है। 

नोट: किसी भी समस्या के लिए इन होम्योपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल करने से पहले एक बार किसी प्रमाणित होम्योपैथ डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

निष्कर्ष: उच्च रक्तचाप का समय पर इलाज न करने पर यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इस तरह की समस्या के लिए होम्योपैथिक एक प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी उपचार हो सकता है, जिस को डॉक्टर की सलाह के साथ अपनाया जा सकता है। अगर आपको भी हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, और आप इस समस्या का समाधान ढूंढ रहे हैं, तो आप आज ही डॉ. सोनल होम्योपैथिक क्लिनिक में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।